छत्तीसगढ़
सुप्रीम कोर्ट ने अमित जोगी की SLP स्वीकार की, हाईकोर्ट के फैसलों पर होगी न्यायिक जांच
Shantanu Roy
6 April 2026 8:18 PM IST

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छग
New Delhi/Raipur. नई दिल्ली/रायपुर। भारत के माननीय Supreme Court of India ने एक महत्वपूर्ण मामले में विशेष अनुमति याचिका (SLP) स्वीकार करते हुए हाई कोर्ट के आदेश के खिलाफ अपील की अनुमति दे दी है। यह मामला केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) को अपील करने की अनुमति देने वाले हाई कोर्ट के फैसले से जुड़ा है, जिसे अब सर्वोच्च न्यायालय में चुनौती दी गई है। सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश दिया है कि संबंधित अपील हाई कोर्ट की वेबसाइट पर फैसला अपलोड होने के कुछ ही घंटों के भीतर दायर की जाए। इसके साथ ही हाई कोर्ट के दोनों फैसले—CBI को अपील की अनुमति देना और अपील स्वीकार करना—अब न्यायिक समीक्षा के दायरे में आ गए हैं।
इस मामले में याचिकाकर्ता ने कहा कि यह कानूनी लड़ाई केवल व्यक्तिगत न्याय तक सीमित नहीं है, बल्कि उन लोगों की आवाज को भी सामने लाने का प्रयास है, जिन्हें न्यायिक प्रक्रिया में पर्याप्त प्रतिनिधित्व नहीं मिल पाता। उन्होंने न्याय व्यवस्था में अपने विश्वास को दोहराते हुए कहा कि उन्हें देश की न्यायिक प्रणाली और अंतिम न्याय में पूर्ण भरोसा है। सुप्रीम कोर्ट में इस मामले की पैरवी देश के वरिष्ठ अधिवक्ताओं ने की, जिनमें Kapil Sibal, Mukul Rohatgi, Vivek Tankha और Siddharth Dave शामिल रहे। सभी अधिवक्ताओं ने याचिकाकर्ता का पक्ष रखते हुए अदालत के समक्ष विस्तृत दलीलें प्रस्तुत कीं।
याचिकाकर्ता ने इन वरिष्ठ वकीलों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि उन्होंने सर्वोच्च न्यायालय में उनका प्रभावी प्रतिनिधित्व किया। साथ ही उन्होंने अपने स्वर्गीय पिता Ajit Jogi के साथ उनके पुराने संबंधों का भी उल्लेख किया। मामले में सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले को महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि इससे हाई कोर्ट के आदेशों की पुनः समीक्षा का रास्ता खुल गया है। न्यायालय अब यह तय करेगा कि CBI को अपील की अनुमति देने का निर्णय विधिसम्मत था या नहीं।
कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार, इस तरह की SLP स्वीकार होने का मतलब है कि सर्वोच्च न्यायालय ने मामले को गंभीरता से लिया है और इसमें कानूनी परीक्षण की आवश्यकता महसूस की है। आने वाले समय में इस मामले की सुनवाई के दौरान कई महत्वपूर्ण पहलुओं पर विचार किया जा सकता है। इस घटनाक्रम के बाद यह मामला अब देश की शीर्ष अदालत में विचाराधीन रहेगा। सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुसार आगे की प्रक्रिया तेज गति से पूरी की जाएगी। इस फैसले ने न्यायिक प्रक्रिया में पारदर्शिता और जवाबदेही के महत्व को एक बार फिर सामने लाया है। याचिकाकर्ता ने कहा कि यह लड़ाई न्याय के लिए है और इसमें उन्हें न्यायपालिका पर पूरा भरोसा है।
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