छत्तीसगढ़

13 साल की छात्रा से रेप के दोषी को रायपुर कोर्ट ने सुनाई 20 साल की सजा

Shantanu Roy
30 Sept 2026 3:55 PM IST
13 साल की छात्रा से रेप के दोषी को रायपुर कोर्ट ने सुनाई 20 साल की सजा
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छग
Raipur. रायपुर। राजधानी रायपुर के खमतराई थाना क्षेत्र में 13 साल 11 महीने की नाबालिग छात्रा से दुष्कर्म के मामले में स्पेशल पॉक्सो कोर्ट ने आरोपी मुनेंद्र ध्रुव को दोषी ठहराते हुए 20 साल के सश्रम कारावास की सजा सुनाई है। पीड़िता कक्षा छठवीं की छात्रा थी। प्रथम फास्ट ट्रैक स्पेशल पॉक्सो कोर्ट के जज अच्छेलाल काछी ने मामले में फैसला सुनाया। पीड़िता की ओर से विशेष लोक अभियोजक डालेश्वर साहू ने पैरवी की। कोर्ट रिकॉर्ड के अनुसार 10 दिसंबर 2025 की शाम करीब 7 बजे नाबालिग अपने घर से बिना बताए निकल गई थी। काफी समय तक वापस नहीं लौटने पर परिजनों ने आसपास के इलाकों और रिश्तेदारों के यहां उसकी तलाश की, लेकिन उसका कोई पता नहीं चला। इसके बाद 11 दिसंबर को उसकी मां ने खमतराई थाने में घटना की सूचना दी।
पुलिस ने गुम इंसान की रिपोर्ट दर्ज कर नाबालिग की तलाश शुरू की। अगले दिन 12 दिसंबर को वह अपनी मां के साथ थाने पहुंची। पुलिस ने उसका बरामदगी पंचनामा तैयार किया और इसके बाद 13 दिसंबर को उसका मेडिकल परीक्षण कराया गया। अभियोजन के अनुसार 10 दिसंबर की रात नाबालिग घर के पास स्थित नाश्ते की दुकान पर भजिया खाने गई थी। इसी दौरान आरोपी मुनेंद्र ध्रुव ने उसे इशारे से बुलाया और अपने घर ले गया। आरोप था कि आरोपी ने वहां नाबालिग के साथ दुष्कर्म किया।
अगले दिन सुबह करीब चार बजे आरोपी ने नाबालिग को घर जाने के लिए कहा। इसके बाद वह कुछ समय तक आसपास घूमती रही और शाम करीब छह बजे अपने घर पहुंची। घर लौटने के बाद उसकी मां उसे लेकर खमतराई थाने पहुंची और पुलिस को पूरे घटनाक्रम की जानकारी दी। जांच के दौरान यह बात भी सामने आई कि आरोपी और नाबालिग पहले से एक-दूसरे को जानते थे और दोनों के बीच बातचीत होती थी। अभियोजन के मुताबिक आरोपी नाबालिग से प्यार और शादी करने की बात कहता था। इसी दौरान दोनों के बीच मेलजोल बढ़ा था।
कोर्ट रिकॉर्ड के अनुसार इससे पहले 20 अगस्त 2025 को भी आरोपी नाबालिग को अपने घर ले गया था। उस समय पीड़िता के माता-पिता काम पर गए थे और उसकी दादी भी घर पर मौजूद नहीं थी। आरोप था कि इसी दौरान आरोपी ने नाबालिग के साथ जबरन शारीरिक संबंध बनाए। मामले की सुनवाई के दौरान आरोपी ने अपने ऊपर लगाए गए आरोपों से इनकार किया और ट्रायल का सामना किया। बचाव पक्ष ने आरोपी की उम्र करीब 22 वर्ष होने, उसके गरीब मजदूर होने और पूर्व में किसी मामले में दोषसिद्धि नहीं होने का हवाला देते हुए न्यूनतम सजा देने की मांग की।
कोर्ट ने अभियोजन और बचाव पक्ष की दलीलों के साथ उपलब्ध साक्ष्यों पर विचार करने के बाद आरोपी को दोषी ठहराया। इसके बाद उसे 20 वर्ष के सश्रम कारावास की सजा सुनाई गई। अदालत ने पीड़िता को हुई शारीरिक और मानसिक क्षति के साथ उसके पुनर्वास को ध्यान में रखते हुए 5 लाख रुपए प्रतिकर देने की अनुशंसा भी की है। यह अनुशंसा जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, रायपुर से की गई है। कोर्ट ने कहा कि पीड़िता को हुई शारीरिक और मानसिक पीड़ा तथा घटना के मनोवैज्ञानिक प्रभाव को देखते हुए प्रतिकर दिया जाना उचित है। यदि पीड़िता को पहले कोई अंतरिम क्षतिपूर्ति दी गई है तो उस राशि को 5 लाख रुपए के प्रतिकर में समायोजित किया जाएगा।
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