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Durg. दुर्ग। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय और केन्द्रीय जल शक्ति मंत्री सी.आर. पाटिल की अध्यक्षता में राज्य के सभी जिलों के कलेक्टरों की वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक में “जल संचय जन भागीदारी 2.0” अभियान के क्रियान्वयन की प्रगति और प्रभावशीलता की समीक्षा की गई। मुख्यमंत्री और केंद्रीय मंत्री दोनों वर्चुअल माध्यम से जुड़े हुए थे। बैठक के दौरान बिलासपुर, दुर्ग और सूरजपुर जिलों के कलेक्टरों ने अपने-अपने जिलों में अभियान के अंतर्गत किए गए कार्यों और गतिविधियों की विस्तृत जानकारी प्रस्तुत की। कलेक्टर अभिजीत सिंह ने बताया कि पहले चरण में 5606 जल संरचनाओं के निर्माण से भू-जल स्तर में औसतन 4.18 मीटर वृद्धि हुई। उन्होंने कहा कि यह वृद्धि क्षेत्रीय जल संकट को कम करने और जल संरक्षण के महत्व को उजागर करने में मददगार साबित हुई है। जल संचय जन भागीदारी 2.0 के अंतर्गत, गंभीर जल संकट वाले क्षेत्रों का चिन्हांकन मनरेगा, आरईएस, जल संसाधन विभाग और लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग (पीएचई) के तकनीकी अमले द्वारा किया गया है। अभियान के तहत अब तक 18,225 रिचार्ज संरचनाओं का निर्माण किया जा चुका है, जिससे ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में जल स्तर में सुधार देखने को मिला है।
जनभागीदारी से जल संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए विभिन्न कार्यक्रम भी शुरू किए गए हैं। इनमें प्रमुख हैं:
“एकेच गोठ एकेच पानी” – स्थानीय पंचायतों और ग्रामीण समुदायों में जल संरक्षण की चर्चा।
“बुंद-बुंद बचाबो पानी” – जल संचय के महत्व पर जनसामूहिक अभियान।
“एक सोख्ता संतान के नाम” – जल संरचना निर्माण में बच्चों और युवाओं की भागीदारी।
“मोर गांव मोर पानी” – गांव स्तर पर जल प्रबंधन और जागरूकता कार्यक्रम।
केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सी.आर. पाटिल ने छत्तीसगढ़ में जल संरक्षण के क्षेत्र में हो रहे नवाचारों और कार्यों की सराहना करते हुए कहा कि यह मॉडल अन्य राज्यों के लिए उदाहरण प्रस्तुत करता है। उन्होंने सभी कलेक्टरों को निर्देश दिए कि मनरेगा के तहत प्राप्त राशि का पूर्ण और प्रभावी उपयोग सुनिश्चित किया जाए, ताकि हर गांव और शहर में जल संचय कार्य प्रभावी ढंग से सम्पन्न हो। बैठक के अंत में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि वे प्रत्येक जिले में जल संरचनाओं और रिचार्ज परियोजनाओं की निगरानी और रखरखाव सुनिश्चित करें। साथ ही जनता में जल संरक्षण के महत्व को लेकर निरंतर जागरूकता अभियान चलाना सुनिश्चित करें। राज्य में इस अभियान के सफल कार्यान्वयन से न केवल भू-जल स्तर में सुधार हुआ है, बल्कि ग्रामीण समुदायों में जल संरक्षण के प्रति सामाजिक जिम्मेदारी और जागरूकता भी बढ़ी है।
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