छत्तीसगढ़

देशभर के सटोरियों का हेडक्वार्टर बन चुका है रायपुर

Janta Se Rishta Admin
1 Feb 2022 6:43 AM GMT
देशभर के सटोरियों का हेडक्वार्टर बन चुका है रायपुर
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  • मुबंई-नागपुर की तरह निकाल रहे है ओपन-टू-क्लोज
  • लगातार ताबड़तोड़ कार्रवाई के बाद भी सटोरियों में पुलिस का खौफ नहीं
  • छुटभैये नेताओं का संरक्षण के कारण थाने से ही छूट रहे सटोरिए
  • सटोरियों के गाडफ़ादर बने सफेदपोश छुटभैया नेता
  • शहर में खाईवाल और बुकियों ने अपने वर्चस्व के हिसाब से बांट रखा है इलाका
  • सटोरियों का फिक्स है अपना अलग-अलग थाना क्षेत्र

जसेरि रिपोर्टर

रायपुर। जनता से रिश्ता सामाजिक सरोकार का निर्वहन करते हुए लगातार सट्टा किंगों और उनके गुर्गों के साम्राज्य की खबर प्रकाशित कर शासन-प्रशासन के संज्ञान में ला रहा है। पुलिस प्रशासन खबरों को संज्ञान में लेकर रोज ताबड़तोड़ कार्रवाई कर रही है उसके बाद भी सट्टा का सिडिंकेट राजधानी के पॉश कालोनियों के साथ स्टार और बिना स्टार वाले होटलों के अलावा राजधानी के सबसे व्यस्ततम बाजार गोलबाजार में सटोरियों ने अड्डा जमा रखा है। राजधानी के पूरे 70 वार्डो में सटोरिए सक्रिय होकर ओपन-टू-क्लोज को अंजाम दे रहे है। देशभर के सटोरियों का हेटक्वार्टर रायपुर बना हुआ है, जहां से मुंबई-नागपुर सहित अन्य राज्यों से बाकायदा आनलाइन और आफ लाइन बुकिंग करने का कारोबार संचालित कर रहे है। राजधानी में सट्टा कारोबार धड़ल्ले से चल रहा है। टिकरापारा, नेहरुनगर, भाटागांव,पचपेड़ी नाका,रायपुरा, महादेव घाट के आसपास बस्तियों में, अमलेश्वर, आश्रम के आसपास, कालीबाड़ी, गुढिय़ारी, कटोरा तालाब, सड्डू-मोवा, मंडी गेट, दलदलसिवनी, देवेंद्रनगर, समता कालोनी,तेलाबांधा, टाटीबंध, खमतराई, उरला, बिरगांव सहित शहर के आउटर में काफी तादात में सट्टा खिलाया जा रहा है। सट्टा सिर्फ शहर तक ही सीमित नहीं है बल्कि गावों में भी पैर पसार चुका है। क्या वजह है कि सट्टा कारोबार चलाने वालों में पुलिस का कोई खौफ दिख नहीं रहा है? इन दिनों सट्टे का अवैध कारोबार जोर शोर से चल रहा है। एक रुपए को अस्सी रुपया बनाने के चक्कर में खासकर युवा वर्ग अधिक बर्बाद हो रहे हैं। सट्टे के इस खेल को बढ़ावा देने सटोरी ग्राहकों को मुफ्त में स्कीम देखने सट्टे नंबर वाले चार्ट उपलब्ध करा रहे हैं। इसका गुणा भाग कर ग्राहक सट्टे की चपेट में बुरी तरह से फंस कर पैसा इस अवैध कारोबार में गंवा रहा है। शहर में बढ़ रहे अपराध पर अंकुश लगाने की पुलिस प्रशासन की लाख कोशिशों के बाद भी सट्टा-जुआ, अवैध नशीली दवाओं का कारोबार रुकने का नाम नहीं ले रहा है। राजधानी में पुलिस को गुंडे-बदमाशों के साथ सटोरियों और जुआरियों का फड़ लगाने वालों के साथ इन्हें संरक्षण देने वाले छुटभैया नेताओं से रोज जूझना पड़ता है। सामान्य तौर पर बड़े पुलिस अधिकारी और पुलिस के पुराने अधिकारी यह मानते है कि सारे अवैध कारोबार के पीछे राजनीतिक संरक्षण देने वालों का हाथ है, जिसके कारण राजधानी में सट्टा-जुआ और नशे के कारोबारियों पर हाथ डालते ही राजनीतिक दबाव बनना शुरू हो जाता है। पुलिस अपराध नियंत्रण करने के लिए तरह-तरह के प्रयोग करने के साथ जागरूकता अभियान भी चला कर देख चुकी है। लेकिन अवैध कारोबार की चुनौती कम नहीं हो रही। अवैध कारोबार में राजनीतिक संरक्षण ही पुलिस के काम में सबसे बड़ा बाधक है।

