छत्तीसगढ़

बर्खास्त कर्मचारी को राहत, विभागीय जांच की पूरी नोटशीट देने हाईकोर्ट का आदेश

Shantanu Roy
8 Sept 2026 2:41 PM IST
बर्खास्त कर्मचारी को राहत, विभागीय जांच की पूरी नोटशीट देने हाईकोर्ट का आदेश
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Bilaspur. बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में स्पष्ट किया है कि किसी कर्मचारी को अपने खिलाफ हुई विभागीय जांच और उसकी बर्खास्तगी का आधार बने दस्तावेज सूचना के अधिकार (RTI) के तहत मांगने का अधिकार है। खासतौर पर जब कर्मचारी इन दस्तावेजों का इस्तेमाल अपनी बर्खास्तगी के खिलाफ बचाव में करना चाहता हो, तब संबंधित विभाग सूचना देने से इनकार नहीं कर सकता। हाईकोर्ट ने बर्खास्त चालक को विभागीय जांच से संबंधित पूरी नोटशीट उपलब्ध कराने का निर्देश दिया है।
न्यायमूर्ति ए.के. प्रसाद की एकल पीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए लोक सूचना अधिकारी, प्रथम अपीलीय प्राधिकारी और छत्तीसगढ़ राज्य सूचना आयोग द्वारा सूचना देने से इनकार करने वाले आदेशों को निरस्त कर दिया। कोर्ट ने माना कि विभागीय जांच से संबंधित मांगे गए दस्तावेज ऐसी गोपनीय तीसरे पक्ष की सूचना नहीं हैं, जिन्हें सूचना का अधिकार अधिनियम के तहत उपलब्ध कराने से रोका जा सके। मामला जांजगीर-चांपा के फैमिली कोर्ट में चालक के पद पर कार्यरत अकरम खान से जुड़ा है। कर्मचारी के खिलाफ सात आरोपों को लेकर दो अलग-अलग विभागीय जांच शुरू की गई थीं। विभागीय जांच की प्रक्रिया पूरी होने के बाद फैमिली कोर्ट के प्रधान न्यायाधीश ने 5 जनवरी 2021 को उसकी सेवाएं समाप्त करने का आदेश जारी कर दिया था।
बर्खास्तगी की कार्रवाई के बाद कर्मचारी ने हाईकोर्ट का रुख किया और अपनी सेवाएं समाप्त करने के आदेश को चुनौती दी। इसी दौरान उसने विभागीय जांच से संबंधित दस्तावेज भी मांगे, ताकि वह अपने खिलाफ की गई कार्रवाई को समझ सके और न्यायिक कार्यवाही में अपना प्रभावी बचाव कर सके। कर्मचारी द्वारा सूचना के अधिकार के तहत विभागीय जांच से जुड़ी जानकारी मांगने पर संबंधित अधिकारियों ने उसे उपलब्ध कराने से इनकार कर दिया। अधिकारियों ने इसके लिए आरटीआई अधिनियम की धारा 8(1)(सी) और 8(1)(जे) का हवाला दिया। इसके बाद कर्मचारी ने प्रथम अपीलीय प्राधिकारी के समक्ष अपील की, लेकिन वहां से भी उसे राहत नहीं मिली।
मामला आगे छत्तीसगढ़ राज्य सूचना आयोग पहुंचा। आयोग ने भी सूचना उपलब्ध कराने से इनकार करने वाले अधिकारियों के पक्ष को बरकरार रखा। इसके बाद कर्मचारी ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर इन सभी आदेशों को चुनौती दी। हाईकोर्ट ने मामले की सुनवाई के दौरान कहा कि कर्मचारी द्वारा मांगे गए दस्तावेज उसकी अपनी विभागीय जांच और बर्खास्तगी की कार्रवाई से सीधे तौर पर जुड़े हैं। ऐसे दस्तावेजों को केवल गोपनीयता का हवाला देकर रोका नहीं जा सकता। कोर्ट ने यह भी माना कि जब कर्मचारी इन दस्तावेजों को अपने बचाव के लिए मांग रहा है, तो उन्हें उपलब्ध कराने से इनकार करना उचित नहीं है। अदालत ने अधिकारियों द्वारा आरटीआई अधिनियम की धारा 8(1)(सी) और 8(1)(जे) के इस्तेमाल को मामले की परिस्थितियों में उचित नहीं माना। कोर्ट ने कहा कि मांगी गई सूचना ऐसी गोपनीय तीसरे पक्ष की जानकारी नहीं है, जिसे कानून के तहत सामान्य तौर पर सार्वजनिक किए जाने से छूट प्राप्त हो।
हाईकोर्ट ने लोक सूचना अधिकारी, प्रथम अपीलीय प्राधिकारी और राज्य सूचना आयोग के आदेशों को कानून के विपरीत मानते हुए रद्द कर दिया। साथ ही संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिया कि कर्मचारी को विभागीय जांच से जुड़ी पूरी नोटशीट उपलब्ध कराई जाए। यह फैसला कर्मचारियों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि इससे यह स्पष्ट होता है कि विभागीय जांच या सेवा समाप्ति जैसी कार्रवाई का सामना कर रहे कर्मचारी अपने बचाव के लिए संबंधित रिकॉर्ड और दस्तावेज आरटीआई के माध्यम से मांग सकते हैं। विभाग केवल सामान्य रूप से गोपनीयता का हवाला देकर ऐसी जानकारी देने से इनकार नहीं कर सकता, यदि वह सूचना कर्मचारी की अपनी विभागीय कार्रवाई से संबंधित हो।
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