छत्तीसगढ़
फर्जी GST फर्मों के जरिए 9 करोड़ की टैक्स चोरी का पर्दाफाश, दो आरोपी गिरफ्तार
Shantanu Roy
22 Dec 2025 7:50 PM IST

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जनता से रिश्ता की खबर का असर, हमारी खबर की पुष्टि हुई
अमन कुमार अग्रवाल और विक्रम मंधानी GST चोरी करने वाले सबसे बड़े खिलाड़ी
जनता से रिश्ता ने लगातार GST चोरी के मामलों का किया है उजागर
जनता से रिश्ता में प्रकाशित खबरों के चलते ही GST विभाग कर रहा बड़ी कार्रवाई
6 महीने पहले ही अमन अग्रवाल 26 करोड़ के GST चोरी मामलें में 90 दिन जेल में रहकर जमानत पर बाहर आया था।
आदतन GST चोर अपराधी है ये अमन अग्रवाल, जिसने जमानत पर बाहर आने के बाद भी की करोड़ों की GST चोरी
Raipur. रायपुर। जनता से रिश्ता की लगातार GST चोरी और फर्जी फर्मों के मामलों की रिपोर्टिंग का असर देखने को मिला है। ना माल आया ना माल बिका बोगस बिलिंग पर करोड़ों का GST घोटाला इसी तरीक़े का घोटाला मेडिकल होलसेल मार्केट में भी लगातार बैंक की लोन लेने हेतु फर्जी तरीके से धूमधाम से चालू है व्यापारी अपने व्यापार को बढ़ा चढ़ाकर बताने के लिए बिना माल के GST वाला बिल ख़रीदी बिक्री करता है और अपनी रोलिंग ज़्यादा बताकर बैंकों से टर्नओवर ज़्यादा बताकर GST लोन लेने में क़ामयाब हो जाते हैं। इसी फ़र्ज़ीवाड़े के चलते कई तरह तरह की GST चोरी की नए-नए तरीक़े का ख़ुलासा होता है कि GST बिल फ़र्ज़ी तरीक़े से देने से GST की उगाही की गई रक़म सीधा व्यापारी की जेब में जाती है। जिसको वह GST विभाग में पटाता नहीं है। इसी तरीक़े का मामला अब ख़ुलासा हुआ है ये एक पूरी टीम का सरगना है। जो छत्तीसगढ़, झारखंड, ओडिशा, बिहार, अहमदाबाद, सूरत, पटना और मुम्बई तक फैली है। ये दोनों आरोपी ने इस गैंग के एक छोटे से सदस्य इनके आकाओं तक पहुँचने के लिए GST टीम को बड़े पैमाने में कार्रवाई करने की आवश्यकता पड़ेगी और किसी भी राजनीतिक दबाव के नहीं आने पर ही पूरे मामले का ख़ुलासा होगा पूरा मामला 40, हज़ार करोड़ के उस पार का है। जिसमें लोहा और सीमेंट के व्यापारी भी शामिल है। कुछ मेडिकल माफ़िया व्यापारी दिन रात फ़र्ज़ी बिल बनाने का और फ़र्ज़ी बिल ख़रीदी का काम करते हैं। अगर गंभीरता से GST विभाग इस जांच को आगे बढ़ाएगा तो बड़े से बड़ा ख़ुलासा होने की संभावना है। इसी के परिणामस्वरूप डीजीजीआई रायपुर ने फर्जी जीएसटी फर्मों के माध्यम से करोड़ों रुपये की इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) हेराफेरी का बड़ा खुलासा करते हुए अमन कुमार अग्रवाल और विक्रम मंधानी को गिरफ्तार किया है। गौतलब है कि अमन कुमार अग्रवाल आज से 6 महीने पहले ही 90 दिन के लिए 26 करोड़ की टैक्स चोरी मामलें में किया गया था। जमानत मिलने के बाद इसने फिर GST की चोरी करता रहा। अधिकारियों के अनुसार, यह मामले अब तक के सबसे बड़े जीएसटी फ्रॉड में से एक माने जा रहे हैं। डीजीजीआई के सूत्रों के अनुसार, यह कार्रवाई 19 दिसंबर 2025 को रायपुर के प्रमुख व्यावसायिक केंद्र मैग्नेटो मॉल स्थित मेसर्स प्रेम एंटरप्राइजेज में तलाशी के दौरान की गई। तलाशी के दौरान अधिकारियों को बड़ी संख्या में फर्जी कंपनियों और कागजी लेन-देन से जुड़े दस्तावेज मिले, जिनसे पूरे फर्जीवाड़े की परतें खुलकर सामने आईं।
