छत्तीसगढ़
रायपुर पुलिस की नई पहल, फिंगरप्रिंट और NAFIS तकनीक से वैज्ञानिक होगी अपराध जांच
Shantanu Roy
22 Aug 2026 7:58 PM IST

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छग
Raipur. रायपुर। अपराध जांच को और अधिक वैज्ञानिक, सटीक और प्रभावी बनाने के उद्देश्य से रायपुर कमिश्नरेट पुलिस ने एक विशेष पहल की है। पुलिस अधिकारियों और कर्मचारियों को फिंगरप्रिंट तथा राष्ट्रीय स्वचालित फिंगरप्रिंट पहचान प्रणाली (NAFIS) के उपयोग को लेकर प्रशिक्षण दिया गया। इस प्रशिक्षण का उद्देश्य घटनास्थल से मिलने वाले वैज्ञानिक साक्ष्यों का बेहतर उपयोग कर अपराधियों तक पहुंचना और विवेचना प्रक्रिया को मजबूत बनाना है। पुलिस का मानना है कि अपराधी कितना भी शातिर क्यों न हो, घटनास्थल पर छोड़ी गई उसकी छोटी से छोटी निशानी भी जांच में अहम कड़ी साबित हो सकती है। रायपुर कमिश्नरेट और रायपुर ग्रामीण पुलिस के अधिकारियों-कर्मचारियों के लिए एक दिवसीय प्रशिक्षण कार्यशाला का आयोजन यातायात मुख्यालय, कालीबाड़ी रायपुर के प्रथम तल में किया गया। प्रशिक्षण फिंगरप्रिंट विशेषज्ञ अजय कुमार साहू द्वारा नोडल अधिकारी एवं अतिरिक्त पुलिस उपायुक्त पीताम्बर पटेल के मार्गदर्शन में दिया गया।
घटनास्थल पर फिंगरप्रिंट की अहम भूमिका
प्रशिक्षण के दौरान पुलिसकर्मियों को बताया गया कि किसी भी अपराध की जांच में घटनास्थल से मिलने वाले फिंगरप्रिंट बेहद महत्वपूर्ण साक्ष्य हो सकते हैं। दरवाजे, खिड़की, कांच, वाहन, अलमारी और अन्य वस्तुओं पर मिले फिंगरप्रिंट के जरिए अपराधी की पहचान करने में मदद मिल सकती है। पुलिसकर्मियों को चांस प्रिंट यानी ऐसे फिंगरप्रिंट जो दिखाई नहीं देते या अधूरे होते हैं, उनकी पहचान करने की तकनीक भी सिखाई गई। इसके अलावा फिंगरप्रिंट को वैज्ञानिक तरीके से उठाने, सुरक्षित रखने और जांच के लिए भेजने की प्रक्रिया की जानकारी दी गई।
फिंगरप्रिंट किट के उपयोग की दी जानकारी
प्रशिक्षण में थानों में उपलब्ध फिंगरप्रिंट किट के सही उपयोग के बारे में भी जानकारी दी गई। पुलिसकर्मियों को बताया गया कि घटनास्थल को सुरक्षित रखना, साक्ष्यों को खराब होने से बचाना और फिंगरप्रिंट को सही तरीके से पैक करना बेहद जरूरी है। कार्यशाला में विवेचना के दौरान फिंगरप्रिंट साक्ष्य के प्रभावी उपयोग और उससे जुड़ी सावधानियों के बारे में भी विस्तार से बताया गया।
NAFIS से डिजिटल पहचान होगी आसान
प्रशिक्षण में राष्ट्रीय स्वचालित फिंगरप्रिंट पहचान प्रणाली (NAFIS) के बारे में भी जानकारी दी गई। पुलिस अधिकारियों को बताया गया कि NAFIS के माध्यम से घटनास्थल से प्राप्त फिंगरप्रिंट का डिजिटल रिकॉर्ड से मिलान किया जा सकता है। इस तकनीक की मदद से संदिग्ध व्यक्ति की पहचान और उसके पुराने आपराधिक रिकॉर्ड की जानकारी प्राप्त की जा सकती है। खासकर अंतरराज्यीय अपराधियों की पहचान में यह प्रणाली पुलिस के लिए काफी मददगार साबित हो सकती है।
आधुनिक फॉरेंसिक तकनीकों पर जोर
प्रशिक्षण के दौरान फिंगरप्रिंट के साथ-साथ डीएनए जांच, सीसीटीवी फुटेज और डिजिटल साक्ष्यों के प्रभावी उपयोग पर भी चर्चा की गई। पुलिस अधिकारियों ने बताया कि वर्तमान समय में अपराध की प्रकृति तेजी से बदल रही है। ऐसे में पारंपरिक जांच के साथ आधुनिक तकनीकों का उपयोग जरूरी हो गया है। वैज्ञानिक साक्ष्यों के आधार पर जांच करने से अपराधियों तक जल्दी पहुंचने और उन्हें सजा दिलाने में सहायता मिलती है। रायपुर कमिश्नरेट पुलिस का यह प्रशिक्षण कार्यक्रम अपराध अनुसंधान को तकनीकी रूप से मजबूत बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। पुलिस का उद्देश्य है कि हर मामले की जांच अधिक निष्पक्ष, वैज्ञानिक और सटीक तरीके से की जाए।
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