छत्तीसगढ़

रायपुर प्रेस क्लब में 2 महीने के भीतर चुनाव

Nilmani Pal
19 Sept 2025 1:27 PM IST
रायपुर प्रेस क्लब में 2 महीने के भीतर चुनाव
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रजिस्ट्रार फर्म-सोसायटी पद्मिनी भोई ने दिया आदेश, सारे संशोधन खारिज

रायपुर। सभी पक्षों को सुनने के बाद पंजीयन फार्म समिति ने जो आदेश जारी किया है उसके मुताबिक प्रेस क्लब में संविधान संशोधन के लिए विशेष सामान्य सभा नहीं बुलाई गई थी और उसने उपस्थित सदस्यों की संख्या आवश्यक नियम अनुसार दर्ज संख्या से कम है इसलिए प्रेस क्लब के संविधान संशोधन प्रस्ताव को पंजीयक ने रद्द कर दिया है, वही प्रेस क्लब की वर्तमान कार्यकारिणी का कार्यकाल जो की 17 फरवरी 2025 को ही पूरा हो चुका है उसको दृष्टिगत रखते हुए प्रेस क्लब की पंजीकृत नियमावली याने पुराने संविधान के अनुसार नियम 4 में वर्णित सदस्यता के अनुसार अगले 60 दिनों में चुनाव किए जाने के निर्देश जारी किए हैं, इस आदेश के बाद अब प्रेस क्लब में 2024 में मतदाता सूची प्रभावशील रहेगी , जबकि संविधान संशोधन की प्रत्याशा में करीब 300 नए सदस्य जोड़े जाने का फैसला फिलहाल लंबित रहेगा ऐसे में, नए सदस्य चुनावी भूमिका हिस्सा नहीं ले पाएंगे, हालांकि पंजीयन फर्म सोसाइटी के आदेश को सचिव स्तर पर अपील में ले जाया जा सकता है पर 60 दिन के अंदर इस संबंध में कोई निराकरण निकल जाए इसकी संभावना कम है


मौजूदा कार्यकारिणी विकल्प तलाशने में जुटी

रायपुर प्रेस क्लब की मौजूदा कार्यकारिणी के निर्णय के खिलाफ आए पंजीयक फॉर्म एवं सोसायटी का फैसला तो आ गया है लेकिन इस फैसले का तोड़ निकालने के लिए मौजूदा कार्य करने विकल्प तलाश रही है बताया जा रहा है कि मौजूदा अध्यक्ष एवं कार्यकारिणी के सदस्य संबंध में विधि विशेषज्ञों की सलाह ले रहे हैं संभव है कि चुनाव कराए जाने के बजाय कोर्ट जाकर इस फैसले की अपील के जरिए राहत पाने की कोशिश की जाएगी, पंजीयन के फैसले के बाद नए सदस्यों को चुनाव में भागीदारी नहीं मिल पाने से मौजूदा कार्यकारिणी के वोट बैंक पॉलिटिक्स को बड़ा धक्का लगा है इसलिए नए सदस्यों को जोड़ जाना और उन्हें वोटिंग पावर दिलाए जाने के लिए कानूनी प्रावधानों पर मौजूदा कार्यकारिणी विचार कर रही है ,

फैसले का स्वागत, प्रेस क्लब में जश्न

प्रेस क्लब की मौजूदा कार्यकारिणी के फसलों के खिलाफ शिकायतकर्ताओं को मिली जीत के बाद प्रेस क्लब में जश्न का माहौल देखने को मिला, सभी शिकायतकर्ताओं ने एक साथ प्रेस क्लब के सामने पहुंचकर आतिशबाजी की और मिठाइयां बांटी इस दौरान जिन सदस्यों की सदस्यता रद्द कर दी थी उन्होंने नाचते गाते , ढोल बजाते हुए प्रेस क्लब में प्रवेश किया,, वरिष्ठ प्रेस क्लब सदस्य प्रशांत शर्मा, अनिल पुसदकर, राम अवतार तिवारी, बृजेश चौबे , सुकांत राजपूत , सुखनंदन बंजारे और ज़ाकिर घुरसेना सहित वरिष्ठ पत्रकारों ने इस फैसले का स्वागत किया है और इस सत्य की जीत करार दिया है शिकायतकर्ताओं की ओर से संदीप पुराणिक और मोहन तिवारी ने चुनाव से प्रेस क्लब की रुकी पड़ी लोकतांत्रिक व्यवस्था बहाल होने की उम्मीद जाहिर की है

