सरिता साहू ने कारीगर योजना से सीखा हुनर, आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ाया कदम

महासमुंद। भारत सरकार के खादी एवं ग्रामोद्योग आयोग द्वारा संचालित कारीगर योजना ग्रामीण क्षेत्रों में रह रहे आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के लिए एक सशक्तिकरण की दिशा में महत्वपूर्ण पहल साबित हो रही है। इस योजना का उद्देश्य ग्रामीण जनता को स्वरोजगार हेतु प्रेरित करना एवं उन्हें आवश्यक प्रशिक्षण, संसाधन और तकनीकी सहायता प्रदान करना है, ताकि वे पारंपरिक एवं स्थानीय उत्पादों के माध्यम से आत्मनिर्भर बन सकें।
इसी कड़ी में विजयलक्ष्मी समाज कल्याण समिति, महासमुंद के माध्यम से विकासखंड पिथौरा के ग्राम भुरकोनी की निवासी सरिता साहू को कारीगर योजना का लाभ प्राप्त हुआ। सरिता का परिवार आर्थिक रूप से कमजोर था और उन्हें आजीविका चलाने में अनेक कठिनाइयों का सामना करना पड़ता था। परिवार की जरूरतें पूरी करना कठिन होता जा रहा था, परंतु उनके जीवन में उस समय बदलाव आया जब उन्हें कारीगर योजना की जानकारी प्राप्त हुई।
सरिता ने योजना के अंतर्गत हर्बल साबुन निर्माण तथा मिलेट्स (मोटे अनाज) आधारित खाद्य उत्पादों के निर्माण का व्यावसायिक प्रशिक्षण प्राप्त किया। प्रशिक्षण समाप्ति के उपरांत सरिता ने बिना समय गंवाए अपने गृह ग्राम में ही लघु स्तर पर उत्पादन कार्य प्रारंभ कर दिया। आज वे स्वयं के द्वारा निर्मित हर्बल साबुन एवं मिलेट्स से बने उत्पादों का स्थानीय बाजार में विक्रय कर रही हैं।
सरिता की मेहनत और योजना की सहायता से अब उनकी मासिक आय 5 हजार से 8 हजार रुपए के बीच हो गई है। इस आय से वे न केवल अपने परिवार का भरण-पोषण सुचारू रूप से कर रही हैं, बल्कि बच्चों की शिक्षा और अन्य आवश्यकताओं को भी पूरा कर पा रही हैं। सरिता भावुक होकर कहती हैं, “मैं खादी ग्रामोद्योग आयोग और विजयलक्ष्मी समाज कल्याण समिति की अत्यंत आभारी हूं जिन्होंने मुझे न केवल प्रशिक्षण दिया, बल्कि मेरे अंदर आत्मविश्वास और आत्मनिर्भरता का संचार किया। आज मैं अपने पैरों पर खड़ी हूं और मेरा सपना है कि मैं अपने जैसे और भी कई महिलाओं को प्रेरित कर सकूं।”





