छत्तीसगढ़

मार दिया जाए या छोड़ दिया जाए, बोल तेरे साथ क्या सलूक किया जाए...

Nil dhankar
25 April 2025 11:15 AM IST
मार दिया जाए या छोड़ दिया जाए, बोल तेरे साथ क्या सलूक किया जाए...
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कैलाश यादव/ज़ाकिर घुरसेना

सीजीपीएससी घोटाला केस फिल्म शोले की तरह बसंती और बीरू की ओर ही केंद्रीत हो रहा है। जिसमें गब्बर का वो डायलाग तेरा क्या होगा कालिया की तरह हर बार कभी सीबीआई तो कभी ईडी पूछ रही है। अब कितने कालिए इसकी खोज हो रही है। वैसे भी अभी कलियाओ की कमी नहीं है इस दौर में। जनता में खुसुर-फुसुर है कि छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग भर्ती घोटाले में अब प्रवर्तन निदेशालय ने भी जांच का जिम्मा संभाल लिया है। इससे पहले मामले की जांच पुलिस, आर्थिक अपराध अन्वेषण शाखा और केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो कर रही थी। सीबीआई की रिपोर्ट के आधार पर ईडी ने ईसीआईआर दर्ज की है, प्रारंभिक जांच में मनी लॉन्ड्रिंग के ठोस प्रमाण मिले हैं। मामले में ईडी की एंट्री से हड़कंप मच गया है। जांच में कई नेताओं की भूमिका भी सामने आई है। अब जितने कालिये है वो एक दूसरे को कालिए की नजर से देख रहे है। इस खबर पर अब ईडी और सीबीआई कालिए कालिए पर लिखा है का दांव, खेलकर बड़ी मछलियों पर कांटे डालने के तैयारी कर ली है। अब कालिय़ा बोले कि सरकार मैंने आपका नमक खाय़ा है या नोट खाया है यह तो ईडी और सीबीआई उगलवा लेगी। असल जिंदगी में तो यही गब्बर है।

सरकार ने तहसीलदारों के पेट में लात मार दी

छत्तीसगढ़ सरकार ने ज़मीन की खरीद-फरोख्त के बाद नामांतरण की प्रक्रिया को सरल और पारदर्शी बनाने के लिए बड़ा फैसला लिया है। सरकार ने गजट नोटिफिकेशन जारी कर तहसीलदारों से नामांतरण का अधिकार छीन लिया है और यह अधिकार अब रजिस्ट्रार और सब-रजिस्ट्रार को सौंप दिया गया है।

इस बदलाव के साथ अब पंजीकृत रजिस्ट्री होते ही संबंधित भूमि और संपत्तियों का नामांतरण स्वचालित रूप से हो जाएगा। यह संशोधन छत्तीसगढ़ भू-राजस्व संहिता, 1959 की धारा 24 की उप-धारा (1) और धारा 110 के तहत किया गया है। पहले ज़मीन की रजिस्ट्री के बाद खरीदार को तहसीलदार के पास नामांतरण के लिए आवेदन देना पड़ता था। फिर कोर्ट जैसी प्रक्रिया में समय लगता था, जिससे फर्जीवाड़े और विलंब की गुंजाइश बनी रहती थी। खासकर किसानों को इस कारण दिक्कतों का सामना करना पड़ता था, क्योंकि बिना नामांतरण के वे समर्थन मूल्य पर धान तक नहीं बेच पाते थ

अब रजिस्ट्री के साथ ही ज़मीन का नाम संबंधित खरीदार के नाम ऑटोमैटिक दर्ज हो जाएगा। इससे न केवल प्रक्रिया तेज़ होगी, बल्कि भू-माफिया और फर्जीवाड़े पर भी लगाम लगेगी। इस नए आदेश से ज़मीन से जुड़े मामलों में पारदर्शिता बढ़ेगी, आम जनता को राहत मिलेगी, और ज़मीन के मामलों में फर्जी दस्तावेज़ों के ज़रिए होने वाले घोटालों पर प्रभावी रोक लगेगी। जनता में खुसुर-फुसुर है कि तहसीलदारों से नामांतरण का अधिकार छिनने से बहुत बड़ा जरिया बंंद होने से तहसीलदार संघ सरकार को ज्ञापन सौंपने जा रही है। यह तो सीधे सीधे पेट में लात मारने वाली बात है। कहने का मतलब ये है कि हमारे पास तो एक ही काम था उसे भी सरकार ने छीन लिय़ा, तो क्या अब हमारा भी डिजीटलीकरण हो जाएगा।

छत्तीसगढ़ का जादू चल रहा उद्योगपतियों पर

पिछले डेढ़ साल में साय सरकार ने उद्योगपतियों के लिए निवेश का दरवाजा खोलकर बड़ी उपलिब्ध हासिल की है। ऐसा लगता है कि उद्योगपति अपनी सारी पूंजी छत्तीसगढ़ में लगा देने चाहते है यह आकर्षण विष्णु के सुशासन ने कर दिखाया । कही भी एमओयू हो सरकार 15 दिनों में जमीन तक आवंटित कर दे रही है। अब इससे बड़ा सरलीकरण और क्या हो सकता है। जनता में खसुर-फुसुर है कि ये विष्णु का समुद्र मंथन वाला मनमोहना स्वरूप है जो अमृत कलश को पाने के मोहनी का रूप धारण कर देवताओ्ं के हिस्से में अमृत लाया। छत्तीसगढ़ सरकार ने राज्य में औद्योगिक और व्यावसायिक विकास को नई गति देने के उद्देश्य से छत्तीसगढ़ भूमि विकास नियम, 1984 में बड़ा संशोधन किया है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की विशेष पहल पर किए गए इन बदलावों से उद्योगपतियों को अब एक ही भूखंड पर दोगुना निर्माण करने की अनुमति मिलेगी। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा, “इन संशोधनों से छत्तीसगढ़ में आधुनिक औद्योगिक और व्यावसायिक विकास को बढ़ावा मिलेगा। इससे निवेश बढ़ेगा, रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे और राज्य की अर्थव्यवस्था को नई दिशा मिलेगी।”

