छत्तीसगढ़

पठन की आदत व्यक्तित्व विकास की महत्वपूर्ण कड़ी: लोकसभा सांसद

Shantanu Roy
24 Jan 2026 10:27 PM IST
पठन की आदत व्यक्तित्व विकास की महत्वपूर्ण कड़ी: लोकसभा सांसद
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Raigarh. रायगढ़। शासकीय जिला ग्रंथालय, रायगढ़ में आज “पठन की आदतों का विकास” विषय पर सारगर्भित एवं प्रेरक व्याख्यान आयोजित किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ माँ सरस्वती के चित्र पर दीप प्रज्वलन और पुष्प अर्पण के साथ हुआ। यह आयोजन नेशनल लाइब्रेरी मिशन के अंतर्गत विद्यार्थियों में नियमित अध्ययन और पठन संस्कृति को बढ़ावा देने के उद्देश्य से किया गया। इस अवसर पर लोकसभा सांसद राधेश्याम राठिया ने अपने संबोधन में कहा कि पुस्तकालय ज्ञान का सशक्त केंद्र है और पढ़ने की आदत बच्चों के व्यक्तित्व विकास की मजबूत नींव तैयार करती है। उन्होंने विद्यार्थियों को नियमित अध्ययन के लिए प्रोत्साहित करते हुए कहा कि पठन को जीवन शैली का अभिन्न हिस्सा बनाना चाहिए, क्योंकि यही भविष्य निर्माण की एक महत्वपूर्ण कड़ी है।

कार्यक्रम में विषय-विशेषज्ञों ने पठन संस्कृति के विभिन्न आयामों पर प्रकाश डाला। नागपुर विश्वविद्यालय से प्रोफेसर शालिनी लिहितकर ने पुस्तकालय और सूचना विज्ञान के संदर्भ में अध्ययन पद्धति और संसाधनों का सही उपयोग समझाया। राष्ट्रीय पुस्तकालय मिशन, कोलकाता से प्रोजेक्ट ऑफिसर दीपांजन चटर्जी ने मिशन की गतिविधियों और योजनाओं की जानकारी दी। शासकीय किशोरी मोहन त्रिपाठी कन्या महाविद्यालय से सहायक प्राध्यापक रंजीत बारीक और करियर मार्गदर्शक अबरार हुसैन ने प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में पढ़ाई और पुस्तक अध्ययन की भूमिका पर मार्गदर्शन किया। जिला शिक्षा अधिकारी डॉ. के. वी. राव ने कहा कि डिजिटल युग में भी पुस्तकों का महत्व कम नहीं हुआ है।

उन्होंने विद्यार्थियों में पढ़ने की घटती प्रवृत्ति पर चिंता व्यक्त करते हुए पठन को दैनिक जीवन का हिस्सा बनाने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि केवल डिजिटल माध्यम पर निर्भर रहना पर्याप्त नहीं है, बल्कि नियमित पुस्तक अध्ययन से ही व्यक्तित्व का समग्र विकास संभव है।कार्यक्रम का संचालन सेजेस नोडल अधिकारी व्याख्याता बीर सिंह ने किया, जबकि जिला ग्रंथालय प्रभारी अशोक पटेल ने उपस्थित सभी अतिथियों और विद्यार्थियों का आभार व्यक्त किया। इस कार्यक्रम में शिक्षकों, अधिकारियों और बड़ी संख्या में विद्यार्थियों ने भाग लिया। विद्यार्थियों ने व्याख्यान के दौरान अपनी जिज्ञासा व्यक्त की और पठन को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाने के लिए प्रेरणा प्राप्त की। इस व्याख्यान ने यह स्पष्ट किया कि पठन केवल ज्ञान अर्जित करने का साधन नहीं, बल्कि व्यक्तित्व निर्माण, आत्मविश्वास और समाज में सकारात्मक योगदान के लिए अनिवार्य आवश्यकता है।
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