जांच में यह पता चला कि दोनों आरोपियों ने संगठित रूप से फर्जी फर्मों का नेटवर्क तैयार किया था। इन फर्मों के नाम पर केवल कागजी इनवॉइस जारी किए जा रहे थे, जबकि वास्तव में कोई वस्तु या सेवा का लेन-देन नहीं किया जा रहा था। इन इनवॉइस के माध्यम से सरकारी राजस्व में भारी नुकसान किया गया और ITC पास कर सरकार की अरबों रुपये की राशि का दुरुपयोग किया गया। तलाशी के दौरान आरोपी के परिसर से कई सिम कार्ड और डिजिटल डिवाइस भी बरामद किए गए, जिनका उपयोग फर्जी जीएसटी पंजीकरण कराने और फर्मों के संचालन में किया जा रहा था। जांच में यह भी सामने आया कि इन फर्जी फर्मों से जुड़े ईमेल आईडी और लॉगिन क्रेडेंशियल्स विक्रम मंधानी द्वारा संचालित किए जा रहे थे।
जनता से रिश्ता में इस फ्रॉड के कई मामलों की लगातार रिपोर्टिंग ने इस कार्रवाई में अहम भूमिका निभाई। मीडिया रिपोर्टिंग के माध्यम से अधिकारियों को संदिग्ध नेटवर्क और फर्मों के बारे में महत्वपूर्ण सुराग मिले, जिससे डीजीजीआई को फर्जी फर्मों और उनके संचालकों तक पहुंचने में मदद मिली। डीजीजीआई के अधिकारियों का कहना है कि यह कार्रवाई एक संगठित और सुनियोजित जीएसटी फ्रॉड नेटवर्क के खिलाफ कड़ा संदेश है। यह नेटवर्क न केवल छत्तीसगढ़, बल्कि अन्य राज्यों तक भी फैला हो सकता है। मामले की जांच में डिजिटल साक्ष्य, बैंक खातों और अन्य संलिप्त व्यक्तियों की भूमिका की गहन पड़ताल की जा रही है।
जनता से रिश्ता के पत्रकारों की सतत और सटीक रिपोर्टिंग ने न केवल इस मामले को उजागर किया, बल्कि सरकारी कार्रवाई को तेज करने में भी मदद की। अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि जीएसटी प्रणाली का दुरुपयोग करने वाले किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा और सरकारी राजस्व को नुकसान पहुंचाने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई जारी रहेगी। इस कार्रवाई के बाद अमन कुमार अग्रवाल और विक्रम मंधानी को गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया गया, जहां उन्हें न्यायिक हिरासत में भेजा गया है। यह घटना यह साबित करती है कि सतत मीडिया रिपोर्टिंग और नागरिक जागरूकता से बड़े आर्थिक अपराधों का पर्दाफाश किया जा सकता है।
फर्जी फर्मों का संगठित रैकेट
