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Dantewada. दंतेवाड़ा। कलेक्टर देवेश कुमार ध्रुव की अध्यक्षता में शिक्षा विभाग एवं आदिवासी विकास विभाग के अंतर्गत संचालित पोटाकेबिन, आश्रम एवं छात्रावासों के अधीक्षकों की संयुक्त समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक में नवीन शैक्षणिक सत्र 2026-27 की तैयारियों, विद्यार्थियों के स्वास्थ्य, सुरक्षा, शिक्षा, स्वच्छता, भोजन व्यवस्था तथा मानसिक स्वास्थ्य सहित विभिन्न महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तार से चर्चा की गई। बैठक में कलेक्टर ध्रुव ने कहा कि आवासीय संस्थाओं में अध्ययनरत बच्चों की सुरक्षा, स्वास्थ्य और सर्वांगीण विकास सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने निर्देश दिए कि किसी भी बच्चे को संस्था में प्रवेश देने से पूर्व उसका अनिवार्य स्वास्थ्य परीक्षण कराया जाए तथा स्वास्थ्य संबंधी सभी जानकारियां नियमित रूप से अभिलेखों में संधारित की जाएं। उन्होंने स्पष्ट किया कि प्रत्येक पोटाकेबिन, आश्रम एवं छात्रावास में प्रतिमाह सभी विद्यार्थियों का स्वास्थ्य परीक्षण किया जाना अनिवार्य होगा तथा कोई भी बच्चा स्वास्थ्य जांच से वंचित नहीं रहना चाहिए।
कलेक्टर ने जिला शिक्षा अधिकारी को मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी के साथ समन्वय स्थापित कर सभी पोटाकेबिन एवं आश्रम-छात्रावासों में नियमित स्वास्थ्य शिविर एवं मलेरिया जांच सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि वर्षा ऋतु को देखते हुए मलेरिया, डेंगू एवं अन्य मौसमी बीमारियों की रोकथाम के लिए विशेष सतर्कता बरती जाए। विद्यार्थियों को उबला हुआ एवं स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराया जाए तथा उनकी संख्या के अनुरूप 24 घंटे के लिए पर्याप्त मात्रा में उबला पानी उपलब्ध रखा जाए। बैठक में संस्थाओं की साफ-सफाई व्यवस्था की समीक्षा करते हुए कलेक्टर ने निर्देशित किया कि प्रत्येक सप्ताह कम से कम एक दिन निर्धारित समय पर सभी छात्रावासों एवं पोटाकेबिनों में विशेष स्वच्छता अभियान चलाया जाए। परिसर, आवासीय कक्ष, शौचालय, स्नानागार, रसोईघर तथा भोजन कक्ष की नियमित सफाई सुनिश्चित की जाए। मानसून के दौरान मच्छरों की रोकथाम हेतु खिड़कियों में जाली, मच्छरदानी की व्यवस्था, नालियों में डी.डी.टी. का छिड़काव तथा पेयजल स्रोतों का क्लोरीनेशन करने के निर्देश भी दिए गए।
भोजन व्यवस्था की समीक्षा के दौरान कलेक्टर ध्रुव ने कहा कि बच्चों को पौष्टिक एवं गुणवत्तायुक्त भोजन उपलब्ध कराना अधीक्षकों की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है। उन्होंने सभी अधीक्षकों को समय-समय पर बच्चों के साथ बैठकर भोजन करने तथा भोजन की गुणवत्ता की स्वयं निगरानी करने के निर्देश दिए, ताकि बच्चों को दिए जा रहे भोजन की वास्तविक स्थिति का आकलन किया जा सके। रसोईघर की साफ-सफाई, खाद्य सामग्री के सुरक्षित भंडारण तथा भोजन तैयार करने की प्रक्रिया में स्वच्छता के सभी मानकों का पालन सुनिश्चित करने पर भी जोर दिया गया।
बैठक में बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य पर विशेष चर्चा करते हुए कलेक्टर ने कहा कि विद्यार्थियों का मानसिक रूप से स्वस्थ एवं आत्मविश्वासी होना उतना ही महत्वपूर्ण है जितना उनका शारीरिक स्वास्थ्य। उन्होंने संस्थाओं में नियमित रूप से परामर्श सत्र, प्रेरणात्मक गतिविधियां, खेलकूद, सांस्कृतिक कार्यक्रम, योग एवं ध्यान जैसी गतिविधियों का आयोजन करने के निर्देश दिए। विद्यार्थियों की समस्याओं को संवेदनशीलता के साथ सुनने तथा तनाव, भय अथवा अन्य मानसिक परेशानियों से जूझ रहे बच्चों को आवश्यक परामर्श एवं सहयोग उपलब्ध कराने पर जोर दिया गया। उन्होंने कहा कि मानसिक स्वास्थ्य से संबंधित गतिविधियों का प्रतिवेदन प्रत्येक शुक्रवार प्रातः 11 बजे तक अनिवार्य रूप से प्रस्तुत किया जाए।
नशा मुक्ति के विषय पर कलेक्टर ने कहा कि विद्यार्थियों को किसी भी प्रकार के नशे से दूर रखना सभी अधीक्षकों और शिक्षकों की सामूहिक जिम्मेदारी है। उन्होंने संस्थाओं में नियमित जागरूकता कार्यक्रम, संवाद सत्र एवं प्रेरक गतिविधियों के माध्यम से बच्चों को नशे के दुष्प्रभावों के बारे में जानकारी देने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि बच्चों में सकारात्मक सोच, अनुशासन, खेल एवं रचनात्मक गतिविधियों को बढ़ावा देकर उन्हें नशे जैसी बुराइयों से दूर रखा जा सकता है। यदि किसी विद्यार्थी में नशे की प्रवृत्ति या उससे संबंधित कोई संकेत दिखाई दे तो तत्काल परामर्श एवं आवश्यक सहायता उपलब्ध कराई जाए।
बैठक में छात्रावासों एवं आश्रमों की सुरक्षा व्यवस्था, कन्या छात्रावासों में सुरक्षा उपाय, विद्युत व्यवस्था, रिक्त भूमि पर पौधरोपण, शिष्यवृत्ति राशि के नियमानुसार उपयोग, मरम्मत एवं निर्माण कार्यों की प्रगति, चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों के दायित्व, अधीक्षकों के मुख्यालय में निवास तथा मंडल संयोजकों द्वारा संस्थाओं के नियमित निरीक्षण सहित विभिन्न विषयों पर भी विस्तार से चर्चा की गई। कलेक्टर ध्रुव ने सभी अधीक्षकों को शासन के निर्देशों के अनुरूप नवीन शैक्षणिक सत्र 2026-27 के लिए आवश्यक तैयारियां समय पर पूर्ण करने तथा विद्यार्थियों को सुरक्षित, स्वच्छ, अनुशासित एवं गुणवत्तापूर्ण शैक्षणिक वातावरण उपलब्ध कराने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि बच्चों के हितों से जुड़े किसी भी विषय में लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी तथा सभी संस्थाओं की नियमित समीक्षा की जाएगी। बैठक दौरान जिला शिक्षा अधिकारी प्रमोद ठाकुर,आदिवासी विकास विभाग सहायक आयुक्त राजीव नाग, डीएमसी हरीश गौतम सहित सभी पोटाकेबिन एवं आश्रम-छात्रावासों के अधीक्षक तथा अन्य अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित थे।
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