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Raipur. रायपुर। छत्तीसगढ़ में साय सरकार की अगुवाई में चल रहे नक्सल सफाए अभियान ने माओवादियों की कमर तोड़ दी है। हालात यह हो गए हैं कि नक्सली अब अपने इनामी और शीर्ष नेताओं को भी न बचा पाने की स्थिति में पहुंच गए हैं। सुरक्षा बलों के दबाव और सटीक रणनीति के चलते नक्सली बैकफुट पर हैं और लगातार शांति वार्ता की अपील कर रहे हैं। हाल ही में बीजापुर और सुकमा की सीमा पर स्थित केजीएच हिल्स में सुरक्षा बलों ने अब तक का सबसे बड़ा एंटी नक्सल अभियान चलाया। यह ऑपरेशन लगातार 21 दिन तक चला, जिसमें 1.72 करोड़ रुपए के इनामी 31 हार्डकोर नक्सली मारे गए। इस दौरान सुरक्षा बलों ने नक्सलियों द्वारा बिछाए गए 450 आईईडी, चार हथियार फैक्ट्रियां, 250 गुफाएं और भारी मात्रा में हथियार व राशन बरामद किया।
यह पहाड़ी इलाका नक्सलियों का सबसे सुरक्षित गढ़ माना जाता था, जहां तीन से चार सौ नक्सली रहते थे। इसकी भौगोलिक संरचना चुनौतीपूर्ण होने के कारण पहले यहां सुरक्षा बल प्रवेश नहीं कर पाते थे। लेकिन इस बार तीन राज्यों की पुलिस व सुरक्षा बलों ने मिलकर इस मजबूत ठिकाने को पूरी तरह ध्वस्त कर दिया। केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह की रणनीति के तहत नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में लगातार फॉरवर्ड ऑपरेशनल बेस (एफओबी) की संख्या बढ़ाई गई है। जनवरी 2024 से अब तक 100 से अधिक एफओबी बनाए जा चुके हैं और वर्ष 2025 में 85 एफओबी बनाने का लक्ष्य है। इससे सुरक्षा बलों की पहुंच और ताकत बढ़ी है और नक्सलियों का वर्चस्व तेजी से खत्म हो रहा है।
साल 2024 में अब तक 750 से अधिक नक्सली आत्मसमर्पण कर चुके हैं, जबकि पिछले साल यह संख्या 900 थी। इसी वर्ष 174 हार्डकोर नक्सलियों के शव बरामद किए गए हैं। केंद्रीय गृह मंत्रालय ने साफ किया है कि शांति वार्ता बिना शर्त ही होगी, और संघर्ष विराम किसी भी कीमत पर नहीं किया जाएगा। नक्सलियों को पहले हथियार छोड़ने होंगे, तभी बातचीत संभव होगी। केजीएच हिल्स में माओवादी संगठनों जैसे पीएलजीए बटालियन, सीआरसी कंपनी और तेलंगाना स्टेट कमेटी के ठिकानों को नष्ट किया गया। यह माओवादियों की अब तक की सबसे बड़ी हार मानी जा रही है। केंद्र और राज्य सरकार का लक्ष्य स्पष्ट है—जहां भी भाजपा की सरकार है, वहां से 2026 से पहले नक्सलियों का पूरी तरह सफाया किया जाना है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृहमंत्री अमित शाह की जोड़ी इसे संभव बनाने की दिशा में तेज़ी से आगे बढ़ रही है। यह केवल एक सैन्य सफलता नहीं, बल्कि आतंरिक सुरक्षा नीति की अभूतपूर्व जीत है। साथ ही, यह उन तत्वों के लिए भी संदेश है जो नक्सलियों और आतंकियों के प्रति नरम रवैया रखते हैं—कि अब राष्ट्रविरोधी ताकतों के लिए भारत में कोई जगह नहीं है।
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