छत्तीसगढ़
रायपुर प्रेस क्लब चुनाव 2026: प्रतिष्ठा, पारदर्शिता और भविष्य की दिशा तय करने की निर्णायक लड़ाई
Shantanu Roy
12 Jan 2026 9:43 PM IST

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छग
Raipur. रायपुर। राजधानी रायपुर के पत्रकारिता जगत के लिए 13 जनवरी 2026 का दिन बेहद अहम होने जा रहा है। रायपुर प्रेस क्लब का प्रतिष्ठित चुनाव बुधवार सुबह 8 बजे से शुरू होकर शाम 4 बजे तक चलेगा, जिसके बाद उसी दिन मतगणना कर परिणाम घोषित किए जाएंगे। इस चुनाव को लेकर पिछले कई दिनों से राजधानी के पत्रकारों में जबरदस्त हलचल और उत्साह देखने को मिल रहा है। प्रत्याशियों ने अपने-अपने गुटों और समर्थकों के साथ पूरा दमखम झोंक दिया है, जिससे यह चुनाव अब सिर्फ एक औपचारिक प्रक्रिया न रहकर प्रेस क्लब की साख, गरिमा और भविष्य की दिशा तय करने वाली लड़ाई बन गया है। रायपुर प्रेस क्लब केवल एक संस्था नहीं, बल्कि वह मंच है जहां से पत्रकार कलम, माइक और कैमरे के जरिए जनता की आवाज को बुलंद करते आए हैं। वर्षों से यह क्लब पत्रकारों के अधिकार, सम्मान और एकजुटता का प्रतीक रहा है। लेकिन बीते सात वर्षों में कथित कुप्रबंधन, पारदर्शिता की कमी और तानाशाही रवैये को लेकर क्लब के सदस्यों में भारी असंतोष पनपा है। यही कारण है कि इस बार का चुनाव सामान्य से कहीं अधिक संवेदनशील और निर्णायक माना जा रहा है।
पिछले दो कार्यकालों में प्रेस क्लब के चुनाव प्रशासनिक अमले द्वारा कराए जाने को लेकर भी पत्रकारों में नाराजगी रही है। सदस्यों का मानना है कि इससे क्लब की स्वायत्तता, गरिमा और विश्वसनीयता को ठेस पहुंची। अब अधिकांश पत्रकार इस निष्कर्ष पर पहुंचे हैं कि प्रेस क्लब की खोई हुई प्रतिष्ठा को वापस लाने के लिए एकजुट होना जरूरी है। इसी भावना के चलते इस बार वैचारिक मतभेदों और व्यक्तिगत असहमतियों को दरकिनार कर पत्रकार एक साझा उद्देश्य के साथ सामने आए हैं। रायपुर प्रेस क्लब चुनाव 2026 को लेकर पिछले तीन दिनों में चुनावी माहौल पूरी तरह गरमा गया है। कई वरिष्ठ और युवा पत्रकारों ने खुले तौर पर कहा है कि अब किसी भी तरह के प्रयोगात्मक नेतृत्व का समय नहीं है। सदस्यों की राय में प्रेस क्लब की बागडोर अब किसी ऐसे वरिष्ठ, अनुभवी और सर्वमान्य पत्रकार के हाथों में जानी चाहिए, जो संस्था की परंपरा, मूल्यों और प्रतिष्ठा को समझता हो और उसे पुनः सुदृढ़ कर सके।
इस चुनाव में प्रमुख मुद्दों में पत्रकारों के लिए आवास, सुरक्षा, रोजगार, प्रशिक्षण और सम्मान शामिल हैं। लंबे समय से यह मांग उठती रही है कि प्रेस क्लब केवल एक भवन या आयोजन स्थल न रहकर पत्रकारों के वास्तविक हितों की रक्षा करने वाला मजबूत संस्थान बने। सदस्यों का कहना है कि प्रेस क्लब के मूलभूत संसाधन पत्रकारों के अधिकार के रूप में स्थापित किए जाने चाहिए, न कि किसी सीमित वर्ग या गुट तक सीमित रखे जाएं। आय-व्यय की पारदर्शिता भी इस चुनाव का बड़ा मुद्दा बनकर उभरी है। कई पत्रकारों ने यह स्वीकार किया है कि पिछले कुछ वर्षों में क्लब के वित्तीय लेन-देन को लेकर स्पष्टता नहीं रही। सदस्यों को आय-व्यय की जानकारी मांगने पर भी संतोषजनक जवाब नहीं मिल पाता था। ऐसे में इस बार यह मांग जोर पकड़ रही है कि प्रेस क्लब में सूचना का अधिकार सभी सदस्यों के लिए समान रूप से लागू हो और हर सदस्य को आय-व्यय का लेखा-जोखा जानने का अधिकार मिले।
चुनावी प्रचार के दौरान सभी प्रत्याशियों ने अपने-अपने समर्थकों के साथ धुआंधार जनसंपर्क किया है। क्लब परिसर से लेकर शहर के विभिन्न हिस्सों में प्रत्याशी लगातार पत्रकार साथियों से मुलाकात कर रहे हैं और अपने विजन को साझा कर रहे हैं। इस बार का चुनाव प्रचार अपेक्षाकृत अधिक मुद्दा आधारित और भावनात्मक नजर आ रहा है, जिसमें प्रेस क्लब की प्रतिष्ठा और पत्रकारिता के भविष्य को केंद्र में रखा गया है। कुल मिलाकर यह स्पष्ट है कि रायपुर प्रेस क्लब चुनाव 2026 राजधानी के पत्रकारों के लिए एक नया मोड़ साबित हो सकता है। बुधवार को होने वाला मतदान यह तय करेगा कि आने वाले वर्षों में प्रेस क्लब किस दिशा में आगे बढ़ेगा। सदस्य बदलाव के मूड में हैं और आमूलचूल सुधार की उम्मीद के साथ मतदान के लिए पूरी तरह तैयार नजर आ रहे हैं। अब सभी की निगाहें कल के मतदान और उसके नतीजों पर टिकी हुई हैं, जो रायपुर प्रेस क्लब के भविष्य की तस्वीर साफ करेंगे।
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