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छत्तीसगढ़

17,500 रु के दर पर आबंटित भूमि का वास्तविक मूल्य 73,500 रु!

Admin2
2 March 2021 5:51 AM GMT
17,500 रु के दर पर आबंटित भूमि का वास्तविक मूल्य 73,500 रु!
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सिंचाई कॉलोनी रिडेव्हपमेंट: 1.388 सरकारी भूमि का बंदरबांट

जसेरि रिपोर्टर

रायपुर। न्यू शांति नगर में सिंचाई कालोनी के रिडेव्हलपमेंट योजना के लिए छग हाउसिंग बोर्ड ने जिस 1.388 हेक्टेयर सरकारी भूमि को आबंटित करने संयुक्त कलेक्टर(भू-आबंटन) से मांग की है और जिसे जिला प्रशासन ने सिर्फ 17,500/- रुपए बाजार मूल्य के आधार पर आबंटित करते हुए एकमुश्त राशि जमा करने मांग पत्र जारी किया था उस भूमि का 2019-20 अचल संपत्ति बाजार मूल्य मार्गदर्शक सिद्धांत के अनुसार बाजार मूल्य मुख्य रोड से 20 मीटर तक 73,500 और 20 मीटर के उपरांत 36,400/- रुपए है। यह भूमि गौरव पथ(जीई रोड) पर स्थित है जिसे शंकरनगर वार्ड का बताकर दर निर्धारित किया गया है। इस तरह इस बेशकीमती भूमि को कौड़ी के दाम हाउसिंग बोर्ड को आबंटित कर दी गई है। योजना में सरकारी भूमि का किस तरह बंदरबांट किया जा रहा है इससे पता चलता है। हाउसिंग बोर्ड के अधिकारियों को इस योजना के माध्यम से कमाई का नया रास्ता मिल गया है। योजना से जहां बोर्ड के भ्रष्ट अधिकारी चांदी काटेंगे वहीं सरकार को लाभ के नाम पर 135 करोड़ का झुनझना दिखाया जा रहा है। कालोनी की बेशकीमती जमीन के साथ 1.388 हेक्टेयर सरकारी जमीन को हाउसिंग बोर्ड को रियायतों के साथ मामूली दर पर हस्तांतरित कर हाउसिंग बोर्ड के अधिकारियों को कमाई करने का सुनहरा अवसर गिफ्ट में दे दिया गया है। इस पूरी योजना में हाउसिंग बोर्ड ने 605 करोड़ खर्च कर सिर्फ 135 करोड़ बचाने का प्लान तैयार किया है। इस योजना में जीई रोड गौरव पथ से लगी 1.388 हेक्टेयर भूमि(13880 वर्गमीटर अथवा 149349,8 वर्ग फीट)को भी शामिल किया गया है जिसका व्यवसायिक इस्तेमाल किया जाएगा।

सरकार को गफलत में रख रहे हाउसिंग बोर्ड के अधिकारी

सिंचाई कालोनी के रिडेव्हलपमेंट के नाम पर छत्तीसगढ़ हाउसिंग बोर्ड ने घपला करने के लिए एक नया प्लान तैयार कर लिया है। अपने तमाम बड़े प्रोजेक्ट्स में अनियमितता करने वाले अधिकारियों को मनमानी और सरकारी धन का बंदरबाट करने की छुट देने वाली एंजसी को ही इस योजना की सारी जिम्मेदारी सौंप दी गई है। नतीजा यह कि अब तक जिस तरह से बोर्ड के अधिकारी दूसरे प्रोजेक्टस से मोटी कमाई करते रहे हैं, सिंचाई कालोनी रिडेव्हलपमेंट योजना से भी कमाई का तरीका ईजाद कर रहे हैं। जिस तरह से योजना का खाका तैयार किया गया है और इसे जिस तरह से धरातल पर उतारा जा रहा है उसके संकेत मिलने लगे हैं। योजना के लिए जिस तरह जमीन की कीमत में हाउसिंग बोर्ड को रियायत दी गई है और जिला प्रशासन द्वारा आबंटित भूमि के मूल्य का गलत निर्धारण किया गया है उससे साफ पता चलता है कि इस योजना के जरिए बड़ा खेल खेला जा रहा है और मोटी कमाई के लिए षडयंत्र रची गई है।