रवि के गुर्गे सक्रिय

शहर खुलेआम सट्टा और जुआ का खेल चल रहा है। शाम होते ही सट्टा लगना शुरू हो जाता है और देर रात तक चलता है। खुलेआम चले रहे इस कारोबार पर न तो पुलिस की नजर है और ना ही वह इस पर लगाम कसने का प्रयास कर रहे हैं। यही वजह है कि यह कारोबार लगातार बढ़ता जा रहा है। राजधानी का नामी सटोरिया जो कालीबाड़ी, नेहरू नगर, गाँधी नगर में अपना सट्टा कारोबार फैलाए हुए है। जिसकी वजह से रवि अभी शहर के बाहर घूम रहा है। मगर उसके गुर्गे शहर में उसकी कुर्सी के आड़ में उसके गुर्गे अपना कारोबार शुरू कर दिए है। वही रवि के गुर्गों ने अपना कारोबार चालू किया और उसके नाम का फायदा उठाते हुए महिलाओं और बच्चों को भी इस काले धंधे में उतार लिया है। यही हाल देवेंद्र नगर, समता कालोनी, गुढिय़ारी, और आश्रम का भी हाल है। वहां भी सट्टा किंग कहीं दूर बैठा कर अपने गुर्गो से सट्टा पट्टी लिखवा रहे हैं। पुलिस की कार्रवाई होती है तब मुख्य सरगना तो नहीं परन्तु छोटे छोटे लिखने वाले दबोच लिए जाते हैं और मामूली धारा लगने के कारण आसानी से छूट भी जाते है और फिर उसी काम में लग जाते हैं।

छुटभैय्या नेता बने सटोरियों के गॉड फादर

रवि साहू की गैंग में नए सदस्यों को जोड़ा गया है, ये ऐसे हिस्ट्रीशीटर है जो जेल से जमानत में या पैरोल में छूटे हुए है उन आरोपियों को गैंग में शामिल किया गया है। और अपने सट्टे के कारोबार में रवि साहू ने इजाफा भी किया है। पुलिस और अपराधियों की लुकाछिपी का खेल सालों से चला आ रहा है। वही अनिल आलू का सट्टा कारोबार भी अपनी चरम सीमा पर है 11 साल पहले अनिल आलू सट्टा में गिरफ्तार हुआ उसके बाद से पुलिस उसे आज तक पकड़ नहीं पाई है। ये लुकाछिपी का पूरा खेल छुटभैय्या नेताओं के इशारे से चल रहा है।

इलाके के दादा ही सट्टे के बड़े खाईवाल

रायपुर के आश्रम, कालीबाड़ी, गुढिय़ारी , देवेंद्र नगर, समता कालोनी, सदर बाजार, आज़ाद चौक, पंडरी बस स्टैंड, नेशनल हाइवे, सब्जी मार्केट और चौक चौराहे में स्थित कई जनरल स्टोर्स, नाई व पान दुकानों में सट्टे लिखवाने वालों भीड़ देखी जा सकती है। खाईवालों के चक्रव्यूह में लोग इस कदर फंस चुके हैं की इससे उबर नहींं पा रहे हैं। शहर में एक दो नहीं बल्कि चार खाईवाल लंबे समय से सट्टा संचालित कर रहे हैं। छुटभैय्या नेताओं और खाईवालों की मिलीभगत से यह अवैध कारोबार शहर सहित आस-पास के आउटर इलाकों में पूरी तरह से चरम पर है।

