छत्तीसगढ़

देवभोग दूध की परिवहन व्यवस्था पर सवाल, जांच की मांग

Shantanu Roy
24 Oct 2026 6:48 PM IST
देवभोग दूध की परिवहन व्यवस्था पर सवाल, जांच की मांग
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Jagdalpur. जगदलपुर। छत्तीसगढ़ के बस्तर संभाग में दूध और दुग्ध उत्पादों के परिवहन को लेकर खाद्य सुरक्षा मानकों पर सवाल उठने लगे हैं। जगदलपुर के पास ग्राम सेमरा स्थित देवभोग दुग्ध संयंत्र से दूध एवं दुग्ध उत्पादों को खुले वाहनों के माध्यम से बाजार तक पहुंचाए जाने का आरोप लगाया गया है। इसे लेकर स्थानीय स्तर पर स्वच्छता और खाद्य सुरक्षा नियमों के पालन पर चिंता जताई जा रही है। लोगों की मांग है कि मामले की जांच कराई जाए और यदि परिवहन में निर्धारित नियमों का उल्लंघन पाया जाता है, तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जाए।

दूध जैसे संवेदनशील खाद्य पदार्थ की सुरक्षा जरूरी
खाद्य पदार्थों के निर्माण, भंडारण और परिवहन के दौरान स्वच्छता बनाए रखना बेहद जरूरी है। दूध को संवेदनशील खाद्य पदार्थ माना जाता है, इसलिए इसके उत्पादन से लेकर उपभोक्ताओं तक पहुंचने के बीच उचित साफ-सफाई और सुरक्षित रखरखाव का ध्यान रखना आवश्यक है। परिवहन के दौरान धूल, गंदगी और बाहरी प्रदूषण से दूध एवं दुग्ध उत्पादों को बचाना भी महत्वपूर्ण है। खाद्य सुरक्षा के निर्धारित मानकों का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि उपभोक्ताओं तक पहुंचने वाला खाद्य पदार्थ स्वच्छ और सुरक्षित बना रहे। यदि परिवहन के दौरान आवश्यक सावधानियां नहीं बरती जाती हैं, तो खाद्य पदार्थ की गुणवत्ता प्रभावित होने की आशंका हो सकती है।

देवभोग दूध के परिवहन को लेकर उठे सवाल
जानकारी के अनुसार, बस्तर संभाग में कई संस्थानों द्वारा दूध और दुग्ध उत्पादों के परिवहन के लिए बंद एवं स्वच्छ वाहनों का इस्तेमाल किया जा रहा है। इससे खाद्य सामग्री को धूल और बाहरी गंदगी से सुरक्षित रखने में मदद मिलती है। दूसरी ओर, छत्तीसगढ़ शासन द्वारा संचालित देवभोग दूध एवं दुग्ध उत्पादों के परिवहन को लेकर सवाल उठाए गए हैं। आरोप है कि ग्राम सेमरा स्थित देवभोग दुग्ध संयंत्र से दूध और दुग्ध उत्पादों को खुले वाहनों में भरकर बाजार तक पहुंचाया जा रहा है। इस व्यवस्था को लेकर स्थानीय स्तर पर आपत्ति जताई जा रही है। हालांकि, खुले वाहनों में परिवहन किए जाने के आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि और संबंधित खाद्य सुरक्षा मानकों के उल्लंघन की आधिकारिक जानकारी सामने आना अभी बाकी है।

निजी संस्थानों से तुलना कर पूछे जा रहे सवाल
स्थानीय स्तर पर यह सवाल भी उठाया जा रहा है कि जब निजी संस्थान दूध जैसे संवेदनशील खाद्य पदार्थों के परिवहन में स्वच्छता और सुरक्षा पर ध्यान दे रहे हैं, तो शासकीय संस्था में भी इन मानकों का पालन सुनिश्चित क्यों नहीं किया जा रहा है। लोगों का कहना है कि खाद्य सुरक्षा से जुड़े नियम सभी संबंधित संस्थानों के लिए महत्वपूर्ण हैं। किसी संस्था के सरकारी या निजी होने से उपभोक्ताओं तक सुरक्षित खाद्य सामग्री पहुंचाने की जिम्मेदारी कम नहीं हो जाती। इसलिए देवभोग दुग्ध संयंत्र से जुड़े परिवहन के तरीके की जांच कर वास्तविक स्थिति स्पष्ट की जानी चाहिए।

खाद्य विभाग की भूमिका पर भी नजर
मामले को लेकर खाद्य विभाग और संबंधित अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठ रहे हैं। मांग की जा रही है कि परिवहन में इस्तेमाल किए जा रहे वाहनों की जांच की जाए और यह देखा जाए कि दूध एवं दुग्ध उत्पादों को सुरक्षित रखने के लिए आवश्यक इंतजाम किए गए हैं या नहीं। यदि जांच के दौरान नियमों के उल्लंघन की पुष्टि होती है, तो संबंधित जिम्मेदारों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जानी चाहिए। साथ ही, परिवहन व्यवस्था में जरूरी सुधार कर खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता और स्वच्छता सुनिश्चित की जानी चाहिए।

आधिकारिक पक्ष का इंतजार
फिलहाल इस मामले में संबंधित विभाग और देवभोग दुग्ध संयंत्र का आधिकारिक पक्ष सामने आना बाकी है। यह भी स्पष्ट नहीं है कि परिवहन व्यवस्था को लेकर खाद्य विभाग ने कोई निरीक्षण किया है या नहीं। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि संबंधित अधिकारी मामले का संज्ञान लेकर जांच करते हैं या नहीं। जांच के निष्कर्षों से ही स्पष्ट हो सकेगा कि खुले वाहनों से दूध एवं दुग्ध उत्पादों का परिवहन किन परिस्थितियों में किया जा रहा है और क्या इसमें निर्धारित खाद्य सुरक्षा मानकों का उल्लंघन हुआ है।
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