छत्तीसगढ़

हाईवे पर नहीं बन सकेगा ग्रामीण श्रेणी का पेट्रोल पंप: बिलासपुर हाईकोर्ट

Shantanu Roy
11 July 2026 3:35 PM IST
हाईवे पर नहीं बन सकेगा ग्रामीण श्रेणी का पेट्रोल पंप: बिलासपुर हाईकोर्ट
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Bilaspur. बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने पेट्रोल पंप डीलरशिप से जुड़े एक महत्वपूर्ण मामले में स्पष्ट किया है कि तेल कंपनियों की नीति के अनुसार राष्ट्रीय राजमार्ग या राज्य राजमार्ग पर ग्रामीण श्रेणी (Rural Category) का रिटेल आउटलेट स्थापित नहीं किया जा सकता। अदालत ने हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (HPCL) द्वारा जारी आशय पत्र (LOI) को निरस्त करने के फैसले को सही ठहराया है। हालांकि, जांच प्रक्रिया में हुई देरी और अधिकारियों की लापरवाही को देखते हुए हाईकोर्ट ने महिला आवेदक को आर्थिक नुकसान की भरपाई के लिए 1 लाख रुपये मुआवजा देने का आदेश दिया है।
मामला पेट्रोल पंप डीलरशिप के लिए जारी विज्ञापन और उसके बाद की प्रक्रिया से जुड़ा हुआ है। जानकारी के अनुसार, हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (HPCL) ने 14 दिसंबर 2018 को छत्तीसगढ़ में ग्रामीण श्रेणी के पेट्रोल पंप डीलरशिप के लिए विज्ञापन जारी किया था। इस विज्ञापन के आधार पर याचिकाकर्ता अनंता चौधरी ने ओपन कैटेगरी में आवेदन किया था। आवेदन के दौरान उन्होंने सरायपाली-पदमपुर मार्ग स्थित ग्राम नवागांव की खसरा नंबर 339/1 की भूमि को पेट्रोल पंप स्थापना के लिए प्रस्तावित किया था। कंपनी द्वारा आवेदन पत्र, दस्तावेजों और जमीन की जांच की गई। इसके बाद स्थल निरीक्षण भी कराया गया। सभी प्रक्रिया पूरी होने के बाद HPCL ने 29 दिसंबर 2020 को अनंता चौधरी के पक्ष में आशय पत्र (Letter of Intent) जारी कर दिया।
एलओआई जारी होने के बाद महिला आवेदक ने पेट्रोल पंप स्थापना की प्रक्रिया शुरू कर दी। उन्होंने कंपनी के निर्देशानुसार सुरक्षा जमा राशि के रूप में 5 लाख रुपये और 3.60 लाख रुपये की डिमांड ड्राफ्ट राशि जमा की। इसके अलावा उन्होंने जिला कलेक्टर से आवश्यक अनापत्ति प्रमाण पत्र (NOC) प्राप्त किया। जमीन का सीमांकन कराया गया और बैंक से ऋण लेकर निर्माण कार्य शुरू कर दिया गया। पेट्रोल पंप शुरू करने की तैयारी अंतिम चरण में पहुंच चुकी थी। भूमि पर आवश्यक निर्माण कार्य कराया गया और बिजली सुविधा के लिए ट्रांसफार्मर तक स्थापित कर दिया गया था। महिला आवेदक ने इस परियोजना में काफी धनराशि खर्च कर दी थी। लेकिन इसी बीच कंपनी की ओर से एक नया नोटिस जारी कर दिया गया, जिससे पूरा मामला बदल गया।
HPCL ने 31 दिसंबर 2021 को नोटिस जारी कर पूछा कि प्रस्तावित भूमि राज्य राजमार्ग-16 पर स्थित होने के बावजूद ग्रामीण श्रेणी के तहत आवेदन कैसे किया गया। कंपनी ने भूमि की श्रेणी और स्थान को लेकर स्पष्टीकरण मांगा। महिला आवेदक ने जवाब देते हुए कहा कि संबंधित जमीन ग्रामीण क्षेत्र में स्थित है और इसलिए उनका आवेदन सही है। हालांकि, HPCL ने इस जवाब को स्वीकार नहीं किया। कंपनी की जांच में पाया गया कि प्रस्तावित भूमि राज्य राजमार्ग-16 पर स्थित है। डीलर चयन नीति के अनुसार ग्रामीण श्रेणी के पेट्रोल पंप राष्ट्रीय राजमार्ग, राज्य राजमार्ग, एक्सप्रेसवे या नगर निकाय क्षेत्रों में स्थापित नहीं किए जा सकते। इसी आधार पर कंपनी ने 1 फरवरी 2022 को जारी आशय पत्र (LOI) निरस्त कर दिया और जमा की गई राशि वापस कर दी।
इसके बाद महिला आवेदक ने HPCL के इस फैसले को चुनौती देते हुए छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में याचिका दायर की। सुनवाई के दौरान कंपनी की ओर से तर्क दिया गया कि पेट्रोल पंप डीलर चयन के लिए निर्धारित दिशा-निर्देशों का पालन करना अनिवार्य है। यदि कोई भूमि निर्धारित श्रेणी के अनुरूप नहीं है तो वहां पेट्रोल पंप स्थापना की अनुमति नहीं दी जा सकती। हाईकोर्ट ने HPCL के इस तर्क को स्वीकार करते हुए कहा कि नियमों के विपरीत जाकर किसी पेट्रोल पंप की स्थापना का आदेश नहीं दिया जा सकता। अदालत ने माना कि ग्रामीण श्रेणी के लिए निर्धारित नियमों के अनुसार राज्य राजमार्ग पर रिटेल आउटलेट स्थापित करना संभव नहीं है। इसलिए HPCL द्वारा एलओआई निरस्त करने का निर्णय उचित और नियमों के अनुरूप है।
हालांकि, अदालत ने कंपनी की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए। हाईकोर्ट ने कहा कि यदि प्रारंभिक जांच के दौरान ही भूमि की वास्तविक स्थिति की सही जानकारी जुटा ली जाती तो महिला आवेदक को इतना आर्थिक नुकसान और मानसिक परेशानी नहीं उठानी पड़ती। कंपनी की ओर से जांच प्रक्रिया में हुई देरी और लापरवाही को देखते हुए अदालत ने मुआवजा देने का निर्देश दिया। हाईकोर्ट ने HPCL को आदेश दिया कि वह महिला आवेदक अनंता चौधरी को 1 लाख रुपये का मुआवजा प्रदान करे। अदालत का यह फैसला उन मामलों में महत्वपूर्ण माना जा रहा है, जहां सरकारी या सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों की जांच प्रक्रिया में देरी के कारण आम लोगों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता है। इस फैसले से जहां पेट्रोल पंप स्थापना के नियमों को लेकर स्थिति स्पष्ट हुई है, वहीं कंपनियों को भी आवेदन प्रक्रिया के शुरुआती चरण में सावधानीपूर्वक जांच करने का संदेश मिला है।
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