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जेम्स बेक-टीनू सिंह का गोरखधंधा, HIV संक्रमित लड़कियों की होती सप्लाई
Raipur. रायपुर। राजधानी रायपुर के वीआईपी रोड पर स्थित हाइपर क्लब अब सिर्फ एक क्लब नहीं, बल्कि राजधानी की संस्कृति पर हमला बन चुका है। यहां रोज़ाना रातभर अश्लील डांस, देह व्यापार, विदेशी युवतियों का कैबरे और नशे की पराकाष्ठा देखी जाती है। इस गंदगी का सरगना है जेम्स बेक, जो कभी स्वास्थ्य विभाग में बाबू था और घोटालों में लिप्त पाए जाने पर विभाग से निलंबित कर दिया गया था। अब यही जेम्स बेक, अपने भतीजे टीनू सिंह (निवासी बैकुंठपुर, जिला कोरिया) के साथ मिलकर क्लब की आड़ में राजधानी में अश्लीलता, देह व्यापार और अवैध वसूली का एक संगठित तंत्र चला रहा है।
जानबूझकर विवाद करवा कर वसूली जाती है मोटी रकम
हाइपर क्लब में जानबूझकर पार्टियों के दौरान विवाद कराए जाते हैं, जिससे युवाओं से डरा-धमकाकर अवैध वसूली की जाती है। एक वीडियो फुटेज में यह साफ़ देखा गया है कि रात 3 बजे के बाद भी क्लब में खुलेआम अश्लील गतिविधियां जारी थीं।
सांकेतिक तस्वीर (AI)
सुबह 5 बजे तक आफ्टर पार्टी, सप्लाई होती हैं लड़कियां
इस क्लब में आफ्टर पार्टी सुबह 5 बजे तक चलती है, जिसमें विशेष रूप से बुलवाई गई लड़कियां शामिल होती हैं। ये लड़कियां जेम्स बेक द्वारा खुद ग्राहकों को उपलब्ध कराई जाती हैं, जिनमें से कई एचआईवी संक्रमित होने की पुष्ट जानकारी सामने आई है। सूत्रों के अनुसार सबसे भयावह तथ्य यह है कि जेम्स बेक को इन लड़कियों की एचआईवी स्थिति की जानकारी पहले से है, फिर भी वह उन्हें रोज़ाना अलग-अलग लोगों को सप्लाई कर रहा है। यह न सिर्फ अनैतिक और अपराध है, बल्कि समाज को सीधे मौत के मुंह में धकेलने जैसा कृत्य है।
फर्जी सरकारी अधिकारी और छुटभैया नेता भी शामिल!
सूत्रों की मानें तो जेम्स बेक शहर के बड़े रसूखदारों, छुटभैया नेता और यहां तक कि कुछ फर्जी सरकारी अधिकारियों तक भी इन लड़कियों को पहुंचाने का काम करता है। यह स्पष्ट संकेत है कि इस पूरे गोरखधंधे को किसी न किसी ऊंचे स्तर पर संरक्षण प्राप्त है।
हाइपर क्लब बना ड्रग्स का अड्डा, एमडीएमए से कोकेन तक बिक रहा ज़हर
हाइपर क्लब अब केवल अश्लीलता और जिस्मफरोशी का अड्डा नहीं, बल्कि मादक पदार्थों के काले कारोबार का भी मुख्य केंद्र बन चुका है। क्लब के भीतर एमडीएमए (₹8000/ग्राम), ब्राऊन शुगर (रुपए 5000/ ग्राम), कोकेन(रुपए 18000/ग्राम), चिट्ठा(रुपए 10000/ ग्राम),एसिड (₹2000/टिकट), मौली (₹2000/टैबलेट) और हाइब्रिड मरुआना (₹4500/ग्राम) जैसे घातक नशे खुलेआम बेचे जाते हैं। ये सभी नशे युवाओं को नष्ट करने और समाज को बर्बादी की तरफ धकेलने का ज़हर बन चुके हैं, जिन्हें बेचने और फैलाने का संगठित नेटवर्क जेम्स बेक और टीनू सिंह जैसे असामाजिक तत्वों द्वारा संचालित किया जा रहा है। सबसे बड़ा सवाल यह है कि ये घातक ड्रग्स रायपुर तक कैसे पहुंच रहे हैं और इसके पीछे कौन सी ताकतें हैं जो इस पूरे नशा व्यापार को संरक्षण दे रही हैं? यह सिर्फ एक अपराध नहीं, बल्कि राज्य की युवा नस्ल के विरुद्ध चल रहा सुनियोजित नरसंहार है।
नोट- विगत 12 वर्षों से चल रहे नशे के विरुद्ध अभियान को जारी रखते हुए जनता से रिश्ता ने वीआईपी रोड के होटलों, क्लबों की ख़बरों को फिर उजागर किया है अब पुलिस इन मामलों में कितनी कार्रवाई करती है ये देखने वाला विषय है।
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