छत्तीसगढ़

Raipur Press Club Election 2026 : प्रेस क्लब में मोहन Vs प्रफुल्ल, अपनों से घिरे गौरव

Nil dhankar
8 Jan 2026 11:00 AM IST
Raipur Press Club Election 2026 : प्रेस क्लब में मोहन Vs प्रफुल्ल, अपनों से घिरे गौरव
x

रायपुर प्रेस क्लब का नाम बड़ा, मतदाता 800 से कम

प्रेस क्लब की सियासत में जबरदस्त खींचतान

अनिल, सुनील, प्रशांत के कूदने से मुकाबला दिलचस्प

रायपुर। छत्तीसगढ़ के सबसे प्रतिष्ठित रायपुर प्रेस क्लब में इन दिनों चुनावी सरगर्मी तेज है। 13 जनवरी को प्रेस क्लब चुनाव के लिए मतदान किया जाना है। इससे पहले सभी पैनल अपनी ताकत दिखा रहे हैं। प्रेस क्लब चुनाव में मुख्य रूप से वर्तमान अध्यक्ष प्रफुल्ल ठाकुर और संगवारी पैनल के प्रत्याशी मोहन तिवारी के बीच मुकाबला माना जा रहा था, लेकिन प्रेस क्लब की सियासत के धुरंधरों के मैदान में उतरने से घमासान तेज होता नजर आ रहा है। प्रेस क्लब चुनाव के लिए नामांकन प्रक्रिया की शुरुआत 6 जनवरी को हुई थी। संगवारी पैनल के अध्यक्ष प्रत्याशी मोहन तिवारी ने अपने पैनल के प्रत्याशियों के साथ नामांकन दाखिल कर दिया था। 7 जनवरी को संकल्प चैनल के बैनरतले प्रफुल्ल ठाकुर ने भी नामांकन दाखिल कर दिया है। अध्यक्ष पद की बात की जाए तो प्रफुल्ल ठाकुर और मोहन तिवारी के बीच सीधी टक्कर होती नजर आ रही है, लेकिन मैदान में अनिल पुसदकर, प्रशांत दुबे और सुनील नामदेव के उतरने से मुकाबला दिलचस्प होता दिख रहा है।

घर में घेराबंदी ...?

महासचिव पद के लिए मोहन तिवारी के संगवारी पैनल से गौरव शर्मा मैदान में हैं। प्रफुल्ल ठाकुर के संकल्प पैनल की ओर से संदीप शुक्ला चुनाव लड़ रहे हैं। प्रशांत दुबे के पैनल से पराग मिश्रा मैदान में हैं। महासचिव पद के लिए गौरव शर्मा और संदीप शुक्ला के बीच सीधी टक्कर की बात कही जा रही थी, लेकिन विरोधियों ने गौरव शर्मा की जबरदस्त घेरे बंदी के लिए बड़ा दांव चला है। सुनील नामदेव ने अपने करीबी पत्रकार सुरेंद्र शुक्ला को महासचिव पद पर नामांकन दाखिल करा दिया है। गौरव शर्मा और सुरेंद्र शुक्ला एक ही संस्थान में कार्यरत हैं। दोनों एक ही पद पर चुनाव लड़ रहे हैं। गौरव शर्मा को घर में घेरने की रणनीति के तहत सुरेंद्र शुक्ला को मैदान में उतारा गया है। इस तरह सबसे दिलचस्प मुकाबला इस बार महासचिव पद के लिए होगा। जहां एक ही संस्थान के दो लोग एक ही पद के लिए संघर्ष करते नजर आएंगे।

अन्य पदों के लिए भी तोडफ़ोड़

चुनाव में अन्य पदों के प्रत्याशियों के लिए भी बड़ा दांव-पेंच और तोडफ़ोड़ होता नजर आ रहा है। पिछली बार दामू आंबेडारे के पैनल से चुनाव लडऩे वाले भोलाराम सिन्हा इस बार प्रशांत दुबे के पैनल से मैदान में हैं। पिछली बार प्रफुल्ल ठाकुर के साथ कोषाध्यक्ष का चुनाव जीतने वाले रमन हलवाई इस बार अनिल पुसदकर के पैनल से चुनाव लड़ रहे हैं। अन्य पदों के लिए भी जबरदस्त खींचतान नजर आ रही है।

पुराने मतदाता मुखर हुए

वरिष्ठ पत्रकारों का मानना है कि इस बार सदस्य किसी नए, सक्षम और सर्वमान्य चेहरे को मौका देना चाहते हैं। एक पुराने पत्रकार का कहना है कि पिछले दो कार्यकाल देख लिए गए हैं, वही ढर्रा, वही बहाने और कार्यकाल बढ़ाने की कोशिशें। अब बदलाव जरूरी है।

इसी क्रम में मोहन तिवारी का नाम चर्चा में है। कई वरिष्ठों का मानना है कि विभिन्न राजनीतिक दलों और शासन-प्रशासन में उनकी व्यापक पहचान का लाभ पत्रकार समुदाय को मिल सकता है, जो पिछले कार्यकाल में नदारद रहा।

वहीं, बड़े अखबार के एक वरिष्ठ पत्रकार ने कहा कि पूर्व अध्यक्ष प्रफुल्ल ठाकुर द्वारा नए सदस्यों को जोडऩा सही कदम था, लेकिन 125 पुराने सदस्यों को बाहर करने का फैसला उनके अहंकार और तानाशाही रवैये को दर्शाता है। इस निर्णय को लेकर न केवल व्यापक नाराजगी है, बल्कि यह सवाल भी उठ रहा है कि उस समय किसी पदाधिकारी या कार्यकारिणी सदस्य ने विरोध क्यों नहीं किया।वरिष्ठ पत्रकारों का मानना है कि 125 पुराने सदस्यों को हटाने का फैसला इस चुनाव में भारी पड़ सकता है। क्लब के भीतर यह चर्चा आम है कि इसी निर्णय ने बीती कार्यकारिणी की जड़ों को कमजोर कर दिया।

Next Story
null