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Raipur. रायपुर। छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में बच्चों को उनके कानूनी अधिकारों, व्यक्तिगत सुरक्षा और लैंगिक अपराधों से बचाव के प्रति जागरूक करने के उद्देश्य से 'न्याय सबके लिए–सुरक्षित बचपन अभियान' के तहत विभिन्न विद्यालयों में विधिक जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए गए। राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण (NALSA), नई दिल्ली के निर्देशानुसार चलाए जा रहे इस अभियान के अंतर्गत बुधवार, 28 अक्टूबर 2026 को जिले के अलग-अलग स्कूलों में न्यायाधीशों ने विद्यार्थियों से संवाद किया। इस दौरान बच्चों को पॉक्सो एक्ट, अच्छे और बुरे स्पर्श की पहचान, ऑनलाइन सुरक्षा, साइबर अपराधों से बचाव और निःशुल्क कानूनी सहायता के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई।
10 अक्टूबर से शुरू हुआ सुरक्षित बचपन अभियान
राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण, नई दिल्ली के कार्यपालक अध्यक्ष द्वारा 10 अक्टूबर 2026 को लैंगिक अपराधों से बालकों का संरक्षण अधिनियम, 2012 (पॉक्सो एक्ट) के संबंध में अखिल भारतीय विद्यालय जागरूकता अभियान 'सुरक्षित बचपन अभियान' का शुभारंभ किया गया था। इस अभियान का मुख्य उद्देश्य स्कूली बच्चों को उनके अधिकारों के प्रति जागरूक करना और उन्हें किसी भी प्रकार के शोषण या अनुचित व्यवहार से बचने के उपाय बताना है। इसके तहत विद्यार्थियों को व्यक्तिगत सुरक्षा, ऑनलाइन सुरक्षा, शिकायत दर्ज कराने की प्रक्रिया और बाल संरक्षण से संबंधित उपलब्ध सुविधाओं के बारे में जानकारी दी जा रही है।
जिला एवं सत्र न्यायाधीश के निर्देशन में गठित हुई समिति
रायपुर जिले में अभियान के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश तथा जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के अध्यक्ष बलराम प्रसाद वर्मा ने विशेष पहल की है। उनके मार्गदर्शन में जिला स्तरीय समन्वय समिति का गठन किया गया है, ताकि अभियान के तहत विभिन्न विद्यालयों में जागरूकता कार्यक्रमों का व्यवस्थित आयोजन किया जा सके। समिति के माध्यम से बच्चों तक कानूनी जानकारी पहुंचाने और उन्हें उनके अधिकारों के प्रति जागरूक करने का प्रयास किया जा रहा है।
रायपुर के तीन स्कूलों में न्यायाधीशों ने बच्चों को किया जागरूक
28 अक्टूबर 2026 को रायपुर जिले के विभिन्न विद्यालयों में न्यायाधीशों द्वारा विधिक जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए गए। इनमें प्राइवेट चैम्पियन इंग्लिश स्कूल, अमशिवनी, स्वामी आत्मानंद उत्कृष्ट हिंदी माध्यम विद्यालय, प्रोफेसर जय नारायण पांडेय, नलघर चौक तथा द्रोणाचार्य पब्लिक स्कूल, न्यू राजेंद्र नगर शामिल रहे। कार्यक्रमों में विद्यार्थियों को उनके कानूनी अधिकारों और सुरक्षा से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारी दी गई। न्यायाधीशों ने बच्चों को समझाया कि किसी भी प्रकार के शोषण, धमकी या अनुचित व्यवहार की स्थिति में चुप रहने के बजाय सहायता मांगनी चाहिए।
अच्छे-बुरे स्पर्श और पॉक्सो एक्ट की दी जानकारी
कार्यक्रमों के दौरान विद्यार्थियों को पॉक्सो अधिनियम, 2012 के प्रमुख प्रावधानों के बारे में बताया गया। बच्चों को अच्छे और बुरे स्पर्श की पहचान करने, असहज महसूस होने पर तुरंत प्रतिक्रिया देने और किसी विश्वसनीय वयस्क को घटना की जानकारी देने के लिए प्रेरित किया गया। इसके साथ ही बताया गया कि बच्चों के खिलाफ लैंगिक अपराधों की रोकथाम और उनकी सुरक्षा के लिए कानूनी प्रावधान मौजूद हैं। विद्यार्थियों को यह भी समझाया गया कि किसी भी अनुचित घटना के लिए सहायता मांगना उनका अधिकार है और उन्हें डर या संकोच के कारण चुप नहीं रहना चाहिए।
ऑनलाइन ठगी और साइबर अपराधों से बचने के बताए उपाय
विधिक जागरूकता कार्यक्रमों में ऑनलाइन सुरक्षा पर भी विशेष जोर दिया गया। विद्यार्थियों को सोशल मीडिया के सुरक्षित इस्तेमाल, अनजान लोगों से ऑनलाइन बातचीत में सावधानी बरतने और व्यक्तिगत जानकारी साझा करने से होने वाले खतरों के बारे में समझाया गया। साथ ही साइबर अपराधों, ऑनलाइन उत्पीड़न और संदिग्ध गतिविधियों की शिकायत करने की प्रक्रिया के संबंध में जानकारी दी गई।
निःशुल्क कानूनी सहायता के लिए हेल्पलाइन 15100 की जानकारी
कार्यक्रम के दौरान राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण की टोल-फ्री हेल्पलाइन 15100 के बारे में भी विद्यार्थियों को जागरूक किया गया। बताया गया कि पात्र व्यक्तियों को निःशुल्क विधिक सहायता उपलब्ध कराने में विधिक सेवा प्राधिकरण की महत्वपूर्ण भूमिका है। किसी भी कानूनी परेशानी या शोषण की स्थिति में संबंधित विधिक सेवा प्राधिकरण से संपर्क कर सहायता प्राप्त की जा सकती है।
पैरालीगल वॉलंटियर्स ने निभाई महत्वपूर्ण भूमिका
इन जागरूकता कार्यक्रमों के सफल आयोजन में पैरालीगल वॉलंटियर्स यानी अधिकार मित्रों का भी विशेष सहयोग रहा। लोमीन साहू, सुप्रभात हलदार, सहदेव नेताम और शशि ने विभिन्न विद्यालयों में उपस्थित रहकर कार्यक्रमों के संचालन और विद्यार्थियों को जागरूक करने में सहयोग प्रदान किया। जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की इस पहल का उद्देश्य बच्चों को उनके अधिकारों की जानकारी देकर उन्हें सुरक्षित, जागरूक और आत्मविश्वासी बनाना है। अभियान के माध्यम से विद्यार्थियों को यह संदेश दिया गया कि किसी भी प्रकार के शोषण या कानूनी समस्या की स्थिति में सहायता के रास्ते उपलब्ध हैं।
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