भ्रष्टाचार में लिप्त अधिकारियों को ही बड़ी जिम्मेदारी

सिंचाई कालोनी शांतिनगर में बनने वाले रिडेवलपमेंट योजना को भ्रष्ट अधिकारियों ने बड़ी चतुराई से सरकार के सामने प्रोजेक्ट प्रस्तुत किया जिसमें सरकार को 135 करोड़ मुनापे का सब्ज बाग दिखाया गया। जबकि इसकी वास्तविकता कुछ और है। यदि सरकार शांति नगर की जमीन को सिर्फ अपने राजस्व अलमे के माध्यम से बेचती तो वर्तमान बाजार बाभ दो हजार रुपए के ऊपर है, यदि दो हजार रुपए की दर से भी जमीन बेचती तो सरकार को शुद्ध 300 करोड़ की आय होती। जबकि सरकार हाउसिंग बोर्ड के 605 करोड़ के प्रोजेक्ट को बनवाकर मात्र 135 करोड़ कमाने जा रही है। जबकि यह 300 करोड़ के ऊपर होता जो अब हाउसिंग बोर्ड के भ्रष्ट अधिकारी अपने शातिर दिमाग से कमाने वाले है। जिसमें मटेरियल से लेकर जमीन के बंटरबाट करने में मोलभाव कर के साथ कमर्शियल काम्प्लेक्स की सारी फ्रंट की दुकानें अपने परिवार वालों को सौंप कर सात पीढ़ी तक मालामाल बने रहने का रास्ता निकाल लिया है। क्योंकि जो कमर्शियल काम्प्लेक्स बनेगा उसकी भी बोली लगेेगी और हाउसिंग बोर्ड के भ्रष्ठ अधिकारी हर बार की तरह फ्रंट को मंत्री कोटा में रिजर्व कर उसकी बोली नहीं लगवाएंगे और बाद में अपने बीबी -बच्चों साली-साले के नाम से खरीदी करावा कर मालामाल हो जाएंगे।

हाउसिंग बोर्ड को 30 प्रतिशत रियायत पर भूमि का आबंटन

रिडेव्हलपमेंट योजना के तहत शांति नगर रायपुर में जल संसाधन विभाग की 19.76 एकड़ भूमि में से 16.00 एकड़ पर जिसका कलेक्टर गाईड लाईन वर्ष 2019-20 के अनुसार मुख्य सड़क से 20 मीटर तक दर 40,000/- वर्ग मीटर एवं 20 मीटर के बाद 26,000/- वर्ग मीटर पर राज्य शासन के निर्णय अनुरूप 30 प्रतिशत कम करते हुए और भू राजस्व पुस्तक परिपत्र के अनुसार छत्तीसगढ़ गृह निर्माण मंडल को भूमि का 60 प्रतिशत मूल्य देय का प्रावधान के आधार पर गणना करने पर कुल मूल्य 77.42 करोड़ निर्धारित किया गया है। अब सवाल यह उठता है कि भूमि के मूल्य में हाउसिंग बोर्ड को 30 फीसदी की रियायत किस लिए दी जा रही है। यह योजना न ही गरीबों के लिए है और न ही लोगों को रियायती दर पर मकान उपलब्ध कराने के किसी स्कीम का हिस्सा है। यह पूरी तरह सरकारी कर्मियों को उपलब्ध कराए जाने वाले सरकारी क्वार्टर और व्यावसायिक उद्देश्य से बनाई गई योजना है ऐसे में हाउसिंग बोर्ड को उक्त रियायत देना तर्कसंगत नहीं है, वहीं जल संसाधन विभाग के जमीन को ही आवास एवं पर्यावरण विभाग को सौंपना भी कई संदेह पैदा करता है। भूमि का मालिकाना हक जल संसाधन विभाग के पास रखते हुए सिर्फ निर्माण और कंसल्टेंसी एंजेसी नियुक्त कर जीर्ण-शीर्ण मकानों का रिडेव्हलपमेंट किया जा सकता है।

अब प्लान में बदलाव की है चर्चा

जनता से रिश्ता में लगातार इस मामले प्रकाशित हो रही खबरों के बाद अब इस योजना में कुछ बदलाव होने के संकेत मिल रहे हैं। हाउसिंग बोर्ड के एक अधिकारी के अनुसार रिडेव्हलपमेंट की योजन में अब कुछ तब्दीली की जा रही है। इस योजना की मंजूरी के लिए बनाई गई तीन मंत्रियों की समिति ने इस पर संज्ञान लिया है। चर्चा है कि अब इस प्रोजेक्ट के लिए आनलाइन ओपन टेंडर के आधार पर निर्माण एजेंसी और कंसल्टेंसी नियुक्त किए जाएंगे। टेंडर के माध्यम से अलग-अलग कार्यों के लिए बीडिंग की जाएगी।

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