छत्तीसगढ़

छग के विवाद को ठंडा करने में राहुल ने दिखाई परिपक्वता

Rounak Dey
30 Aug 2021 10:47 AM IST
छग के विवाद को ठंडा करने में राहुल ने दिखाई परिपक्वता
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कप्तान-कप्तान खेल की इन-साइड स्टोरी...

अकिफ फरिश्ता (दिल्ली से ) अतुल्य चौबे (रायपुर से)

रायपुर। कहा जा रहा था कि ढाई-ढाई साल मुख्यमंत्री वाली बात पार्टी के भीतर की बात थी लेकिन मीडिया की वजह से यह ज्यादा चर्चा में आई जिससे इस खबर को बल व ताकत मिली, जबकि वरिष्ठ नेताओं ने ऐसी बातों से साफ तौर पर इंकार किया था। विधायक भी अपनी राय रखने दिल्ली कूच किए, जिस पर बगैर किसी बड़े आलाकमान से अनुमति लिए पीएल पुनिया ने ट्विटर पर ट्वीट कर विधायकों को कड़े शब्दों में निर्देश देकर दिल्ली नहीं आने की हिदायत दे डाली तदुपरांत प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष ने भी सोशल मीडिया के माध्यम से अपने आप को पालक बताते हुए अतिउत्साह में विधायकों को दिल्ली न जाने की बात कही, जिससे यह बात प्रतीत हुई कि यह सब अपनी डफली अपना राग अलापने में मशगुल दिखे, पार्टी और सरकार की चिंता किसी को नहीं थी। ये अतिउत्साह और किसी निर्धारित लक्ष्य को पूरा करने के उद्देश्य से गैर जिम्मेदाराना बयान दे डाले जबकि मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने स्पष्ट किया कि विधायकों को अपने नेता से मिलने जाने में बुराई क्या है? हालांकि इस विवाद को तात्कालिक तौर पर शांत करने में राहुल गांधी ने जबर्दस्त राजनीतिक सूझ-बूझ और परिपक्वता का परिचय देते हुए न सिर्फ माहौल को पंजाब और राजस्थान की तरह तल्ख बनने से संभाला बल्कि भूपेश बघेल और टीएस सिंहदेव दोनों को अपने फैसले को लेकर आश्वस्त और भरोसा दिलाने में भी सफल रहे।

दिल्ली के गलियारों से उच्च राजनीतिक सूत्रों से जो खबर मिल रही है उसके मुताबिक राहुल गांधी ने भूपेश बघेल से मिलने से पहले कांग्रेस के कई वरिष्ठ नेताओं के साथ एक गोपनीय बैठक की, जिसमें अंबिका सोनी, तारिक अनवर, केसी वेणुगोपाल, पवन बंसल, हरीश रावत सहित पीएल पुनिया को भी बुलाया गया था। बैठक में भूपेश बघेल को मुख्यमंत्री बनाए रखने को लेकर चर्चा हुई। जानकार यह बताने से भी नहीं चूकते की सभी वरिष्ठ नेताओं ने भूपेश बघेल को एकमत और पूर्ण सहमति से मुख्यमंत्री बनाए रखने के पक्ष में अपना निर्णय राहुल गांधी को सुनाया था। तत्पश्चात राहुल गांधी ने पूरी बैठक का सार निकालकर सोनिया गांधी से चर्चा करने के उपरांत भूपेश बघेल को 4 बजे के बाद बैठक के लिए बुलाया। उच्च सूत्रों के अनुसार इस विवाद को सुलझाने में सबसे महत्वपूर्ण भूमिका प्रियंका गांधी द्वारा निभाई गई, जिन्होंने अपनी राजनीतिक सूझबूझ का परिचय देते हुए आने वाले सभी चुनाव को ध्यान में रखकर भूपेश बघेल जो पार्टी में ओबीसी का देश में सबसे बड़ा चेहरा हैं के माध्यम से आगामी चुनाव को प्रभावित करने की रणनीति पर विचार कर रही हैं। सुनने में तो यहां तक आया कि बैठक में पीएल पुनिया ने बड़े नेताओं का इरादा देख और आलाकमान के नजरिए को भांपते हुए तत्काल अपना पैंतरा बदला और जो उनके द्वारा 1 दिन पहले मीडिया में फैलाई गई बातें विधायकों को नहीं बुलाया गया विधायक अपने अनुशासन पर रहे, इस बयान को लेकर पीएल पुनिया को गलती का एहसास होने लगा तब तत्काल बड़े नेताओं की भाषा के साथ अपने बोल मिलाते दिखे। राहुल गांधी ने राजनीतिक खिलाडिय़ों के जैसा अपना निर्णय देकर पूरे देश के कांग्रेसजनों को एक मैसेज दिया। आलाकमान के ऊपर मीडिया के माध्यम से दबाव बनाने वाले के ऊपर ज्यादा नरमी नहीं बरती जाएगी इसका परिणाम यह हुआ आलाकमान अगले हफ्ते छत्तीसगढ़ की 3 से 4 दिनों की राजनीतिक यात्रा पर योजना बना रहा है, ऐसी खबरें आ रही हैं।

