छत्तीसगढ़

छत्तीसगढ़ की लोक नृत्य एवं लोक कला पर आधारित फोटो प्रदर्शनी का सफल समापन

Nil dhankar
5 Jan 2026 6:52 AM IST
छत्तीसगढ़ की लोक नृत्य एवं लोक कला पर आधारित फोटो प्रदर्शनी का सफल समापन
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रायपुर। छायाचित्रों के माध्यम से छत्तीसगढ़ के लोक जीवन, सांस्कृतिक विविधता एवं परंपराओं के संरक्षण का सशक्त संदेश देने वाली लोक नृत्य एवं लोक कला पर आधारित फोटो प्रदर्शनी का सफल समापन हुआ। समापन अवसर पर प्रबल प्रताप सिंह जूदेव, उपाध्यक्ष, भारतीय जनता पार्टी मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। उन्होंने प्रदर्शनी की भूरि-भूरि प्रशंसा करते हुए इसे छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक विरासत को सहेजने का सराहनीय प्रयास बताया तथा इस प्रकार के आयोजनों के लिए क्लाउड के निरंतर प्रयासों की सराहना करते हुए प्रोत्साहित किया।


छत्तीसगढ़ कला, संस्कृति और परंपराओं की समृद्ध भूमि है, जहाँ तीज-त्योहार, लोक-नृत्य और पारंपरिक कलाएँ आज भी उसी उत्साह और गरिमा के साथ संरक्षित हैं। छत्तीसगढ़ की पारंपरिक लोक-कला एक से बढ़कर है। गौरा-गौरी, भोजली, राउत नाचा, सुआ नृत्य, पंथी और करमा नृत्य जैसी लोक-शैली के साथ बांस शिल्प, मृदा शिल्प और टेराकोटा के साथ ही आयरन और मेटल शिल्प से संबंधित फोटो प्रदर्शनी से विस्तृत जानकारी मिल रही है।

छत्तीसगढ़ की समृद्ध लोक-संस्कृति, पारंपरिक नृत्यों एवं विविध लोक कलाओं को जन-जन तक पहुँचाने के उद्देश्य से क्लाउड एवं संस्कृति विभाग, छत्तीसगढ़ के सहयोग से आयोजित इस विशेष फोटो प्रदर्शनी ने राज्य की जनजातीय, ग्रामीण एवं लोक परंपराओं को प्रभावशाली रूप से प्रस्तुत किया, जिससे छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक पहचान और अधिक सुदृढ़ हुई। प्रदर्शनी के दौरान केरल, तेलंगाना, महाराष्ट्र, उड़ीसा, मध्यप्रदेश, झारखंड, बिहार सहित ऑस्ट्रेलिया से भी बड़ी संख्या में दर्शक पहुंचे। विशेष रूप से युवा वर्ग एवं स्कूली विद्यार्थियों में छत्तीसगढ़ की लोक कला एवं संस्कृति को लेकर विशेष उत्साह देखने को मिला। आगंतुकों ने लोक नृत्य परंपराओं और कलात्मक विरासत की मुक्त कंठ से प्रशंसा की।

इस फोटो प्रदर्शनी में दीपेंद्र दीवान, अखिलेश भरोस, धनेश्वर साहू, हर्षा सिंदूर एवं शौर्य दीवान के छायाचित्र प्रदर्शित किए, जिन्हें दर्शकों से भरपूर सराहना प्राप्त हुई। आयोजनकर्ता दीपेंद्र दीवान ने कहा कि ऐसे सांस्कृतिक आयोजन निरंतर होते रहना चाहिए, ताकि आने वाली पीढ़ियाँ छत्तीसगढ़ की समृद्ध संस्कृति और परंपराओं से जुड़े रह सकें। यह आयोजन विद्यार्थियों, शोधकर्ताओं, संस्कृति अध्येताओं एवं आम नागरिकों के लिए छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक विरासत को समझने और अनुभव करने का एक महत्वपूर्ण अवसर सिद्ध हुआ। समापन अवसर पर अनेक गणमान्य नागरिक एवं कला प्रेमी उपस्थित रहे।

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