छत्तीसगढ़

सुपेला पुलिस ने म्यूल अकाउंट से साइबर ठगी का भंडाफोड़ किया, 4 गिरफ्तार

Shantanu Roy
23 Aug 2025 12:34 AM IST
सुपेला पुलिस ने म्यूल अकाउंट से साइबर ठगी का भंडाफोड़ किया, 4 गिरफ्तार
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छग
Durg. दुर्ग। साइबर अपराधों के खिलाफ छत्तीसगढ़ पुलिस की बड़ी कार्रवाई सामने आई है। सुपेला थाना पुलिस ने म्यूल अकाउंट (Mule Account) का इस्तेमाल कर ऑनलाइन ठगी करने वाले गिरोह का पर्दाफाश करते हुए दो आरोपियों और दो नाबालिगों को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार आरोपियों में सचिन यादव (18 वर्ष) निवासी पंचमुखी हनुमान मंदिर कुरूद थाना जामुल जिला दुर्ग और राहुल निषाद (19 वर्ष) निवासी गोपाल नगर कुरूद थाना जामुल जिला दुर्ग शामिल हैं। सभी को न्यायिक रिमांड पर जेल भेजा गया है।
मामला कैसे खुला?
पुलिस को गृह मंत्रालय द्वारा संचालित समन्वय पोर्टल के माध्यम से म्यूल अकाउंट की जानकारी मिली थी। जांच के दौरान पता चला कि दुर्ग के नरेश कुपाल पिता कृष्णा कुपाल निवासी ढांचा भवन, जामुल ने बैंक ऑफ इंडिया शाखा सुपेला में अपना खाता खुलवाया था। उसने खाता खोलने के लिए अपने व्यक्तिगत पहचान दस्तावेज जैसे आधार कार्ड, पैन कार्ड आदि प्रस्तुत किए थे। जांच में यह तथ्य सामने आया कि नरेश कुपाल को पूरी जानकारी थी कि उसके खाते का उपयोग ऑनलाइन ठगी की रकम प्राप्त करने और अवैध वित्तीय लेन-देन के लिए किया जाएगा। इसी खाते में साइबर ठगी से जुड़ी रकम ₹1,19,098 जमा हुई थी। आरोपी ने इस रकम को अपने खाते में डालकर बेईमानी से अवैध धन अर्जित किया।
पुलिस ने की त्वरित कार्रवाई
मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने आरोपी के खिलाफ अपराध क्रमांक 991/25 दर्ज किया। आरोपियों पर धारा 317(2), 318(4) बीएनएस के तहत अपराध पंजीबद्ध किया गया। पुलिस ने घेराबंदी कर दो आरोपियों और दो नाबालिगों को गिरफ्तार किया और फिर न्यायिक रिमांड पर जेल भेज दिया।
पुलिस अधिकारियों का योगदान
इस महत्वपूर्ण कार्यवाही में थाना प्रभारी सुपेला विजय यादव, उप निरीक्षक चितराम ठाकुर, प्रधान आरक्षक सुबोध पाण्डेय, आरक्षक सूर्य प्रताप सिंह, दुर्गेश सिंह राजपूत और मिथलेश साहू की भूमिका सराहनीय रही। टीम ने साइबर अपराधियों को पकड़ने में बेहतरीन तालमेल और सतर्कता का परिचय दिया। पुलिस अधिकारियों ने बताया कि साइबर अपराधी अक्सर म्यूल अकाउंट का इस्तेमाल करते हैं। यह ऐसे बैंक खातों को कहा जाता है, जिन्हें किसी और के नाम पर खोलकर ठगी की रकम ट्रांसफर की जाती है। खाता धारक अपनी जानकारी के साथ खाते को ठगी गिरोह को उपलब्ध कराता है और बदले में कमीशन पाता है। यह प्रक्रिया मनी लॉन्ड्रिंग का हिस्सा होती है, जिसे कानूनन गंभीर अपराध माना गया है।
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