छत्तीसगढ़

नारकोटिक्स मामलों की वित्तीय जांच पर राज्यस्तरीय कार्यशाला

Shantanu Roy
30 Sept 2026 5:32 PM IST
नारकोटिक्स मामलों की वित्तीय जांच पर राज्यस्तरीय कार्यशाला
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छग
Raipur. रायपुर। पुलिस महानिदेशक अरूण देव गौतम के निर्देशन और अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक अमित कुमार के मार्गदर्शन में पुलिस मुख्यालय नवा रायपुर में नारकोटिक्स से जुड़े मामलों की वित्तीय जांच को लेकर एक दिवसीय राज्यस्तरीय कार्यशाला आयोजित की गई। कार्यशाला का उद्देश्य एनडीपीएस मामलों में अपराधियों के वित्तीय नेटवर्क का पता लगाने, अवैध संपत्तियों की पहचान करने और उनके खिलाफ प्रभावी कानूनी कार्रवाई के लिए पुलिस अधिकारियों को प्रशिक्षित करना रहा। कार्यक्रम के उद्घाटन अवसर पर अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक नारकोटिक्स अमित कुमार ने कहा कि नारकोटिक्स के मामलों में केवल आरोपियों की गिरफ्तारी पर्याप्त नहीं है, बल्कि उनके पूरे आर्थिक नेटवर्क को तोड़ना भी जरूरी है। उन्होंने कहा कि अपराधियों को सजा दिलाने के साथ-साथ नशे के कारोबार से अर्जित संपत्तियों को जब्त करने के लिए प्रभावी और वैज्ञानिक विवेचना की आवश्यकता है।
उन्होंने कहा कि यह पता लगाना जरूरी है कि नारकोटिक्स पदार्थ कौन उपलब्ध करा रहा है, कौन ले रहा है और इसके पीछे वित्तीय लेन-देन किस तरह हो रहा है। सप्लाई चेन के फॉरवर्ड और बैकवर्ड लिंक स्थापित कर वित्तीय जांच किए जाने से नशे के पूरे नेटवर्क को कमजोर किया जा सकता है। उप पुलिस महानिरीक्षक नारकोटिक्स पारूल माथुर ने कहा कि एनडीपीएस के मामलों की विवेचना में कई संबंधित एजेंसियों की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। अपराधियों द्वारा नशे के कारोबार से अर्जित अवैध संपत्तियों की पहचान करना और उनके खिलाफ वैधानिक कार्रवाई करना जांच का अहम हिस्सा है। उन्होंने बताया कि इसी उद्देश्य से पुलिस अधिकारियों को एनडीपीएस मामलों की वित्तीय जांच के प्रति संवेदनशील और प्रशिक्षित करने के लिए इस कार्यशाला का आयोजन किया गया है। उन्होंने नारकोटिक्स पदार्थों की सप्लाई में कमी, मांग में कमी, नुकसान कम करने और पुनर्वास के लिए समग्र दृष्टिकोण अपनाने की जरूरत पर जोर दिया।
कार्यशाला के प्रथम सत्र में इनकम टैक्स इन्वेस्टिगेशन विंग रायपुर के डिप्टी डायरेक्टर प्रकाश चंद्र चौहान ने विस्तृत प्रस्तुतिकरण दिया। उन्होंने बताया कि नारकोटिक्स मामलों में वित्तीय जांच के जरिए यह कैसे पता लगाया जा सकता है कि अवैध धन कहां से आ रहा है और उसे किन माध्यमों या संपत्तियों में निवेश किया जा रहा है। उन्होंने बैंकिंग लेन-देन, वित्तीय रिकॉर्ड और अन्य उपलब्ध दस्तावेजों के विश्लेषण के माध्यम से संदिग्ध आर्थिक गतिविधियों की पहचान करने से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियां साझा कीं। अधिकारियों को यह भी बताया गया कि वित्तीय साक्ष्यों को विवेचना से जोड़कर कार्रवाई को अधिक प्रभावी कैसे बनाया जा सकता है।
द्वितीय सत्र में नेशनल एकेडमी ऑफ कस्टम्स, इनडायरेक्ट टैक्सेस एंड नारकोटिक्स रायपुर के एडिशनल असिस्टेंट डायरेक्टर सलमान इम्तियाज हुसैनी ने जीएसटी से संबंधित जानकारियां साझा कीं। उन्होंने बताया कि जीएसटी रिकॉर्ड का विश्लेषण कर संदिग्ध कारोबार और अवैध धन के प्रवाह का पता लगाने में किस तरह मदद मिल सकती है। कार्यशाला में राज्यभर से उप पुलिस अधीक्षक से लेकर सहायक उप निरीक्षक स्तर तक के कुल 70 पुलिस अधिकारियों और कर्मचारियों ने भाग लिया। इस दौरान
नारकोटिक्स मामलों
की जांच को तकनीकी और वित्तीय दृष्टि से मजबूत बनाने पर विशेष जोर दिया गया। कार्यक्रम में पुलिस मुख्यालय के अन्य अधिकारी और कर्मचारी भी उपस्थित रहे। कार्यशाला का संचालन एवं आभार प्रदर्शन अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक अनामिका जैन ने किया। पुलिस विभाग का उद्देश्य इस तरह के प्रशिक्षण के माध्यम से नशे के कारोबार में शामिल नेटवर्क पर आर्थिक स्तर पर भी प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित करना है।
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