बताया जा रहा है कि प्रवास के दौरान राहुल गांधी एक दिन बस्तर, 1 दिन सरगुजा संभाग और 1 दिन रायपुर गुजारने के उपरांत सभी कांग्रेसजनों से अलग-अलग जिले के अनुसार कार्यकर्ताओं-नेता से मिलेंगे। ऐसा अनुमानित कार्यक्रम बनने की संभावना है। राहुल गांधी छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा शुरू की गई योजनाओं और ग्रामीण अंचल में पार्टी की घोषणा पत्र के अनुसार कराए जा रहे कार्यो को रूबरू होकर देखेंगे। राहुल गांधी पूरे देश और दुनिया कोमीडिया के माध्यम से अपनी जानकारी साझा करने का प्रोग्राम राहुल गांधी के दिमाग में चल रहा है। और इसी के आधार पर कांग्रेस सरकार द्वारा अमल में लाए जा रहे व्यापक जनहित के कार्यों को केन्द्र सरकार के लिए चुनौती के रूप में भी दिखाने का प्रयास किया जाएगा। हो सकता है इस दौरे के कार्यक्रम में टीएस बाबा का खेमा अपनी बची खुची इज्जत बचाने के लिए फिर से विवाद को हवा देने के साथ सभी बड़े नेताओं पर दबाव बनाने की कोशिश करेंगे। बाबा जब रायपुर लौटे तब उनके साथ एकमात्र विधायक शैलेंद्र पांडे, प्रदेश यूथ कांग्रेस के अध्यक्ष कोको पाढ़ी व कुछ पुराने जोगी समर्थक नेतागण सहित जोगी के बिलासपुर से दबंग युवा नेता ही थे.

इनके अलावा कोई और विधायक अथवा बड़े नेता नजर नहीं आए। जोगी के समर्थक जिस तरह विगत 4-6 महीने से बाबा से निकटता बढ़ा रहे थे उससे लगता है कि जोगी का कुनबा बाबा के साथ मिलकर अपना राजनीतिक बदला पूरा करने तैयार कर बैठा है। चूंकि रेणु जोगी प्राय:-प्राय: पार्टी के सभी कार्यक्रमों से दूर जाकर स्वयं की पार्टी के लिए काम करते देखी गईं हैं और लगातार जोगी कांग्रेस को आगे बढ़ाने के लिए उसने प्रदेश स्तरीय दौरे भी किए तथा रणनीति के तहत स्व. अजीत जोगी एवं अमित जोगी के कट्टर पुराने समर्थक जो बहती गंगा में हाथ धोने के लिए आतुर दिख रहे थे, सभी ने टीएस बाबा को अपना नेता मानकर उल्टी पट्टी पढ़ाने का कार्य आग में घी डालने जैसा किया। विगत डेढ़ दो सालों से देखा गया है कि अधिकांश जोगी पार्टी और उसके नेता और पदाधिकारी प्रदेश कांग्रेस कमेटी से लेकर सरकार तक अपना अधिकार क्षेत्र सधे तरीके से बढ़ाते जा रहे हैं और अजीत जोगी खेमे के नेताओं ने तथा अमित जोगी के समर्थक युवा नेता कहलाने वाले नेतागण वर्तमान में प्रदेश कांग्रेस कमेटी में अपना कब्जा जमा लिया है अधिकांश पदों में 2001-2003 समय के अजीत जोगी और अमित जोगी के समर्थक ही प्रदेश कांग्रेस कमेटी में कब्जा जमाने में सफल हो गए। इन्हीं सभी नेताओं को अमित जोगी ने अपने पिता स्व. अजीत जोगी के माध्यम से बाहर का रास्ता यह कह कर निकलवाया था कि वे सभी मुखबिर व बेइमान है इन पर भरोसा नहीं किया जा सकता। अब ये सभी नेता मिलकर खेमा बाजी करने से बाज नहीं आ रहे हैं और दो की लड़ाई में तीसरे की बाजी बनाने में आतुर दिख रहे हैं। वहीं दूसरी खबर यह है कि डा. रेणु जोगी ने स्पष्ट कर दिया कि सोनिया गांधी यदि कहेंगी तो पार्टी को हम कांग्रेस में मर्ज करने को तैयार हैं। हालांकि इस तरह की खबर राजनीतिक गलियारों के अलावा कोई बड़े प्लेट फार्म पर सुनाई नहीं दी।

कुल मिलाकर राजनीतिक सोच रखने वाले पैतरेबाजों से ओतप्रोत जोगी खेमा विगत कुछ दिनों से प्रदेश की राजनीति में अंदरूनी तौर पर मजबूत होता जा रहा है और उनका दखल भी बढ़ते जा रहा है जो कांग्रेस पार्टी के लिए चिंता का विषय है क्योंकि आम कांग्रेसजनों का पहले से ही मानना था कि जोगी के रहते कांग्रेस पार्टी सत्ता में नहीं आ सकती इसी को आधार मानकर राहुल गांधी प्रदेश नेताओं की बात से सहमत होते हुए जोगी परिवार से किनारा किया था, तदुपरांत ही प्रदेश कांग्रेस की सरकार प्रचंड मतो से बन सकी।

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