छत्तीसगढ़

10 दिन से लापता वृद्ध का जंगल में मिला कंकालनुमा शव

Shantanu Roy
8 Dec 2025 11:20 PM IST
10 दिन से लापता वृद्ध का जंगल में मिला कंकालनुमा शव
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Gariaband. गरियाबंद। जिले में रविवार का दिन दो दर्दनाक घटनाओं से स्तब्ध कर देने वाला रहा। छूरा थाना क्षेत्र के ग्राम रसेला और पिपरछेड़ी थाना क्षेत्र के कुडेरादादर जंगल में दो अलग-अलग परिस्थितियों में मौत की खबरों ने पूरे इलाके में शोक का माहौल बना दिया है। एक तरफ जहां रसेला के ढोडगा तालाब में 45 वर्षीय व्यक्ति की डूबने से मौत हो गई, वहीं दूसरी तरफ 80 वर्षीय लापता वृद्ध का क्षत-विक्षत कंकालनुमा शव जंगल में बरामद हुआ। दोनों घटनाओं में पुलिस ने मर्ग कायम कर विवेचना शुरू कर दी है।

तालाब में डूबने से हिरा सिंह की मौत, मिर्गी बीमारी बनी संभावित वजह
पहली घटना रसेला गांव के ढोडगा तालाब की है। रविवार सुबह हिरा सिंह (45 वर्ष), पिता बीर सिंह ठाकुर की डूबने से मौत हो गई। ग्रामीणों ने बताया कि सुबह-सुबह उन्हें तालाब में पड़े देखा गया, जिसके बाद उन्होंने तुरंत छूरा थाना को सूचना दी। सूचना मिलते ही थाना प्रभारी अपनी टीम के साथ मौके पर पहुंचे और पंचनामा की कार्रवाई कर शव को पोस्टमार्टम के लिए छूरा अस्पताल भेजा। पोस्टमार्टम के बाद मृतक का शव परिजनों को सौंप दिया गया। परिवार के सदस्यों ने पुलिस को बताया कि हिरा सिंह लंबे समय से मिर्गी बीमारी से पीड़ित थे, और कई बार अचानक दौरा पड़ने की घटनाएँ सामने आ चुकी थीं। परिजनों और पुलिस दोनों को आशंका है कि सुबह तालाब के पास उन्हें अचानक दौरा पड़ा होगा, जिसके कारण वे पानी में गिर पड़े और डूबने से उनकी मौत हो गई।

10–12 दिन से लापता वृद्ध का जंगल में मिला कंकालनुमा शव
दूसरी घटना भी रसेला से ही संबंधित है, जहां 80 वर्षीय वृद्ध गोविंद मांझी लगभग 10 से 12 दिन पहले बिना बताए घर से गायब हो गए थे। परिजनों ने उनकी गुमशुदगी की सूचना छूरा थाना में दर्ज कराई थी। कई दिनों से लगातार खोजबीन के बावजूद कोई सुराग नहीं मिला। विवार को परिजन खोजते-खोजते कुडेरादादर के जंगल क्षेत्र में पहुंचे। गांव की सीमा के पास ही उन्हें एक क्षत-विक्षत शव पड़ा दिखाई दिया। करीब जाकर देखने पर यह शव गोविंद मांझी का ही निकला। घटना स्थल पिपरछेड़ी थाना क्षेत्र में होने की वजह से पिपरछेड़ी थाना प्रभारी टीम के साथ मौके पर पहुंचे और मर्ग कायम कर जांच शुरू की। पुलिस ने बताया कि शव 10–12 दिन पुराना होने के कारण जंगली जानवरों और कुत्तों ने शरीर के कई हिस्सों को नुकसान पहुंचाया था। शव की हालत इतनी खराब थी कि परिजनों ने उसे प्लास्टिक में पैक कर किसी तरह गरियाबंद जिला अस्पताल पहुंचाया।

गरियाबंद जिला अस्पताल ने शव को रायपुर मेकाहारा रेफर किया
जिला अस्पताल के डॉक्टर हरीश चौहान ने बताया कि शव की स्थिति अत्यधिक क्षतिग्रस्त होने के कारण गरियाबंद में पोस्टमार्टम करना संभव नहीं था। ऐसे मामलों में पोस्टमार्टम केवल रायपुर के मेकाहारा अस्पताल में ही किया जाता है। इसलिए सोमवार को वृद्ध का शव रायपुर रेफर किया गया, जहां मेडिकल टीम विस्तृत जांच करेगी।
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