छत्तीसगढ़

पलायन, नौकरीपेशा या घर से बाहर रहने वालों के लिए वरदान है स्वगणना

Shantanu Roy
27 April 2026 11:54 PM IST
पलायन, नौकरीपेशा या घर से बाहर रहने वालों के लिए वरदान है स्वगणना
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Sukma. सुकमा। भारत की जनगणना 2027 कार्यक्रम शुरू हो गया है। यह 15 साल बाद हो रहा है। जो परिवार पलायन किये, नौकरीपेशा, 1 से 30 मई तक घर से बाहर रहने वाले हैं या घर से बाहर रहते हैं उन लोगों के लिए खुशखबरी की बात है। उन्हें जनगणना के लिए घर आने की जरूरत नहीं है, वे जहां है वहीं से जनगणना के फॉर्म को स्वगणना का ऑनलाइन फॉर्म 30 अप्रैल 2026 तक वेबसाईट (एसई डॉट सेंसस डॉट जीओव्ही डॉट इन) पर स्वयं भर सकते हैं, जिसके बाद उन्हें एक विशेष आईडी प्राप्त होगी। गणना कर्मी (प्रगणक) के घर पहुंचने पर यह आईडी दिखाने से पूरी प्रक्रिया कुछ ही मिनटों में पूरी हो जाएगी। इसके लिए प्रगणक से संपर्क करना चाहिए। डिजिटल प्रक्रिया के तहत पलायन किये या मई में घर पर नहीं रहने वालों को इसका उपयोग किया जाना चाहिए ताकि वे जनगणना से वंचित नहीं हो। जनगणना में जो स्वगणना नहीं किये उनके लिए घर घर जाकर मकान सूचीकरण होगा, जो 1 मई से 30 मई 2026 तक चलेगा। इसके तहत लगभग 33 प्रश्न पूछे जाएंगे, जिनमें घर की स्थिति, पेयजल, बिजली, शौचालय और अन्य सुविधाओं की जानकारी शामिल होगी। मुख्य जनगणना फरवरी 2027 से शुरू होकर मार्च 2027 तक पूरी की जाएगी।

नागरिकों की सामाजिक आर्थिक स्थिति का आंकलन किया जाएगा।स्व-गणना सिर्फ सुविधा है, मजबूरी नहीं। अगर आप ऑनलाइन नहीं भर पाते तो जनगणनाकर्मी पहले की तरह घर आकर फॉर्म भरेंगे। डिजिटल जनगणना 2026 में श्स्व-गणनाश् यानी खुद से फॉर्म भरने की सुविधा दी गई है। इसके नागरिकों और सरकार दोनों को बड़े फायदे हैं।जनगणनाकर्मी के घर आने का इंतजार नहीं करना पड़ेगा। आप रात 10 बजे भी अपने हिसाब से फॉर्म भर सकते हैं। मोबाइल या लैपटॉप से घर बैठे, छुट्टी के दिन, 24Û7 फॉर्म भरने की आजादी। लाइन में लगने की झंझट नहीं। आप खुद अपना नाम, उम्र, जन्मतिथि, शिक्षा जैसी जानकारी भरेंगे। जनगणनाकर्मी से बोलने-सुनने में गलती नहीं होगी। फॉर्म सबमिट से पहले दोबारा जांच भी कर सकते हैं। संवेदनशील जानकारी जैसे आय, दिव्यांगता आदि सीधे आप सिस्टम में भरते हैं। घर के बाकी लोगों या पड़ोसी को पता नहीं चलता। फॉर्म भरकर पावती ले लें। जनगणनाकर्मी जब आए तो सिर्फ पावती दिखानी है। 2 मिनट में काम खत्म। नागरिक खुद जानकारी देगा तो त्रुटि दर घटेगी। योजनाएं बनाने के लिए सही डेटा मिलेगा। फील्ड में जनगणनाकर्मी का समय बचेगा। वह सिर्फ वेरिफिकेशन करेगा। पूरी जनगणना जल्दी पूरी होगी।
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