छत्तीसगढ़

जनता से रिश्ता की खबर का बड़ा असर: श्री सीमेंट की झूठी 'No Litigation' घोषणा का पर्दाफाश, SEIAA ने रोका क्षमता वृद्धि प्रस्ताव!

Shubhra Nandy
5 Nov 2026 11:39 AM IST
जनता से रिश्ता की खबर का बड़ा असर: श्री सीमेंट की झूठी No Litigation घोषणा का पर्दाफाश, SEIAA ने रोका क्षमता वृद्धि प्रस्ताव!
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करही बांध मामला
बलौदाबाजार-भाटापारा : 'जनता से रिश्ता' की खबर का एक बार फिर बड़ा असर देखने को मिला है। श्री सीमेंट लिमिटेड द्वारा करही-चंडी लाइमस्टोन माइंस की उत्पादन क्षमता 15 लाख टन से बढ़ाकर 40.50 लाख टन सालाना करने के महत्वाकांक्षी प्रस्ताव पर ब्रेक लग गया है। छत्तीसगढ़ राज्य पर्यावरण प्रभाव आकलन प्राधिकरण (SEIAA) ने 25 सितंबर 2026 की बैठक में इस प्रस्ताव को पुनर्विचार के लिए SEAC को वापस लौटा दिया है। श्री सीमेंट लिमिटेड की करही-चंडी लाइमस्टोन माइंस के क्षमता विस्तार प्रस्ताव को लेकर बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। कंपनी की पर्यावरणीय स्वीकृति, जमीन संबंधी विवाद और न्यायालय में लंबित प्रकरण को लेकर उठ रहे सवालों के बीच छत्तीसगढ़ राज्य पर्यावरण प्रभाव आकलन प्राधिकरण (SEIAA) ने उत्पादन क्षमता बढ़ाने के प्रस्ताव को पुनर्विचार के लिए राज्य विशेषज्ञ मूल्यांकन समिति (SEAC) को वापस भेज दिया है।
जनता से रिश्ता ने पूर्व में भी श्री सीमेंट से जुड़े पर्यावरणीय अनुमति और औद्योगिक परियोजनाओं के मामलों में उठ रही शिकायतों को प्रमुखता से प्रकाशित किया था। अब करही-चंडी खदान की क्षमता वृद्धि प्रक्रिया में सामने आए नए घटनाक्रम ने कंपनी द्वारा प्रस्तुत घोषणाओं और संबंधित विभागों की भूमिका पर नए सवाल खड़े कर दिए हैं। जानकारी के अनुसार श्री सीमेंट लिमिटेड ने करही-चंडी लाइमस्टोन माइंस की सालाना उत्पादन क्षमता 15 लाख टन से बढ़ाकर 40.50 लाख टन करने का प्रस्ताव प्रस्तुत किया था। लेकिन 25 सितंबर 2026 की SEIAA बैठक में इस प्रस्ताव को पुनर्विचार के लिए वापस भेजने का निर्णय लिया गया। इस पूरे मामले में सबसे महत्वपूर्ण सवाल कंपनी की ओर से प्रस्तुत उस घोषणा को लेकर उठ रहा है, जिसमें परियोजना से संबंधित कोई न्यायालयीन मामला लंबित नहीं होने की बात कही गई थी।
'No Litigation Pending' की घोषणा पर उठे गंभीर सवाल
शिकायतकर्ता बसंत आडिल के अनुसार श्री सीमेंट लिमिटेड ने 25 जून 2026 को प्रस्तुत अपने अंडरटेकिंग में घोषणा की थी कि संबंधित परियोजना के खिलाफ कोई न्यायालयीन मामला लंबित नहीं है। दूसरी ओर, आडिल का कहना है कि छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय में WPC No. 2580/2023, बसंत आडिल विरुद्ध भारत संघ एवं अन्य प्रकरण लंबित है। इस मामले में श्री सीमेंट लिमिटेड को प्रतिवादी क्रमांक 7 बनाया गया है। ऐसे में सवाल यह उठ रहा है कि जब परियोजना से संबंधित विवाद न्यायालय में विचाराधीन बताया जा रहा है, तब कंपनी की ओर से कोई मामला लंबित नहीं होने की घोषणा किस आधार पर प्रस्तुत की गई? शिकायतकर्ता ने 23 सितंबर 2026 को SEIAA के समक्ष शिकायत प्रस्तुत कर इस घोषणा की सत्यता की जांच करने की मांग की थी। आडिल द्वारा उपलब्ध कराए गए विवरण के मुताबिक, SEIAA ने अपने निर्णय में उच्च न्यायालय में लंबित बताए गए मामले का उल्लेख किया और प्रस्ताव को दोबारा परीक्षण के लिए SEAC के पास भेज दिया। हालांकि, प्रस्ताव को पुनर्विचार के लिए लौटाए जाने का अर्थ उसकी अंतिम अस्वीकृति नहीं है। अब संबंधित समिति को उपलब्ध तथ्यों और दस्तावेजों का परीक्षण करना होगा।
करही बांध की शासकीय भूमि को निजी बताने का आरोप
