छत्तीसगढ़
छत्तीसगढ़ पुलिस मुख्यालय में फिंगरप्रिंट किट पर राज्य स्तरीय प्रशिक्षण कार्यशाला सम्पन्न
Shantanu Roy
5 Jun 2026 6:32 PM IST

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छग
Raipur. रायपुर। छत्तीसगढ़ पुलिस मुख्यालय, नवा रायपुर अटल नगर में मिनी फिंगरप्रिंट डेवलपिंग किट के उपयोग को लेकर एक दिवसीय राज्य स्तरीय प्रशिक्षण कार्यशाला का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम पुलिस महानिदेशक अरुण देव गौतम के निर्देश पर आयोजित किया गया। कार्यशाला के उद्घाटन अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में पुलिस महानिरीक्षक, सीआईडी डॉ. ध्रुव गुप्ता उपस्थित रहे। उन्होंने प्रतिभागियों को संबोधित करते हुए कहा कि फिंगरप्रिंट और चांस प्रिंट को उभारने एवं न्यायालयीन साक्ष्य के रूप में उपयोग करने में यह किट अत्यंत उपयोगी साबित होगी। उन्होंने कहा कि राज्य में अपराधियों की पहचान और चांस प्रिंट मिलान की प्रक्रिया को और अधिक प्रभावी बनाने में यह तकनीक मददगार साबित होगी।
उन्होंने बताया कि फिंगरप्रिंट किट घटनास्थल से सूक्ष्म और वैज्ञानिक तरीके से साक्ष्य संकलन में सक्षम है। इससे प्राप्त चांस प्रिंट का विशेषज्ञों द्वारा सूक्ष्म परीक्षण कर अज्ञात आरोपियों की पहचान सुनिश्चित की जाती है। विभाग द्वारा इसी उपयोगिता को ध्यान में रखते हुए मिनी फिंगरप्रिंट डेवलपिंग किट का क्रय किया गया है। कार्यशाला में विभिन्न जिलों से आए प्रतिभागियों को विशेषज्ञों द्वारा पावर प्वाइंट प्रेजेंटेशन और वीडियो के माध्यम से किट के उपयोग की विस्तृत जानकारी दी गई। इस दौरान राज्य के सभी थानों से आए कर्मचारियों को फिंगरप्रिंट किट का वितरण भी किया गया। कार्यशाला में प्रधान आरक्षक और आरक्षक स्तर के लगभग 500 पुलिसकर्मियों ने प्रशिक्षण प्राप्त किया।
विशेषज्ञों ने प्रशिक्षण के दौरान फिंगरप्रिंट संग्रह, चांस प्रिंट पहचान, साक्ष्य सुरक्षित रखने की प्रक्रिया और वैज्ञानिक जांच के तरीकों पर विस्तार से जानकारी दी। कार्यशाला में फिंगरप्रिंट ब्यूरो के संचालक (उप पुलिस अधीक्षक) अजय कुमार साहू, उप पुलिस अधीक्षक विद्या जोहर, निरीक्षक कमलेश्वर सिंह, धर्मेन्द्र कुमार भारती और अंजली मिंज सहित अन्य विशेषज्ञ उपस्थित रहे। पुलिस विभाग ने कहा कि इस प्रकार के प्रशिक्षण से थानों में जांच प्रक्रिया और मजबूत होगी तथा अपराधियों की पहचान में तेजी आएगी। कार्यक्रम का उद्देश्य पुलिसिंग को तकनीकी रूप से और अधिक सशक्त बनाना है। इस प्रशिक्षण कार्यशाला के माध्यम से पुलिसकर्मियों को आधुनिक फॉरेंसिक तकनीक से जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है, जिससे राज्य में अपराध जांच प्रणाली को नई मजबूती मिलेगी।
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