छत्तीसगढ़

कलेक्टर ने 5 आपदा मृतकों के वारिसों के लिए किया 4-4 लाख स्वीकृत

Shantanu Roy
6 Jun 2026 11:55 PM IST
कलेक्टर ने 5 आपदा मृतकों के वारिसों के लिए किया 4-4 लाख स्वीकृत
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Sarangarh-Bilaigarh. सारंगढ़-बिलाईगढ़। सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिले में प्राकृतिक आपदा से हुई मौतों के मामलों में राज्य सरकार द्वारा त्वरित राहत सहायता प्रदान की गई है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में आपदा पीड़ित परिवारों को आर्थिक सहायता देने की प्रक्रिया के तहत कलेक्टर पद्मिनी भोई साहू ने आरबीसी 6-4 के अंतर्गत 4-4 लाख रुपये की सहायता राशि स्वीकृत की है। जिले में अलग-अलग स्थानों पर हुई प्राकृतिक आपदाओं और दुर्घटनाओं में जान गंवाने वाले पांच व्यक्तियों के परिजनों को यह सहायता राशि दी जाएगी। प्रशासन द्वारा यह कदम पीड़ित परिवारों को तात्कालिक राहत पहुंचाने के उद्देश्य से उठाया गया है।
जानकारी के अनुसार, सरसीवा क्षेत्र में पानी में डूबने से हुई मृत्यु के मामले में मृतक अजय यादव के पिता फुलसाय को आर्थिक सहायता स्वीकृत की गई है। इसी प्रकार सारंगढ़ तहसील के छातादेई गांव में मृतक रामप्रसाद बरिहा की पत्नी बरतमती को भी सहायता राशि प्रदान की जाएगी। वहीं ग्राम रेड़ा में मृतक राकेश उर्फ पिंटू की माता शांति खूंटे को आपदा राहत के तहत 4 लाख रुपये की सहायता दी गई है। ग्राम टाड़ीपार में मृतक शेरसिंह के पुत्र फूलसाय को भी यह आर्थिक सहायता प्रदान की जाएगी।
इसके अलावा सर्पदंश की घटना में सारंगढ़ तहसील के ग्राम बासनपाली निवासी मृतक संतोषी सिदार के पति सूरज सिदार को भी आरबीसी 6-4 के तहत 4 लाख रुपये की सहायता राशि स्वीकृत की गई है। प्रशासन के अनुसार, सभी मामलों में संबंधित दस्तावेजों और जांच के आधार पर यह निर्णय लिया गया है। कलेक्टर पद्मिनी भोई साहू ने स्पष्ट किया है कि राज्य सरकार की प्राथमिकता आपदा प्रभावित परिवारों को समय पर सहायता उपलब्ध कराना है, ताकि उन्हें तत्काल आर्थिक राहत मिल सके।
आरबीसी 6-4 प्रावधान के तहत प्राकृतिक आपदा, दुर्घटना या आकस्मिक मृत्यु की स्थिति में पात्र परिजनों को निर्धारित सहायता राशि दी जाती है। इसी नीति के तहत यह स्वीकृति प्रदान की गई है। स्थानीय प्रशासन ने बताया कि स्वीकृत राशि जल्द ही संबंधित परिजनों के बैंक खातों में स्थानांतरित की जाएगी। साथ ही आगे भी ऐसे मामलों में त्वरित कार्रवाई जारी रहेगी। यह कदम राज्य सरकार की उस नीति का हिस्सा है, जिसमें आपदा पीड़ितों को बिना देरी के आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने पर जोर दिया गया है।
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