
ज़ाकिर घुरसेना/कैलाश यादव
असली किसानों को समाधान चाहिए : पिछले सप्ताह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मप्र के किसानों से बात की। भोपाल के पास रायसेन में किसान महासम्मलेन आयोजित था, जिसमें मोदी जी ने किसानों से संवाद किया। जनता में खुसुर-फुसुर है कि साहब दिल्ली बार्डर में ठंड में अकड़ते असली किसानों से बात कीजिये, उनकी सुनिए, उनकी समस्या का समाधान कीजिये, न कि किराये पर लाये गए नकली किसानों की। इनसे बात करने से कोई हल नहीं निकलने वाला। असली समस्या तो उन किसानों की है जो बार्डर में बैठे हैं,समाधान उन्हें भी चाहिए। आग दिल्ली में लगी है और पानी भोपाल में डालने से क्या होगा। भारतीय कृषि में सुधार जरूर कीजिये साहब लेकिन छोटे किसानों की रोजी के कीमत पर नहीं।
किसानों के हौसले पस्त करने की रणनीति तो नहीं : किसान आंदोलन को लेकर सरकार पस्त नजर आ रही है, इसे छुपाने के लिए केंद्र सरकार व्दारा आंदोलन को लंबा खींचकर किसानों की हौसला पस्त करने की रणनीति तो नहीं है। जैसे शाहीनबाग मामले में किया गया था। जनता में खुसुर-फुसुर है कि अन्नदाता भला कहां मानने वाले आखिर वो बी तो दिनरात सर्दी में ठिठुरते, गर्मी में झुलसते और बरसात में भीगते हुए धरती मां की गोद से फसल उपजाते है, उनको तो इस तरह के झंझावतों से जूझने की आदत है, ऐसे में केंद्र सरकार को ऐसी खुशफहमी नहीं पालनी चाहिए और किसानों की मांगों पर त्वरित फैसला कर आंदोलन समाप्त कराना चाहिए इससे न सिर्फ किसानों की समस्या हल होगी अपितु आंदोलन की वजह से ट्रांसपोर्टरों और आम लोगों की कठिनाइयां भी दूर होगी।
ये कानून रातोरात नहीं आये हैं: मप्र के किसानों को प्रधानमंत्री जी ने सम्बोधित करते हुए कहा कि नया कानून किसानों के हित में है। ये कानून रातोरात नहीं आये हैं, हमारी सरकार किसानों को समर्पित है। जनता में खुसुर-फुसुर है कि कानून बनाते वक्त किसानों को भरोसे में लिया जाना जरुरी था, नौकरशाहों के भरोसे यह कानून लाया गया। ये कौन सा सर्जिकल स्ट्राइक की तरह जरुरी था, कम से कम किसानों से तो पूछ लेते। भई किसान तो इसी देश के अन्नदाता हैं, कोई दुश्मन तो नहीं। जब स्थिति बिगडऩे लगी तब संवाद का क्या काम।
पेट्रोल, डीजल के बाद अब गैस : ऐसा लगता है कि कोरोना से आम जनता ही नहीं सरकार भी परेशान है सरकार इससे बुरी तरह से प्रभावित हुई है, तभी तो सरकारपेट्रोल-डीजल के बाद रसोई गैस के दाम में इजाफा कर घाटे का भरपाई कर रही है। जिंदगी अभी सामान्य हुई नहीं और गैस के मूल्य में इजाफा करके उनकी मुसीबतें बढ़ा दी है। लगता है सरकार के सलाहकारों को देश की जनता की असलियत मालूम नहीं, तभी तो ऐसा हो रहा है। बहरहाल किसान तो परेशान थे, अब आम जनता भी परेशान हो रही है। जनता में खुसुर-फुसुर है कि इस मामले में ज्यादा बोलना मुसीबत को दावत देने जैसा है। किसी शायर ने ठीक ही कहा है कि साफ दामन का दौर कब का खत्म हुआ साहब,अब तो लोग अपने धब्बों पर गुरुर करने लगे हैं।
क्या वाकई दीदी का जहाज डूबने वाला है : जिस तरह से पश्चिम बंगाल में हालात दिख रहा है लगता है ममता दीदी का जहाज पुराना हो गया है, चलने लायक नहीं रहा, डूबने के कगार पर है, तभी तो टीएमसी से लोग भाग रहे हैं। ऐसा कहा जाता है कि जब जहाज डूबने वाला रहता है, तब चूहे सबसे पहले भागते हैं । अब वक्त बताएगा कि ये चूहे हैं या शेर हैं। जनता में खुसुर फुसुर है कि वाकई जहाज डूबने वाला है या भागने वालों के तकदीर बदलने वाली ह,ै उनसे राजयोग दूर हो रहा है या उनके तकदीर में प्रबल राजयोग आ गया है। चुनाव के बाद पता चलेगा।
पुलिस को चौकन्ना रहना पड़ेगा : पांच दिन बाद नववर्ष की धूम होने वाली है, लोग नववर्ष के जश्न में डूबे रहेंगे, इसके लिए होटलों, कैफों में जमकर तैयारी चल रही है। ऐसा लगेगा जैसे कोरोना न तो पहले था न अब है, सब मदमस्त रहेंगे। जनता में खुसुर फुसुर है कि पुलिस को काफी चौकन्ना रहना पड़ेगा क्योंकि पार्टी में गांजा, अफीम, चरस, ड्रग्स और हीरोइन तो रहेगा ही, इसके अलावा मुंबई से कालगर्ल के साथ डांसबालाएं के भी आने की चर्चा है जिससे पार्टी की ओर युवाओं की उत्सुकता साफ झलक रहा है, अब सारा दारोमदार पुलिस के ऊपर है, किस तरह से हेंडल करती है, कहां छूट देती है और कहां दबिश देती है।
प्रियंका गांधी ने भूपेश बघेल की तारीफ कर नंबर बढ़ाया : पिछले दिनों उत्तरप्रदेश के ललितपुर में चारा पानी नहीं मिलने से कई गायों के मरने पर एवं उत्तरप्रदेश में गौवंश की दुर्दशा पर चिंता जताते हुए प्रियंका गांधी ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से कहा कि प्रदेश में खोली गई गौशालाएं भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ गई है, गौमाताओं के शवों को देख कर मन विचलित हो गया। गौमाता को इस दुर्दशा से बचाने छत्तीसगढ़ के भूपेश सरकार द्वारा चलाये जा रहे गोधन न्याय योजना का अनुसरण करना चाहिए उनसे प्रेरणा लेनी चाहिए। साथ ही उन्होंने छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा चलाये जा रहे विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं की जमकर तारीफ की। छत्तीसगढिय़ों का सम्मान तो जरूर बढ़ा।