जांच में सामने आया है कि आरोपियों ने दर्जनों फर्जी जीएसटी पंजीकृत फर्मों का निर्माण कर एक संगठित नेटवर्क तैयार किया था। इन फर्मों के नाम पर केवल कागजी इनवॉइस जारी किए जा रहे थे, जबकि वास्तव में किसी भी प्रकार का व्यापार या वस्तुओं की आपूर्ति नहीं की जा रही थी। इन फर्जी इनवॉइस के माध्यम से आईटीसी पास कर सरकारी राजस्व को भारी नुकसान पहुंचाया गया। तलाशी के दौरान आरोपियों के परिसर से करीब 20 सिम कार्ड बरामद किए गए, जिनका इस्तेमाल फर्जी जीएसटी पंजीकरण कराने और विभिन्न फर्मों के नाम से संपर्क विवरण दर्ज करने में किया गया था। जांच में यह भी स्पष्ट हुआ कि इन फर्जी फर्मों से जुड़े अधिकांश ई-मेल आईडी विक्रम मंधानी द्वारा स्वयं संचालित किए जा रहे थे, जिससे पूरे नेटवर्क के संचालन में उसकी केंद्रीय भूमिका सामने आई है।
50 से अधिक फर्जी फर्मों के लॉगिन-आईडी बरामद
डीजीजीआई अधिकारियों को विक्रम मंधानी के कब्जे से 50 से अधिक फर्जी फर्मों के जीएसटी लॉगिन-आईडी और पासवर्ड भी मिले हैं। इन फर्मों के जरिए बड़े पैमाने पर फर्जी इनवॉइस जारी किए गए और आईटीसी का दुरुपयोग किया गया। अधिकारियों का कहना है कि यह केवल शुरुआती आंकड़े हैं और जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ेगी, नेटवर्क से जुड़ी और भी फर्मों के सामने आने की संभावना है।
48 करोड़ के फर्जी इनवॉइस, 9 करोड़ की जीएसटी चोरी
प्रारंभिक डेटा विश्लेषण में यह चौंकाने वाला तथ्य सामने आया है कि इन फर्जी फर्मों के माध्यम से लगभग 48 करोड़ रुपये मूल्य के इनवॉइस जारी किए गए, जिनमें करीब 9 करोड़ रुपये का जीएसटी शामिल है। डीजीजीआई अधिकारियों के अनुसार, यह राशि शुरुआती आकलन पर आधारित है और विस्तृत जांच के बाद टैक्स चोरी की कुल रकम इससे कहीं अधिक हो सकती है।
गिरफ्तारी और न्यायिक हिरासत
डीजीजीआई रायपुर ने दोनों आरोपियों को 20 दिसंबर 2025 को गिरफ्तार किया। इसके बाद 21 दिसंबर 2025 को उन्हें न्यायालय में पेश किया गया, जहां से कोर्ट ने अमन कुमार अग्रवाल और विक्रम मंधानी को 2 जनवरी 2026 तक न्यायिक हिरासत में भेज दिया है। जांच एजेंसी ने कोर्ट को बताया कि मामले में डिजिटल साक्ष्य, बैंक खातों और अन्य संदिग्ध लेन-देन की गहन जांच की जानी बाकी है।
आदतन अपराधी निकला अमन कुमार अग्रवाल
जांच के दौरान यह भी सामने आया है कि अमन कुमार अग्रवाल आदतन अपराधी है। इससे पहले उसे छत्तीसगढ़ राज्य जीएसटी विभाग द्वारा 10 जून 2025 को भी इसी तरह के जीएसटी फर्जीवाड़े के मामले में गिरफ्तार किया जा चुका है। इसके बावजूद उसने दोबारा फर्जी फर्मों का नेटवर्क खड़ा कर सरकारी राजस्व को नुकसान पहुंचाया।
अन्य राज्यों तक फैल सकता है नेटवर्क
डीजीजीआई अधिकारियों का कहना है कि यह एक सुनियोजित और संगठित जीएसटी फ्रॉड नेटवर्क है, जिसकी कड़ियां छत्तीसगढ़ के बाहर अन्य राज्यों तक भी फैली हो सकती हैं। मामले में बैंक खातों की ट्रांजैक्शन हिस्ट्री, डिजिटल डिवाइस, कॉल डिटेल रिकॉर्ड और अन्य संलिप्त व्यक्तियों की भूमिका की जांच की जा रही है। अधिकारियों ने साफ शब्दों में कहा है कि जीएसटी प्रणाली के दुरुपयोग पर सख्त कार्रवाई आगे भी जारी रहेगी। सरकारी राजस्व को नुकसान पहुंचाने वाले ऐसे तत्वों को किसी भी हाल में बख्शा नहीं जाएगा और कानून के तहत कठोर दंड दिलाने के लिए सभी आवश्यक कदम उठाए जाएंगे।
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