छत्तीसगढ़
ट्रेडिंग कंपनी में 50 लाख की हेराफेरी, महिला कर्मचारी समेत 3 पर FIR दर्ज
Shantanu Roy
26 Oct 2026 4:10 PM IST

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Ambikapur. अंबिकापुर। छत्तीसगढ़ के अंबिकापुर में एक ट्रेडिंग कंपनी से फर्जी बिल्टी और नगदी रसीद तैयार कर 50 लाख रुपए से अधिक के सामान की हेराफेरी का मामला सामने आया है। आरोप है कि कंपनी में कार्यरत बिलिंग ऑपरेटर ने पूर्व कर्मचारी के साथ मिलकर फर्जी सील और नगदी रसीद तैयार की और पिछले चार महीनों से कंपनी का सामान निकालकर दूसरे गोदाम में पहुंचाया। इसके बाद सामान की अलग-अलग दुकानों में सप्लाई की जा रही थी। मामले का खुलासा होने के बाद कंपनी संचालक ने कोतवाली थाने में शिकायत दर्ज कराई है। पुलिस ने तीन आरोपियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
फर्जी बिल्टी बनाकर कंपनी को लगाया लाखों का चूना
जानकारी के अनुसार, अंबिकापुर के देवीगंज रोड निवासी कान्हा अग्रवाल की खरसिया नाका क्षेत्र में अग्रवाल ट्रेडिंग कंपनी संचालित है। कंपनी में अंजुम निशा पिछले छह वर्षों से बिलिंग ऑपरेटर के पद पर कार्यरत थी। वहीं रविंद्र यादव उर्फ विक्की भी पहले इसी कंपनी में काम करता था। करीब छह महीने पहले कंपनी संचालक ने उसे नौकरी से निकाल दिया था। आरोप है कि नौकरी से निकाले जाने के बाद रविंद्र यादव ने कंपनी की बिलिंग ऑपरेटर अंजुम निशा के साथ मिलकर सामान की हेराफेरी शुरू कर दी। इसके लिए कंपनी की फर्जी सील बनवाने और नकली नगदी रसीद तैयार करने का आरोप लगाया गया है।
चार महीने तक चलता रहा हेराफेरी का खेल
शिकायत के मुताबिक, आरोपियों ने पिछले चार महीने के दौरान फर्जी नगदी रसीद के जरिए कंपनी से बड़ी मात्रा में सामान निकाला। बताया जा रहा है कि कंपनी से सामान निकालने के लिए पिकअप और अन्य मालवाहक वाहनों का इस्तेमाल किया जाता था। फर्जी रसीदों के आधार पर सामान कंपनी से बाहर भेज दिया जाता था। इस तरह लगातार सामान निकाले जाने के बावजूद शुरुआती दिनों में कंपनी संचालक को इसकी जानकारी नहीं मिल सकी। आरोप है कि इस पूरी प्रक्रिया में कंपनी की बिलिंग व्यवस्था और दस्तावेजों का दुरुपयोग किया गया।
गंगापुर में अलग गोदाम बनाकर करते थे सप्लाई
मामले में यह भी सामने आया है कि कंपनी से निकाले गए सामान को सीधे दुकानों तक पहुंचाने के बजाय गंगापुर स्थित एक अलग गोदाम में भेजा जाता था। आरोपियों ने वहां सामान रखने की व्यवस्था कर रखी थी। इसके बाद गोदाम से विभिन्न दुकानों में माल की सप्लाई की जाती थी। पुलिस अब इस बात की जांच कर रही है कि कंपनी से निकाले गए सामान की सप्लाई किन दुकानों में की गई और इसमें अन्य लोगों की भी कोई भूमिका थी या नहीं।
कर्मचारी ने संचालक को दी हेराफेरी की जानकारी
इस पूरे मामले का खुलासा 21 अक्टूबर को हुआ। कंपनी में काम करने वाले कर्मचारी सचिन टोप्पो ने संचालक कान्हा अग्रवाल को फर्जी नगदी रसीद के जरिए सामान निकाले जाने की जानकारी दी। जानकारी मिलने के बाद संचालक ने कंपनी के बिलिंग रिकॉर्ड, नगदी रसीदों और सामान के हिसाब की जांच शुरू की। रिकॉर्ड की जांच में पिछले चार महीने के दौरान बड़ी मात्रा में सामान की हेराफेरी होने की बात सामने आई। कंपनी संचालक के अनुसार, इस अवधि में 50 लाख रुपए से अधिक मूल्य का सामान निकाला गया था।
तीन आरोपियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज
कंपनी संचालक कान्हा अग्रवाल ने मामले की शिकायत कोतवाली थाने में दर्ज कराई। शिकायत के आधार पर पुलिस ने अंजुम निशा, रविंद्र यादव उर्फ विक्की और रूपेश यादव के खिलाफ अपराध दर्ज किया है। पुलिस ने तीनों आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धारा 316(4) और 3(5) के तहत मामला दर्ज कर विवेचना शुरू की है। पुलिस अब फर्जी बिल्टी, नगदी रसीद, कंपनी की कथित नकली सील और सामान के परिवहन से जुड़े दस्तावेजों की जांच कर रही है।
सामान की बरामदगी और लेन-देन की जांच
इस मामले में पुलिस के सामने सबसे बड़ी चुनौती हेराफेरी किए गए सामान का पता लगाना और उसके वितरण से जुड़े तथ्यों को स्पष्ट करना है। जांच में यह भी पता लगाया जाएगा कि चार महीने के दौरान कितनी बार सामान निकाला गया और उससे संबंधित आर्थिक लेन-देन किस तरह हुआ। फिलहाल तीन लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है। आरोपियों की गिरफ्तारी या सामान की बरामदगी के संबंध में आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है। पुलिस जांच के बाद ही पूरे मामले की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
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