छत्तीसगढ़
RAIPUR: महिलाओं ने पर्यावरण के अनुकूल हर्बल गुलाल से शुरू किया स्व-रोजगार
Shantanu Roy
1 March 2026 8:53 PM IST

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छग
Raipur. रायपुर। रायपुर में इस होली पर जिला प्रशासन और राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (NRLM) के मार्गदर्शन में ग्राम पंचायत भनौरा के गंगा महिला स्व-सहायता समूह की महिलाएं प्राकृतिक हर्बल गुलाल तैयार कर स्व-रोजगार को बढ़ावा दे रही हैं। यह पहल न केवल महिलाओं की आर्थिक सशक्तिकरण में मदद कर रही है, बल्कि पर्यावरण संरक्षण और स्वास्थ्य सुरक्षा की दिशा में भी महत्वपूर्ण योगदान दे रही है। बलरामपुर जिले के भनौरा गाँव में 11 सदस्यों वाले इस महिला स्व-सहायता समूह ने बताया कि पारंपरिक विधि से बनाए गए प्राकृतिक गुलाल से त्वचा सुरक्षित रहती है और यह पूरी तरह से पर्यावरण के अनुकूल है। उन्होंने कहा कि गुलाल बनाने की पूरी प्रक्रिया प्राकृतिक है, जिसमें फूलों, सब्जियों और हर्बल सामग्रियों का उपयोग किया जाता है।
गुलाबी रंग के लिए चुकंदर और गुलाब की पंखुड़ियां, पीले रंग के लिए हल्दी और गेंदे के फूल, हरे रंग के लिए पालक, नीले रंग के लिए अपराजिता के फूल तथा लाल रंग के लिए टेसू के फूलों का उपयोग किया जा रहा है। महिलाओं ने यह भी बताया कि पिछले तीन वर्षों से वे ईको-फ्रेंडली हर्बल गुलाल बनाने का कार्य कर रही हैं। रासायनिक गुलाल के मुकाबले प्राकृतिक गुलाल स्वास्थ्य के लिए पूरी तरह सुरक्षित है और त्वचा पर कोई नकारात्मक प्रभाव नहीं डालता। इसके अलावा, प्राकृतिक गुलाल स्थानीय बाजार में अच्छी मांग में है और इससे महिलाओं को अतिरिक्त आय प्राप्त हो रही है।
जिला प्रशासन और राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन ने इस पहल में तकनीकी मार्गदर्शन और बिक्री के लिए मंच उपलब्ध कराकर महिलाओं को सहयोग प्रदान किया है। इस सहयोग से महिलाओं ने स्टॉल लगाकर अपने उत्पादों की बिक्री भी शुरू कर दी है, जिससे उन्हें आय के साथ-साथ आत्मनिर्भर बनने का अवसर मिला है। महिलाओं ने कहा कि प्राकृतिक गुलाल के उत्पादन से न केवल स्वास्थ्य और पर्यावरण की सुरक्षा सुनिश्चित होती है, बल्कि यह सामाजिक रूप से भी महत्वपूर्ण है। स्थानीय बाजार में इसकी मांग लगातार बढ़ रही है और लोग इसे रासायनिक रंगों के मुकाबले अधिक पसंद कर रहे हैं।
जिला प्रशासन ने इस पहल की सराहना की है और कहा कि इस तरह की गतिविधियां महिलाओं को स्वावलंबी बनाने और पर्यावरण-सुरक्षित प्रथाओं को बढ़ावा देने में सहायक हैं। अधिकारियों ने महिलाओं को प्रेरित किया कि वे ऐसे नवाचारों को आगे बढ़ाएं और स्थानीय युवाओं को भी इस कार्य में शामिल करें। इस पहल से होली त्योहार के दौरान पर्यावरण और स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता बढ़ रही है। प्राकृतिक गुलाल के माध्यम से महिलाएं न केवल सामाजिक सशक्तिकरण की दिशा में कदम बढ़ा रही हैं, बल्कि अपने परिवार और समुदाय के लिए आर्थिक स्थिरता भी सुनिश्चित कर रही हैं। समूह की महिलाओं ने जिला प्रशासन और राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि उनके सहयोग से उन्हें रोजगार और आत्मनिर्भरता का अवसर मिला है। उन्होंने आशा जताई कि भविष्य में वे और अधिक रंगों और उत्पादों के साथ अपनी रचनात्मकता और व्यवसाय को बढ़ावा देंगी।
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