छत्तीसगढ़
जल संसाधन विभाग में 5,576 करोड़ का निविदा घोटाला !
jantaserishta.com
29 Oct 2026 11:46 AM IST

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संस्था की हिस्सेदारी में हेरफेर कर सरकार को बदनाम करने के लिए किया जा रहा बड़ा घपला
फर्जी अनुभव प्रमाण-पत्र के दम पर 2,524 करोड़ का काम, दिलीप बिल्डकॉन का एग्रीमेंट रुका
जल संसाधान विभाग बिलासपुर, रायपुर, जगदलपुर, अंबिकापुर संभाग के सभी प्रमुख अधिकारी दबाव में
सरकार को बदनाम करने का नया कारनामा टेंडर घोटाला करने का प्रयास
प्रमुख अभियंता अपनी जाति के आधार पर विभाग में खुलकर कर रहे दादागिरी, पूर्व में किए गए बिलासपुर के घोटाले भी खुलेंगे
जल संसाधान विभाग में भ्रष्टाचार चरम सीमा पर भ्रष्ट अधिकारी मलाईदार जगह पर पोस्टिंग
अयोग्य और आरोपी भ्रष्ट अधिकारी को दबाव में डालकर अपने लिए दलाली करा रहे भ्रष्ट वरिष्ठ अधिकारी
रायपुर (जसेरि)। जल संसाधन विभाग में घोटाले दर -घोटाले के बाद महाघोटाले का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। जल संसाधन विभाग के प्रमुख अभियंता से कार्यपालन अभियंता की कथित मिलीभगत से सरकार की साख पर बट्टा लगाने का मामला सामने आया है। ताजा निविदाओं को अन्य ठेकेदारों ने तीनों मेगा-निविदाएं निरस्त कर पुन: आमंत्रित करने की मांग की । जल संसाधन विभाग में 5,576 करोड़ का निविदा महाघोटाला में अपने चहेते बिल्डर को दिलीप बिल्डकॉन को 2,524 करोड़ का काम सौंप दिया है। जिसे लेकर विभाग सहित ठेकेदारों में असंतोष पनप रहा है।
छत्तीसगढ़ सरकार जहां प्रदेश के किसानों के खेतों तक पानी पहुंचाने और सिंचाई क्षमता बढ़ाने के लिए हज़ारों करोड़ रुपये की योजनाएं ला रही है, वहीं जल संसाधन विभाग के भीतर बैठे कुछ अधिकारी इन्हीं जनहितकारी योजनाओं को अपने निजी लाभ का माध्यम बनाने में जुटे दिखाई दे रहे हैं। विभाग की तीन मेगा-निविदाओं- सिकासार-कोडार रिज़र्वायर लिंक कैनाल (पाइपलाइन), मटनार-देउरगांव उद्वहन बैराज और मोहमेला-सिरपुर बैराज- में पात्रता-शर्तों, मूल्यांकन-प्रक्रिया और अनुभव-प्रमाण-पत्रों से जुड़ी ऐसी गंभीर विसंगतियां हैं, जो पूरी निविदा-प्रक्रिया की शुचिता, पारदर्शिता और वैधानिकता पर सीधा प्रश्नचिह्न लगाती हैं।
तीनों निविदाओं की रु-1 राशि लगभग 4,726 करोड़ है, और 18त्न जीएसटी जोड़ने पर यह आंकड़ा लगभग 5,576 करोड़ तक पहुंचता है। यह जनता के खून-पसीने की कमाई से बना सरकारी खज़ाना है। प्रश्न यह है कि क्या विभागीय अधिकारी नियम-कायदों को ताक पर रखकर इतनी बड़ी राशि अपात्र एजेंसियों के हवाले करने का रास्ता तैयार कर रहे हैं — और इसका ठीकरा अंतत: सरकार के सिर फोड़ने की ज़मीन तैयार कर रहे हैं?
