छत्तीसगढ़
अजमेर शरीफ में 814वां उर्स मुबारक, मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने पेश की चादर
Shantanu Roy
27 Dec 2025 7:21 PM IST

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छग
Raipur/Ajmer. रायपुर/अजमेर। अजमेर शरीफ दरगाह में हज़रत ख्वाजा मोइनुद्दीन हसन चिश्ती (रह.) का 814वां उर्स मुबारक पूरे अकीदत, श्रद्धा और सूफियाना माहौल के साथ मनाया जा रहा है। उर्स के मौके पर दरगाह परिसर और आसपास के इलाकों में सूफी कलाम, कव्वालियों और इबादत की गूंज सुनाई दे रही है। देश-विदेश से हजारों जायरीन रोजाना अजमेर शरीफ पहुंचकर ख्वाजा गरीब नवाज़ की बारगाह में मखमली चादर और फूल पेश कर अमन, चैन और खुशहाली की दुआ मांग रहे हैं। इसी क्रम में छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की ओर से अजमेर शरीफ दरगाह में विशेष चादर पेश की। मुख्यमंत्री श्री साय ने यह चादर मुख्यमंत्री निवास में सौंपी थी, जिसे उन्होंने बतौर मुख्यमंत्री प्रतिनिधि दरगाह में अकीदत के साथ चढ़ाया। चादरपोशी के दौरान डॉ. राज ने छत्तीसगढ़ प्रदेश सहित पूरे देश में सुख-समृद्धि, अमन-चैन और आपसी भाईचारे की दुआ मांगी। इस अवसर पर अजमेर शरीफ दरगाह पर चादर पेश करना केवल एक धार्मिक रस्म नहीं, बल्कि श्रद्धा, सम्मान और सूफी परंपरा का प्रतीक है।
यह परंपरा हज़रत ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती (रह.) की शिक्षाओं और संदेशों से जुड़ी हुई है, जो प्रेम, करुणा, सेवा और इंसानियत का मार्ग दिखाती है। उर्स के दौरान चादरपोशी इस आयोजन का प्रमुख और विशेष हिस्सा होती है, जिसमें हर वर्ग और हर धर्म के लोग बढ़-चढ़कर भाग लेते हैं। उन्होंने कहा कि ख्वाजा गरीब नवाज़ की दरगाह सदियों से सामाजिक एकता और भाईचारे का केंद्र रही है। यहां आने वाला हर जायरीन जाति, धर्म और भाषा के भेद से ऊपर उठकर इंसानियत के संदेश से जुड़ता है। अजमेर शरीफ का उर्स इस बात का जीवंत उदाहरण है कि भारत की सूफी परंपरा ने हमेशा प्रेम और सौहार्द को मजबूत किया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के “सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास” के मंत्र का उल्लेख करते हुए कहा कि अजमेर शरीफ का उर्स इसी भावना को साकार करता है। छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री की ओर से पेश की गई चादर यह संदेश देती है कि प्रदेश की जनता भी सूफी संतों की शिक्षाओं, सामाजिक सद्भाव और भाईचारे की परंपरा से गहराई से जुड़ी हुई है। 814वें उर्स मुबारक के अवसर पर अजमेर शरीफ श्रद्धा, प्रेम और सौहार्द का संगम बना हुआ है। ख्वाजा गरीब नवाज़ की दरगाह पर पेश की गई यह चादर न केवल आस्था का प्रतीक है, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए भी इंसानियत, शांति और भाईचारे का संदेश देती रहेगी।
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