छत्तीसगढ़
अमेज़न पे के माध्यम से क्रेडिट कार्ड से लाखों की संदिग्ध ट्रांजैक्शन, नौ महीने बाद भी कार्रवाई नहीं
Shantanu Roy
19 Jun 2026 6:30 PM IST

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छग
Raipur. रायपुर। रायपुर के भाठागांव निवासी विकास सोनी के आरबीएल (रत्नाकर बैंक लिमिटेड) क्रेडिट कार्ड से 1 अक्टूबर 2025 को अमेज़न पे के माध्यम से दो संदिग्ध ट्रांजैक्शन किए गए। इनमें पहली ट्रांजैक्शन लगभग 46,995 रुपये और दूसरी लगभग 22,315 लाख रुपये की बताई जा रही है। पीड़ित का आरोप है कि इन लेन-देन के दौरान उनके मोबाइल पर किसी प्रकार का OTP प्राप्त नहीं हुआ। उन्हें केवल बैंक की ओर से ई-मेल और स्टेटमेंट के माध्यम से भुगतान की जानकारी मिली। उस समय विकास सोनी की तबीयत अत्यंत खराब थी, जिसके कारण वे समय पर ई-मेल और बैंक संदेशों पर ध्यान नहीं दे सके।
बैंक से शिकायत के बावजूद नहीं मिला समाधान
जब ट्रांजैक्शन की जानकारी सामने आई तो विकास सोनी ने आरबीएल बैंक से संपर्क कर मामले की शिकायत दर्ज कराई। उनका कहना है कि उन्होंने बैंक को स्पष्ट रूप से बताया कि यह भुगतान उनकी जानकारी और अनुमति के बिना हुआ है। इसके बावजूद बैंक की ओर से उन्हें कोई ठोस राहत नहीं मिली। वहीं दूसरी ओर बैंक लगातार बकाया राशि जमा करने के लिए नोटिस, कॉल और मैसेज भेज रहा है। भुगतान नहीं होने के कारण ब्याज और अन्य शुल्क लगातार बढ़ते जा रहे हैं, जिससे पीड़ित की आर्थिक परेशानी और बढ़ गई है।
पुरानी बस्ती थाने में शिकायत, फिर भी जांच में सुस्ती
विकास सोनी ने 8 नवंबर 2025 को रायपुर के पुरानी बस्ती थाने में शिकायत दर्ज कराई। उनका आरोप है कि शिकायत दर्ज कराने के लिए उन्हें कई बार थाने के चक्कर लगाने पड़े। पुलिस द्वारा केवल एक निर्धारित प्रारूप में आवेदन भरवाया गया, लेकिन शिकायत की कोई रसीद या लिखित प्राप्ति उन्हें नहीं दी गई। पीड़ित का कहना है कि नौ महीने बीत जाने के बाद भी जांच में कोई उल्लेखनीय प्रगति नहीं हुई है और उन्हें मामले की स्थिति के संबंध में संतोषजनक जानकारी भी नहीं दी जा रही है।
साइबर सेल की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल
मामले में साइबर सेल से भी संपर्क किया गया, लेकिन पीड़ित के अनुसार वहां से भी कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। उनका कहना है कि अधिकारियों ने उन्हें यह कहकर निराश किया कि बैंक अपना पैसा आसानी से नहीं छोड़ेगा। पीड़ित का आरोप है कि साइबर अपराध से जुड़े इतने गंभीर मामले में भी जांच एजेंसियों की ओर से अपेक्षित सक्रियता नहीं दिखाई गई। इससे न केवल पीड़ित का भरोसा कमजोर हुआ है बल्कि ऐसे मामलों में आम लोगों की सुरक्षा व्यवस्था पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।
बढ़ते ब्याज और कार्रवाई की मांग
विकास सोनी का कहना है कि यदि समय रहते जांच कर दोषियों तक पहुंचा जाता तो उन्हें बढ़ते ब्याज और वित्तीय दबाव का सामना नहीं करना पड़ता। वर्तमान में बैंक की ओर से लगातार भुगतान का दबाव बनाया जा रहा है, जबकि मामले की जांच अब भी अधूरी है। पीड़ित ने प्रशासन, साइबर पुलिस और बैंक प्रबंधन से निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई तथा विवादित राशि पर राहत देने की मांग की है। उनका कहना है कि नौ महीने बाद भी समाधान नहीं मिलना जांच व्यवस्था और उपभोक्ता सुरक्षा तंत्र की कार्यप्रणाली पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़ा करता है।
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