प्रशासक की देखरेख में चुनाव कराने की उठी मांग

पंजीयक के फैसले का जहां एक ओर स्वागत किया जा रहा है वहीं दूसरा पक्ष इसकी तोड़ निकालने के लिए कानूनी सहारा ले रहा है ऐसे में शिकायत कर्ता पक्ष ने 60 दिन में चुनाव किए जाने के निर्देश के पालन पर प्रेस क्लब की कार्यकारिणी की मंशा पर सवाल खड़े किए हैं सभी शिकायतकर्ता जल्द और निष्पक्ष चुनाव के लिए प्रेस क्लब में चुनाव अधिकारी की नियुक्ति और प्रशासक की देखरेख में चुनाव संपन्न कर जाने की मांग रखी है,

लड़ाई अभी बाकी है...

नियम कानून को लेकर फार्म एवं सोसायटी के सामने लड़ाई लडऩे के बाद असली प्रेस क्लब के चुनावी अखाड़े में देखने मिलने वाली है जहां प्रेस क्लब में कब्जे के लिए अलग-अलग पैनल हाथ आजमाते नजर आएंगे ,बताया जा रहा है कि अध्यक्ष का प्रतिष्ठा पूर्ण पद पाने के लिए इस बार एड़ी चोटी का जोर लगाने दावेदार तैयार बैठे हैं, वर्तमान निवर्तमान अध्यक्ष प्रफुल्ल ठाकुर के मुकाबले में किस चेहरे को आगे किया जाएगा यह एक बड़ा सवाल है, क्योंकि वर्तमान काबिज़ कार्यकारिणी में प्रफुल्ल ठाकुर के पीछे रुचिर गर्ग के साथ राजीव रंजन जैसे कुछ अन्य बड़े संपादकों का समर्थन हासिल है , दूसरी ओर अलग-अलग पैनलों में बटें पत्रकारों के समूह मुकाबले में हैं यही कारण है कि पिछले चुनाव में प्रफुल्ल के पैनल के सामने दूसरे गुट मुकाबले में टिक नहीं पाए थे

ऐसे में वर्तमान का बीच पदाधिकारी के खिलाफ एक मजबूत पैनल बनाकर लड़े जाने की जरूर बनी हुई है , फिलहाल चुनाव की घोषणा केसाथ पदों को लेकर समीकरण बनाने की जुगत शुरू हो गई है।

बिलासपुर में प्रेसक्लब चुनाव 19 को सम्पन्न

बिलासपुर । बिलासपुर में प्रेसक्लब चुनाव की अवधि दो साल की है।और 22 सितंबर को दो साल की अवधि खत्म होगी लेकिन बिलासपुर के पदाधिकारियों ने अपनी नैतिक जिम्मेदारी को निभाते हुए दो माह पहले ही चुनाव की घोषणा कर आदर्श सुचिता पेश किया है जिसकी सर्वत्र सराहना की जा रही है। वहीं राजधानी रायपुर में प्रेसक्लब चुनाव अखाड़ा बना हुआ है यहां जो भी पदाधिकारी अध्यक्ष बनता है नई परिपाटी को जन्म दे देता है। रायपुर में पिछले 10 सालों में समय पर कभी चुनाव नहीं हो पाया है। यह पत्रकारों का अखाड़ा बनकर रह गया है। प्रेस क्लब के सदस्यों के लिए कोई उल्लेखनीय कार्य नहीं किया गया। सिर्फ जो 5-10 पदाधिकारी होते है वो ही प्रेसक्लब की गरिमा को धूलधूसरित करने में उतावले होते है। जिसके कारण सैकड़ों पत्रकारों को सरकार से मिलने वाले फायदे से वंचित होना पड़ता है।

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