इस विवाद का दूसरा महत्वपूर्ण पहलू करही बांध से संबंधित भूमि का है। शिकायतकर्ता के अनुसार प्रधानमंत्री कार्यालय और मुख्यमंत्री सचिवालय में की गई शिकायतों के आधार पर जिला खनिज अधिकारी द्वारा जून 2026 में शासन को भेजे गए जांच प्रतिवेदन में शिकायत की कंडिका क्रमांक 4 को सत्य पाया गया। बताए गए जांच निष्कर्ष के अनुसार वर्ष 2020 में पर्यावरणीय स्वीकृति प्राप्त करने की प्रक्रिया के दौरान करही बांध से संबंधित शासकीय भूमि को निजी भूमि के रूप में दर्शाने और जलाशय संबंधी जानकारी प्रस्तुत नहीं करने का मामला सामने आया था। शिकायत में निजी भूमि दर्शाकर मुआवजे से संबंधित विवरण प्रस्तुत करने का आरोप भी लगाया गया था। शिकायतकर्ता के मुताबिक जिला खनिज अधिकारी के जांच प्रतिवेदन में संबंधित तथ्यों के आधार पर केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय को नियमानुसार कार्रवाई के लिए पत्र भेजने की अनुशंसा की गई है। यह मामला इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि किसी खनन परियोजना की पर्यावरणीय स्वीकृति में भूमि की वास्तविक स्थिति, जलाशयों की मौजूदगी और प्रतिबंधित क्षेत्रों की जानकारी का विशेष महत्व होता है।
242.127 हेक्टेयर से घटकर 225.719 हेक्टेयर हुआ था क्षेत्र
करही-चंडी लाइमस्टोन माइंस को मूल रूप से 242.127 हेक्टेयर क्षेत्र के लिए पर्यावरणीय स्वीकृति प्रदान की गई थी। वर्ष 2021 में करही जलाशय के 16.408 हेक्टेयर प्रतिबंधित डूब क्षेत्र को हटाने के बाद खनन क्षेत्र घटाकर 225.719 हेक्टेयर कर दिया गया। कंपनी की पूर्व पर्यावरणीय अनुपालन रिपोर्ट में भी 225.719 हेक्टेयर क्षेत्र और 15 लाख टन सालाना चूना पत्थर उत्पादन क्षमता का उल्लेख मिलता है। अब इसी परियोजना की उत्पादन क्षमता बढ़ाकर 40.50 लाख टन सालाना करने का प्रस्ताव विचाराधीन है। इस प्रस्ताव के साथ पुराने भूमि विवाद, पर्यावरणीय स्वीकृति प्रक्रिया और न्यायालयीन घोषणा की सत्यता जैसे मुद्दे फिर चर्चा में आ गए हैं।
हाईकोर्ट में शासन का जवाब लंबित होने का दावा
बसंत आडिल के अनुसार करही बांध की भूमि, मूल पर्यावरणीय स्वीकृति और जिला खनिज अधिकारी के 16 मार्च 2023 के आदेश से संबंधित विवाद उच्च न्यायालय के समक्ष विचाराधीन है। उनका कहना है कि मामले में राज्य शासन की ओर से जवाब प्रस्तुत किया जाना अभी बाकी है। जवाब दाखिल करने के लिए रिमाइंडर भी जारी किए जा चुके हैं। आडिल ने मांग की है कि जब तक संबंधित दस्तावेजों और लंबित न्यायालयीन प्रकरण की स्थिति स्पष्ट नहीं हो जाती, तब तक क्षमता वृद्धि प्रस्ताव पर अंतिम निर्णय लेने से पहले सभी तथ्यों का परीक्षण किया जाए।
PMO में शिकायत के बाद जांच के निर्देश का दावा
शिकायतकर्ता ने बताया कि 2 सितंबर 2025 को प्रधानमंत्री कार्यालय में की गई शिकायत के बाद केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय ने राज्य के खनिज विभाग और छत्तीसगढ़ पर्यावरण संरक्षण मंडल को मामले की जांच के निर्देश दिए थे। इसके बाद खनिज विभाग की ओर से तैयार जांच प्रतिवेदन में भूमि संबंधी शिकायत के एक महत्वपूर्ण बिंदु को सही पाए जाने का उल्लेख किया गया। आडिल ने संबंधित विभागों से जांच के निष्कर्षों के आधार पर आवश्यक कार्रवाई करने की मांग की है। उन्होंने यह भी कहा कि कंपनी की ओर से प्रस्तुत न्यायालयीन घोषणा का स्वतंत्र सत्यापन होना चाहिए, ताकि पर्यावरणीय स्वीकृति प्रक्रिया में सभी तथ्य स्पष्ट रहें।
अब SEAC की समीक्षा पर टिकी निगाहें
SEIAA द्वारा प्रस्ताव लौटाए जाने के बाद अब निगाहें SEAC की आगामी समीक्षा पर टिकी हैं। इस समीक्षा में लंबित न्यायालयीन प्रकरण, भूमि से जुड़े विवाद और पर्यावरणीय दस्तावेजों को लेकर उठाई गई आपत्तियां महत्वपूर्ण हो सकती हैं। यह भी देखना होगा कि कंपनी की ओर से इन मुद्दों पर क्या स्पष्टीकरण प्रस्तुत किया जाता है और संबंधित प्राधिकरण किस आधार पर आगे का निर्णय लेते हैं। फिलहाल उपलब्ध विवरण के आधार पर यह मामला किसी न्यायालय द्वारा कंपनी को दोषी ठहराए जाने का नहीं, बल्कि शिकायतों, जांच निष्कर्षों और प्रस्ताव के नियामकीय पुनर्विचार का है।
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