छत्तीसगढ़

रक्षाबंधन पर छत्तीसगढ़ की जेलों में बहनों ने भाइयों को बांधी राखियां

Shantanu Roy
28 Aug 2026 3:00 PM IST
रक्षाबंधन पर छत्तीसगढ़ की जेलों में बहनों ने भाइयों को बांधी राखियां
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Raipur. रायपुर। छत्तीसगढ़ में शुक्रवार, 28 अगस्त को रक्षाबंधन का पर्व श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया जा रहा है। इस खास मौके पर प्रदेश की विभिन्न जेलों में भी भावनाओं से भरा माहौल देखने को मिला। जेलों में बंद भाइयों की कलाई पर राखी बांधने के लिए सुबह से ही बड़ी संख्या में बहनें पहुंचीं। कई जेलों के बाहर बहनों की लंबी कतारें नजर आईं। लंबे समय बाद भाइयों से मुलाकात का मौका मिलने पर कहीं बहनें भावुक दिखाई दीं, तो कहीं उन्होंने भाइयों को मिठाई खिलाकर पर्व की खुशियां साझा कीं। आचार्य नंदकुमार चौबे के अनुसार, रक्षाबंधन के दिन दिनभर राखी बांधने का मुहूर्त है। पूर्णिमा तिथि सुबह 9:48 बजे तक रही। इसके बाद भी राखी बांधी जा सकती है।
हालांकि अलग-अलग शहरों में स्थानीय पंचांग के अनुसार समय में थोड़ा अंतर हो सकता है। ज्योतिषी रितेश शास्त्री के अनुसार इस बार रक्षाबंधन पर भद्रा नहीं है। पंचक जरूर रहेगा, लेकिन इससे रक्षाबंधन पर्व मनाने में कोई बाधा नहीं है। रक्षाबंधन को देखते हुए छत्तीसगढ़ के कई जेलों में बंदी भाइयों से मिलने आने वाली बहनों के लिए विशेष इंतजाम किए गए हैं। बिलासपुर, रायगढ़, दुर्ग, बलौदाबाजार और अंबिकापुर की जेलों में सुरक्षा व्यवस्था के साथ मुलाकात की विशेष व्यवस्था की गई है। सुबह से ही बहनों का जेल पहुंचना शुरू हो गया था। अपने भाइयों को राखी बांधने के लिए बहनें कतार में खड़ी होकर अपनी बारी का इंतजार करती नजर आईं।
अंबिकापुर जेल में भावुक हुआ माहौल
अंबिकापुर के सेंट्रल जेल में रक्षाबंधन को लेकर खासा उत्साह देखने को मिला। बंदी भाइयों को राखी बांधने के लिए सुबह से ही बड़ी संख्या में बहनें जेल पहुंचीं। जेल के बाहर बहनों की लंबी कतार लगी रही। मुलाकात के दौरान बहनों ने भाइयों की कलाई पर राखी बांधी, मिठाई खिलाई और उनका हालचाल जाना। भाई-बहन की मुलाकात के दौरान कई भावुक दृश्य भी देखने को मिले। मुलाकात का समय निर्धारित रखा गया और बहनों को अपने भाइयों से मिलने के लिए 10 मिनट का समय दिया गया।
गरिमा गृह में भी मनाया गया रक्षाबंधन
रायपुर स्थित ट्रांसजेंडर शेल्टर होम ‘गरिमा गृह’ में भी रक्षाबंधन का पर्व प्रेम और आत्मीयता के साथ मनाया गया। यहां पर्व को लेकर उत्साह देखने को मिला और लोगों ने एक-दूसरे के साथ रक्षाबंधन की खुशियां साझा कीं। जेलों में रक्षाबंधन का यह आयोजन उन बंदियों के लिए भी खास रहा, जिन्हें अपने परिवार से मिलने का अवसर मिला। बहनों ने भाइयों की कलाई पर राखी बांधकर उनके बेहतर भविष्य और सुरक्षित जीवन की कामना की। वहीं भाइयों ने भी अपनी बहनों की रक्षा और सम्मान का संकल्प लिया। रक्षाबंधन के इस अवसर पर जेलों में उमड़ी बहनों की भीड़ ने यह दिखाया कि रिश्तों की डोर परिस्थितियों और दूरियों से कमजोर नहीं होती। जेल की चारदीवारी के बीच भी भाई-बहन के प्रेम और विश्वास का यह पर्व भावुकता और आत्मीयता के साथ मनाया गया।
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