
आउटर में लक्जरी और महंगे प्रोजेक्ट लाकर करोड़ों कमाने वालों ने सरकार को भी बड़ा चूना लगाया
अलग-अलग फर्मो के नाम से प्रोजेक्ट पास लेकिन स्वर्णभूमि के नाम से कोई प्रोजेक्ट नहीं, फिर भी बिके प्लाट
2017-18 में कांग्रेस सरकार के दबाव में अधिकारियों ने जांच रोकी
नहर रास्ता आबादी और आदिवासी की भूमि पर निर्मित है आवासीय प्रोजेक्ट
सरकार की करोड़ों की भूमि चोरी हो गई लेकिन सरकार की आंख खुली नहीं
सभी बड़े अधिकारियों ने जमकर किया बंदरबांट और करोड़ों का बंगला अपने नाम करवाया
जो भी जांच अधिकारी नियुक्त हुआ एक प्लाट प्रोजेक्ट के मालिकों ने अलग से उसके नाम किया, जांच इसलिए अटकी और भटकी
रायपुर (जसेरि)। राजधानी में भू माफिया का वर्चस्व जग जाहिर है। आउटर में लक्जरी और महंगे प्रोजेक्ट लाकर करोड़ों कमाने वालों ने सरकार को भी बड़ा चूना लगाया है। बावजूद सरकार ने इन पर कोई एक्शन नहीं लिया है। राजनेताओं, मंत्रियों और बड़े अधिकारियों के संरक्षण और सांठगांठ से रियल स्टेट के कारोबारियों का धंधा लगातार बढ़ता जा रहा है। चूंकि रियल स्टेट के धंधे में अधिकारियों, नेताओं और कारोबारियों का पैसा लगा होता है इसलिए इनके अवैध गतिविधियों को भी संरक्षण मिलते रहता है। राजधानी के आमासिवनी इलाके में स्वर्णभूमि के नाम से एक बड़ा प्रोजेक्ट लाया गया जिसमें बड़े पैमाने पर प्लाट्स और लक्जरी फ्लैट व मकान बेचे गए हैं। इस प्रोजेक्ट में बड़े पैमाने पर सरकारी, नहर व आदिवासियों के जमीनों को दबाने की शिकायतें सामने आई। यह भी पता चला है कि इस नाम से कोई प्रोजेक्ट नगर निवेश विभाग से स्वीकृत ही नहीं हुए। अलग-अलग नामों से लेआउट पास कराए गए हैं। सरकारी जमीन के बड़े बंदरबाट की आज तक जांच नहीं हुई है।
स्वर्ण भूमि ने किया जमीन पर कब्जा नाले पर बना दिया हाउसिंग प्रोजेक्ट : विधानसभा से सटे ग्राम आमासिवनी में बन रहे हाउसिंग प्रोजेक्ट स्वर्णभूमि पर लगातार सरकारी जमीन और नाले की जमीन पर अतिक्रमण का आरोप लग रहा है। आरोप यह है कि रामा रियल इस्टेट द्वारा बनाए जा रहे स्वर्णभूमि हाउसिंग प्रोजेक्ट की आड़ में आमासिवनी से गुजरने वाले नाले और उसके आसपास की जमीन पर अवैध रूप से कब्जा किया गया। कब्जे की शिकायत करीब डेढ़ साल पहले जिला प्रशासन एवं भू-राजस्व मंडल को की गई थी। शिकायत के आधार पर भूराजस्व मंडल ने जिला प्रशासन को जांच के आदेश दिए थे। जिला प्रशासन ने तहसीलदार रायपुर को जांच के लिए अधिकृत किया था, किंतु आज तक तहसीलदार की ओर से इस हाउसिंग प्रोजेक्ट की जांच नहीं की गई है। यह रवैया स्पष्ट रूप से बड़े भ्रष्टाचार की ओर इशारा कर रहा है।
राजस्व मंडल ने दिया यह आदेश : राजस्व मंडल की ओर से विगत 29 जून 2015 को स्वर्णभूमि आमासिवनी की जांच करने का आदेश जिला प्रशासन को दिया गया था। आदेश तीन बिंदुओं पर था। आदेश में कहा गया है कि मंडल को शिकायत मिली है कि स्वर्णभूमि (आमासिवनी)रामा रियल इस्टेट विधानसभा रोड़ द्वारा निर्मित हाउसिंग प्रोजेक्ट में शासकीय जमीन और नाले पर अवैध कब्जा किया गया है। शिकायत की विषय वस्तु संहिता की धारा 248 से संबंधित है। छत्तीसगढ़ भू-राजस्व संहिता की धारा आठ में मंडल की अधीक्षण संबंधी शक्तियों के बारे में निम्नानुसार प्रावधान हैं कि मंडल ऐसे समस्त मामलों के संबंध में जो उसकी अपीलीय या पुनरीक्षण संबंधी अधिकारिता के अद्यधीन है। समस्त प्राधिकारियों पर इस सीमा तक अधीक्षण की शक्ति जहां तक प्राधिकारी ऐसे मामलों के संबंध में कार्रवाई करते हैं और वह उनसे विवरणीय मांग सकेगा। अत: उपर्युक्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए कलेक्टर रायपुर को आदेशित किया जाता है कि शिकायत में वर्णित तत्यों की जांच में जाकर, वर्णित तथ्य सही पाए जाने पर भू-राजस्व संहिता की संबंधित धाराओं के अंतर्गत कार्रवाई की जाए और प्रकरण में की गई कार्रवाई 21 जुलाई 2015 तक न्यायालय में प्रस्तुत किया जाए।
तहसीलदार ने अटकाई जांच :
कलेक्टर रायपुर की ओर से भू-राजस्व मंडल के आदेश का पालन करने एवं जांच करने के निर्देश तहसीलदार को दिया गया था। पांच बार कलेक्टर की ओर से तहसीलदार को रिमाइंडर भेजा गया है। इसमें पहला निर्देश विगत 01 जून 2015 , दूसरा निर्देश 16 जुलाई 2015,तीसरा निर्देश 03 अगस्त 2015 और चौथा निर्देश 08 अगस्त 2015 को जारी किया गया था। इसके बाद अंत में 19 नवंबर 2015 में सूचना पत्र जारी कर कहा गया है कि छग राजस्व मंडल बिलासपुर के आदेश के अनुसार प्रकरण की जांच करने कहा गया है किंतु दर्शाए गए बिंदुओं के संबंध में जांच प्रतिवेदन उपलब्ध नहीं कराया गया है। जिसके कारण छग राजस्व मंडल से स्मरण पत्र प्राप्त हो रहे हैं। अतएवं सर्वोच्च प्राथमिकता के आधार पर प्रतिवेदन पांच दिनों के भीतर उपलब्ध कराए जाए। किंतु जानकारी के मुताबिक अब तक इस मामले में किसी तरह की जांच नहीं की गई है।