नगर एवं ग्राम निवेश विभाग द्वारा यह नीति उद्योग हितैषी दृष्टिकोण के तहत तैयार की गई है, ताकि छत्तीसगढ़ को निवेश का पसंदीदा गंतव्य बनाया जा सके।

यह कदम छत्तीसगढ़ को उद्योग और व्यवसाय के क्षेत्र में नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित हो सकता है।

छत्तीसगढ़ के किसान बनेंगे ड्रोनाचार्य ..

आधुनिक खेती की दिशा में छत्तीसगढ़ ने आज एक और कदम आगे बढ़ा दिया है। इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय और रायपुर की कैटेलिस्ट फाउंडेशन के बीच ऐसा करार हुआ है जो न सिर्फ खेतों में टेक्नोलॉजी की ऊंची उड़ान तय करेगा, बल्कि युवाओं को नौकरी और नए कौशल का जरिया भी देगा।

विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. गिरीश चंदेल ने कहा कि खेतों में ड्रोन का उपयोग अब केवल विज्ञान नहीं, बल्कि ज़रूरत बनता जा रहा है. आज बीज बोने, खाद और दवाओं के छिड़काव से लेकर फसलों की निगरानी तक, ड्रोन ‘स्मार्ट किसान’ का नया औज़ार बन चुका है. यही वजह है कि अब युवाओं को तकनीकी दक्षता से सीधे रोजगार से जोड़ने की कोशिश हो रही है। देशभर में अब तक सिर्फ तीन कृषि विश्वविद्यालयों ने ड्रोन तकनीक पर प्रमाण-पत्र पाठ्यक्रम शुरू किया है, और इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय अब चौथे नंबर पर शामिल हो गया है। कैटेलिस्ट फाउंडेशन के अध्यक्ष पुष्पराज पाण्डेय ने कहा कि देशभर में खेती में ड्रोन का इस्तेमाल तेजी से बढ़ रहा है, लेकिन प्रशिक्षित ऑपरेटरों की भारी कमी है।यह कोर्स इस गैप को पाटेगा और युवाओं के लिए रोज़गार के दरवाज़े खोलेगा। जनता में खुसुर-फुसुर है कि कृषि विवि को साधुवाद जो बेरोजगार कृषि इंजीनियरों ड्रोनाचार्य बनाकर कृषि कार्य में एक नया अध्याय जोड़कर गांव -गांव को आधुिनक कृषि सिस्टम से जोड़ रहे है।

पुलिस का भगवान रूप ..

पुलिस कभी -कभी ऐसा काम करती है जिसकी सराहना करते लोग नहीं थकते है। ऐसा ही मामना बिलासपुर में संवेदनशील पहल करते हुए पुलिस ने ग्रीन कॉरिडोर बनाकर दो नवजात बच्चों को बेहतर इलाज के लिए हैदराबाद एयरलिफ्ट कराया। पुलिस प्रशासन को इसकी सूचना दी गई। जिसके बाद पुलिस ने अस्पताल से बिलासा एयरपोर्ट तक ग्रीन कॉरिडोर का निर्माण किया. बाद में एंबुलेंस के जरिए ग्रीन कॉरिडोर से नवजातों को बिलासा एयरपोर्ट पहुंचाया गया. यहां से एयर एंबुलेंस के जरिए बच्चों को हैदराबाद एयरलिफ्ट कर दिया गया है. हैदराबाद में आगे बच्चों का उपचार किया जाएगा। इस दौरान अस्पताल से ग्रीन कॉरिडोर के जरिए 20 मिनट में एम्बुलेंस दोनों नवजातों को लेकर बिलासा एयरपोर्ट पहुंची। मामला प्रीमैच्योर जुड़वा बच्चों से जुड़ा है। जो जन्म के बाद ही क्रिटिकल स्टेज में थे। दोनों बच्चों का वजन और प्लेटलेट्स बेहद कम था. बच्चों के परिजनों ने नाजुक हालत में पैदा हुए नवजातों के बेहतर इलाज के लिए उन्हें हैदराबाद ले जाने का निर्णय लिया गया. लेकिन नाजुक स्थिति के बीच बच्चों को सुरक्षित एयर एंबुलेंस तक ले जाने की बड़ी चुनौती थी।वन विभाग की आईएफएस अफसर की 30 मार्च को डिलीवरी हुई, तब उन्होंने जुड़वां बच्चियों को जन्म दिया। 7 माह गर्भ में रहीं दोनों बच्चियों को कार्डियक संबंधी गंभीर समस्या थी। ऐसे में उन्हें पहले शहर के शिशु रोग अस्पताल में भर्ती कराया गया. लेकिन, यहां उनकी तबीयत में सुधार नहीं हो रही थी. जिसके चलते बच्चियों को हैदराबाद एयर लिफ्ट करने की योजना बनाई गई. इसके लिए एक्सपर्ट डॉक्टरों से संपर्क कर परिजनों ने एयर एंबुलेंस की व्यवस्था की।जनता में खुसुर-फुसुर है कि पुलिस का यह रूप भगवान से कम नहीं है जिसने क्रिटिकल पोजिशन में बच्चियों की जान बचाने में अहम भूमिका निभाई है।

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