खाईवालों ने एरिया बांटा

खाईवालों ने भी गांव व शहर में अपना-अपना जोन बंटा हुआ है। एक दूसरे के जोन में कोई दखल नहीं देता है। नशे के कारोबारियों और सट्टा और जुआ, हुक्काबार डांस पार्टी बार पर नकेल कसने के लिए कड़ा से कड़ा कानून जनप्रतिनिधियों और पुलिस अधिकारियों की कमेटी में सहमति बनाकर सदन में पेश कर पारित करना चाहिए। राज्य में कड़ा से कड़ा कानून लाना ही एक मात्र विकल्प है, जिससे आने वाली पीढ़ी नशे से डरे और कड़े कानून के कारण अवैध कारोबार से दूर रहे। जनता से रिश्ता के प्रतिनिधि ने देखा कि राजधानी में जगह-जगह सट्टे का खुलेआम कारोबार चल रहा है। पुलिस के नाक के नीचे से ये सट्टे का कारोबार खुलेआम चल रहा है। पुलिस को भनक नहीं लग रही है या नेतागिरी के कारण आंख कान मूंदे हुए हैं।

सट्टा-जुआ बना युवाओं की लत

सट्टा-जुआ, नशीली दवाई पर पुलिस लगातार कार्रवाई कर रही है। मगर अनैतिक कारोबार के खात्मा के लिए नया कानून कड़े नियम लाने होंगे। जिससे आपराधिक तत्वों को पुलिस और कानून व्यवस्था का खौफ हो, तभी राजधानी में अमन-चैन बरकरार रह सकती है। माना, सिविल लाइन आकाशवाणी के पीछे नाला, रामसागर पारा की गली, स्टेशन रोड, पंडरी, मोवा, ताजनगर, राजा तालाब, शंकरनगर, तेलीबांधा, चांगोरा भाटा, टिकरापारा, स्टेशन रोड, जेल रोड की ओर जाने वाली सडक़ पर आपको खुलेआम नशे का कारोबारी मिल जाएंगे।

छुटभैये नेताओं का दबाव

सट्टा और जुए के अड्डेबाज भरपूर तादाद में उपलब्ध है लेकिन नेताओं की इच्छा शक्ति के आगे पुलिस प्रशासन और सरकार में बैठे नुमाइंदे कैसे इसको अंकुश लगाते हैं आगे यह देखना है। छुटभैया नेताओं का पुलिस पर लगातार दबाव राजधानी में काले कारोबार का जाल पूरी तरह बिछ चुका है, सट्टा-जुआ, नशीली दवाई का कारोबार अबाध गति से फल-फूल रहा है। शहर की पुलिस किसी भी स्तर में अपने कानूनी अधिकार के अंतर्गत कार्य नहीं कर पा रही है, किसी भी प्रकार की कार्रवाई करने पर पुलिस के ऊपर छुटभैय्या नेताओं के द्वारा भारी दबाव डाला जाता है, जिससे पुलिस अब कानून व्यवस्था के अलावा किसी और पक्ष की ओर ज्यादा ध्यान नहीं देती है। कोरोना काल में पूरे शहर में कहीं ना कहीं सट्टा और जुआ और नशे का कारोबार हर एक-दो दिन की आड़ में अखबार में खबर छपने के उपरांत पुलिस के द्वारा संबंधित ठिकानों में दबिश देकर गिरफ्तारी की कार्रवाई की जाती है, लेकिन 2 दिन के बाद सब सामान्य उसी तरीके से चलने लगता है।

नशीली दवाइयों का भी होता कारोबार

राजधानी में अवैध कारोबार नशीली दवाई गांजा, चरस, सिरप के साथ सट्टा-जुआ ने सुनामी की तरह चपेट में ले लिया है। शहर का ऐसा कोई इलाका नहीं बचा है जो नशे और जुआ-सट्टा के जद में नहीं है। तूफानी रप्तार से नशीली दवाई का कारोबार और सट्टा और जुआ रायपुर में तीव्र गति के साथ नौनिहालों के साथ युवा पीढ़ी को मजबूती के साथ जकड़ लिया है। इस कारोबार की असल जड़ छुटभैय्या नेता है जो अपने राजनीतिक हित को साधने के लिए रातोरात करोड़पति बनने की लालच के चलते शहर को सट्टे और जुए और नशे के कारोबार में धकेल दिया है। पूरे शहर में हर गली मोहल्ले में अड्डों का संचालन या संरक्षण किसी ना किसी राजनीतिक पार्टी के छुटभैया नेता के अधीन होता है।

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