सबसे बड़ा खुलासा: जिस प्रमाण-पत्र पर काम मिला, वह अब उसी रूप में अस्तित्व में ही नहीं निविदा सिस्टम क्रमांक 190885 | NIT 01/SAC/2026-27, दिनांक 13.05.2026 | अनुमानित लागत 2,549.86 करोड़ गरियाबंद जिले की पैरी परियोजना के अंतर्गत सिकासार जलाशय से कोडार जलाशय तक लिंक नहर (पाइपलाइन) का यह कार्य इन तीनों निविदाओं में सबसे बड़ा है। इसमें मेसर्स दिलीप बिल्डकॉन लिमिटेड, भोपाल 2,524.32 करोड़ की दर के साथ L-1 घोषित हुई, जबकि एनसीसी लिमिटेड 2,600.86 करोड़ के साथ L-2 रही। विभाग के अनुमोदन-प्रस्ताव में समिति ने साफ़ दर्ज किया कि L-1 बिडर तकनीकी एवं वित्तीय पात्रता पूरी करता है — हाँ।
लेकिन यह हाँ किस आधार पर कहा गया? दस्तावेज़ बताते हैं कि दिलीप बिल्डकॉन ने समान प्रकृति के कार्य-अनुभव के रूप में मध्यप्रदेश जल निगम मर्यादित, PIU नीमच का गांधी सागर-2 बहु-ग्रामीण जल प्रदाय योजना (ज़िला मंदसौर एवं नीमच) का प्रमाण- पत्र लगाया था। विभाग के अपने अनुमोदन-प्रस्ताव में शिकायत क्रमांक 02 के रूप में दर्ज है कि यह प्रमाण-पत्र जॉइंट वेंचर (65:35) से जुड़ा है और निविदा में निर्धारित अर्हता के अनुसार पूर्णत: सही नहीं है। इसके बावजूद प्रमुख अभियंता कार्यालय ने पत्र क्रमांक 6121 दिनांक 21.07.2026 द्वारा नीमच से सत्यापन मंगवाया, और महज़ एक दिन में — 22.07.2026 को — सत्यापन मिलते ही शिकायत को खारिज कर दिया गया। अब असली विस्फोट। म.प्र. जल निगम मर्यादित, क्कढ्ढ नीमच के जनरल मैनेजर ने पत्र क्रमांक 30442/2026/MPJNM/PIU दिनांक 01.09.2026 द्वारा Amendment of Letter शीर्षक से संशोधित प्रमाण-पत्र जारी किया है। इस संशोधित प्रमाण-पत्र में स्पष्ट लिखा है कि यह कार्य “Dilip Buildcon Ltd., Bhopal & Skyway Infraprojects Pvt. Ltd., Mumbai — DBL-SIPL (JV)” को मिला था, जिसमें DBL का हिस्सा केवल 65% और SIPL का हिस्सा 35% है। यही बात मध्यप्रदेश जल निगम के साथ हुए मूल अनुबंध (अनुबंध क्रमांक 21/2022-23, दिनांक
17.08.2022) के ई-स्टाप दस्तावेज़ में भी दर्ज है, जिसमें द्वितीय पक्ष स्पष्ट रूप से “Dilip
Buildcon Ltd – Skyway Infraprojects Pvt. Ltd. (Joint Venture)” है। यानी जिस प्रमाण-पत्र को विभाग ने दिलीप बिल्डकॉन के 100% स्वतंत्र स्वतंत्र अनुभव के रूप में मानकर उसे पात्र किया, वह प्रमाण-पत्र उस रूप में आज अस्तित्व में ही नहीं है। जारीकर्ता संस्था ने स्वयं उसे संशोधित कर 65% हिस्सेदारी पर ला दिया है। जिस नींव पर 2,524 करोड़ की इमारत खड़ी की गई, वह नींव ही खिसक चुकी है।
17.08.2022) के ई-स्टाप दस्तावेज़ में भी दर्ज है, जिसमें द्वितीय पक्ष स्पष्ट रूप से “Dilip
Buildcon Ltd – Skyway Infraprojects Pvt. Ltd. (Joint Venture)” है। यानी जिस प्रमाण-पत्र को विभाग ने दिलीप बिल्डकॉन के 100% स्वतंत्र स्वतंत्र अनुभव के रूप में मानकर उसे पात्र किया, वह प्रमाण-पत्र उस रूप में आज अस्तित्व में ही नहीं है। जारीकर्ता संस्था ने स्वयं उसे संशोधित कर 65% हिस्सेदारी पर ला दिया है। जिस नींव पर 2,524 करोड़ की इमारत खड़ी की गई, वह नींव ही खिसक चुकी है।
प्रमुख अभियंता से कार्यपालन अभियंता तक की कथित मिलीभगत से सरकार की साख पर बट्टा लगाने की कोशिश, तीनों मेगा-निविदाएं निरस्त करने के लिए लगाई याचिका निरस्त अब सुप्रीम कोर्ट जाने की तैयारी में, विरोधी पक्ष स्पष्ट रूप से अपने प्रमाण के सहित ये कहने से भी नहीं चुकते कि भारतीय जनता पार्टी की सरकार को बदनाम करने की साजिश एक वरिष्ठ मुस्लिम भ्रष्ट अधिकारी द्वारा जानबूझकर किया जा रहा है। छत्तीसगढ़ प्रदेश के अधिकांश विभागीय अधिकारी प्रमुख अभियंता के दबाव और अधीन में मनमाना काम करने के लिए विशेष रूप से मजबूर किया जा रहा है। शासकीय दस्तावेज में हेरफेर और सबूतों को लिपापोती किए जाने की खबर है। भ्रष्ट अधिकारी का इतना डर और दबाव है कि विरोधी पक्ष जो शिकायतकर्ता है वह हाईकोर्ट के बाद सुप्रीम कोर्ट जाने से भी डर रहा है।
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