छत्तीसगढ़
राजस्व कार्य ठप: नायब तहसीलदार से मारपीट के विरोध में हड़ताल, 2000 से अधिक मामले प्रभावित
Shantanu Roy
3 Jun 2026 11:57 PM IST

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छग
Bilaspur. बिलासपुर। सरगुजा में पदस्थ नायब तहसीलदार के साथ कथित मारपीट की घटना के विरोध में छत्तीसगढ़ कनिष्ठ प्रशासनिक सेवा संघ द्वारा की जा रही कलमबंद हड़ताल का असर अब पूरे प्रदेश में स्पष्ट रूप से दिखाई देने लगा है। बिलासपुर जिले की 11 तहसीलों में राजस्व कार्य पूरी तरह से प्रभावित हो गए हैं, जिससे पिछले तीन दिनों में लगभग 2000 से अधिक मामलों की सुनवाई और प्रशासनिक कार्य बाधित हुए हैं। अकेले बिलासपुर तहसील में करीब 450 प्रकरणों की सुनवाई नहीं हो सकी है।
संघ के आंदोलन को छत्तीसगढ़ राजस्व पटवारी संघ और राज्य स्तरीय छात्रावास अधीक्षक संघ का भी समर्थन प्राप्त हो गया है। पटवारियों के आंदोलन में शामिल होने से जमीन संबंधी कार्य जैसे खाता विभाजन, सीमांकन, रिकॉर्ड दुरुस्ती और नामांतरण सहित जाति, आय, निवास एवं ईडब्ल्यूएस प्रमाण पत्र जारी करने की प्रक्रिया पर भी व्यापक असर पड़ा है।
नेहरू चौक स्थित तहसील कार्यालय सहित जिले के सभी तहसील कार्यालयों में हड़ताल के कारण सन्नाटा पसरा हुआ है। आम दिनों में जहां बड़ी संख्या में लोग अपने कार्यों के लिए पहुंचते हैं, वहीं अब अधिकांश न्यायालय और काउंटर बंद हैं। इससे आम नागरिकों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
बिलासपुर तहसील में प्रतिदिन लगभग 150 मामलों की सुनवाई विभिन्न राजस्व न्यायालयों में होती है। यहां तहसीलदार, अतिरिक्त तहसीलदार और नायब तहसीलदार स्तर पर कुल छह न्यायालय संचालित हैं। हड़ताल के कारण शुक्रवार, सोमवार और मंगलवार को करीब 450 मामलों की सुनवाई स्थगित करनी पड़ी। यदि यह आंदोलन लंबा चलता है तो लंबित मामलों की संख्या में और वृद्धि होने की संभावना है।
छत्तीसगढ़ कनिष्ठ प्रशासनिक सेवा संघ के पदाधिकारियों ने कहा कि राजस्व अधिकारी लगातार जनता की सेवा में कार्यरत रहते हैं, लेकिन भय और असुरक्षा के वातावरण में काम करना संभव नहीं है। संघ ने दोषियों की तत्काल गिरफ्तारी और कड़ी कार्रवाई की मांग करते हुए कहा है कि जब तक ठोस कदम नहीं उठाए जाते, तब तक कलमबंद हड़ताल जारी रहेगी।
संघ ने यह भी स्पष्ट किया कि यह आंदोलन केवल एक घटना के विरोध में नहीं है, बल्कि प्रशासनिक अधिकारियों की सुरक्षा और सम्मान से जुड़े व्यापक मुद्दों को लेकर है। इसमें सुरक्षा व्यवस्था, संसाधनों की कमी, स्टाफ की उपलब्धता और कार्यालयीन संरचना से जुड़े कई विषय भी शामिल हैं।
इधर, राज्य प्रशासनिक सेवा अधिकारी संघ ने भी इस मामले में कड़ा रुख अपनाया है। फिलहाल अधिकारी काली पट्टी बांधकर कार्य कर रहे हैं और विरोध दर्ज करा रहे हैं। संघ के प्रतिनिधियों ने कमिश्नर के माध्यम से मुख्यमंत्री और राज्यपाल के नाम ज्ञापन सौंपकर दोषियों पर तत्काल कार्रवाई की मांग की है। साथ ही चेतावनी दी गई है कि यदि जल्द कार्रवाई नहीं होती है तो 4 जून से राज्य प्रशासनिक सेवा अधिकारी भी हड़ताल पर चले जाएंगे। प्रदेश में चल रहे इस आंदोलन के कारण राजस्व व्यवस्था पर व्यापक असर देखा जा रहा है। तहसीलों में लंबित मामलों का बोझ लगातार बढ़ता जा रहा है और प्रमाण पत्र तथा जमीन संबंधी सेवाओं के लिए आम नागरिकों को लंबा इंतजार करना पड़ रहा है। प्रशासनिक अधिकारियों और कर्मचारी संगठनों के बीच वार्ता और समाधान की स्थिति फिलहाल स्पष्ट नहीं है। यदि जल्द कोई समझौता नहीं होता है तो आने वाले दिनों में स्थिति और गंभीर होने की आशंका जताई जा रही है।
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