छत्तीसगढ़

आयुर्वेदिक दवा खरीदी महंगे दर से

jantaserishta.com
24 Aug 2026 10:41 AM IST
आयुर्वेदिक दवा खरीदी महंगे दर से
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अपात्र कंपनियों को दवा खरीदी का ठेका देने की तैयारी
जिन कंपनियों के खिलाफ ईओडब्ल्यू में शिकायत उन्हीं को उपकृत किया जा रहा
2022 में EOW में जिन कंपनियों के खिलाफ शिकायत हुई थी अब 2026 में उन्हीं को काम देने की तैयारी
रायपुर (जसेरि)। छत्तीसगढ़ मेडिकल सर्विसेज कॉरपोरेशन लिमिटेड (CGMSC) में आयुर्वेदिक दवाओं की खरीदी को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। आरोप है कि नई टेंडर प्रक्रिया चल रही है, फिर भी पुराने रेट कॉन्ट्रैक्ट को दोबारा बढ़ाने की कोशिश हो रही है। इतना ही नहीं जिन कंपनियों के खिलाफ ईओडब्ल्यू में शिकायत दर्ज हुई है उन्हीं कंपनियों को फिर से दवा सप्लाई का ठेका देने की तैयारी एंजेसी कर रही है। जिन कंपनियों के खिलाफ 2022 में ईओडब्ल्यू में शिकायत दर्ज की गई है। जिन्हे फर्जी दस्तावेजों के आधार पर पात्र कर रेट कान्टेक्ट कर आयुर्वेदिक दवाओं का क्रय आदेश देने का आरोप है, फिर से उन्हीं कंपनियों को 2026 के आयुर्वेद के नए निविदा में पात्र कर दवा क्रय करने की तैयारी है।
CGMSC छत्तीसगढ़ में सरकारी अस्पतालों के लिए दवाएं खरीदने वाली संस्था है। इसमें आयुर्वेदिक दवाओं की सप्लाई को लेकर नई शिकायत सामने आई है। शिकायतकर्ता का कहना है कि नई टेंडर प्रक्रिया लगभग पूरी हो चुकी है, फिर भी पुराने करार को आगे बढ़ाने की तैयारी दिख रही है। 22 जून कोआयुर्वेदिक दवाओं की खरीदी के लिए चार नए टेंडर जारी किए गए थे, 14 जुलाई को टेंडर में आवेदन की आखिरी तारीख निकल चुकी है। टेंडर का पहला चरण खुल चुका है और दावा-आपत्ति की प्रक्रिया भी पूरी हो चुकी है। इससे पहले 20 नवंबर 2025 को भी दो टेंडर जारी हुए थे, लेकिन वह प्रक्रिया लंबे समय तक अटकी रही। इसी बीच पुराने रेट कॉन्ट्रैक्ट को छह महीने के लिए बढ़ा दिया गया था। अब 7 अगस्त को जारी एक आदेश में कुछ चुनिंदा कंपनियों से पुराने करार पर राय-सुझाव मांगे जाने की बात सामने आई है।
शिकायतकर्ता का मानना है कि पुराने करार को फिर से बढ़ाने से खुली प्रतिस्पर्धा प्रभावित हो सकती है। आरोप है कि इससे किसी खास कंपनी को फायदा मिलने की गुंजाइश बन सकती है। सवाल उठाया गया है कि जब नई निविदा प्रक्रिया आखिरी चरण में है, तो पुराने करार वाली प्रक्रिया की जरूरत ही क्यों पड़ी। इस संबंध में सीजीएमएससी का पक्ष भी सामने आया है। एमडी रितेश अग्रवाल ने पुराने करार को बढ़ाने की बात से साफ इनकार किया है। उनका कहना है कि रेट कॉन्ट्रैक्ट बढ़ाने की फिलहाल कोई योजना नहीं है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि नई टेंडर प्रक्रिया पूरी की जाएगी और इसी के आधार पर आगे दवाओं की खरीदी होगी। शिकायतकर्ता ने पूरे मामले की जांच की मांग की है। अभी यह मामला जांच के दायरे में है, इसलिए स्थिति साफ होने में कुछ समय लग सकता है। लोगों की सेहत से जुड़ा यह मामला होने के कारण पारदर्शिता की उ मीद जताई जा रही है।
सीजीएमएससी अपनी कारगुजारियों के कारण हमेशा सुर्खियों में रहा है। अमानक दवाईयों की खरीदी हो या अस्पताल के उपकरण और फर्नीचर खऱीदी मामले में 1000 करोड़ के भ्रष्टाचार को नजरअंदाज कर भ्रष्ट और अक्षम अधिकारियों मनमानी का अड्डा बना हुआ है।
आयुर्वेदिक दवा खरीदी मामले में भ्रष्टाचार औऱ विवाद उजागर होने के बाद विभागीय मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने उस मामले का संज्ञान लेकर स्वास्थ्य सचिव को दिए कार्यवाही के निर्देश का न तो एमडी सीजीएमएससी ने पालन किया और न ही कोई कार्रवाई हुई उल्टे आयुर्वेदिक निविदा मामले आरोपी को लीपापोती और अपात्रों को पात्र बनाने का ठेका दे दिया गया। वर्ष 2023 के दर और 2026 के दर में 25 से 30 प्रतिशत अधिक खर्च आएगा। जिससे सरकार को करोड़ों का नुकसान हो सकता है। जिसमें रेट कांटेक्ट डेढ़ साल पहले समाप्त हो गया है। पूरे प्रदेश में आयुर्वेदिक दवाइयां की कमी लगातार देखी जा रही है जिसको गंभीरता से लेते हुए स्वास्थ्य सचिव के 2024 में दिए गए निर्देश के अनुसार सीजी एमएससी के प्रबंध संचालक के द्वारा 2023 के रेट कांटेक्ट को एक वर्ष एक्सटेंशन करने का प्रस्ताव स्वास्थ्य सचिव को भेजा गया था। जिसको स्वास्थ्य सचिव स्वास्थ्य मंत्री वित्त सचिव और वित्त मंत्री के द्वारा परीक्षण करने के उपरांत 6 महीने का एक्सटेंशन सीजी एमएससी के एमडी को प्रदान किया गया परंतु सीजी एमएससी के एमडी की गलत नियत और अक्षम कार्य क्षमता के चलते एक माह बीत जाने के बाद भी उस एक्सटेंशन आदेश का पालन नहीं हुआ ।
2022 में जिन कंपनियों को ईओडब्ल्यू ने शिकायत के बाद अपात्र कर दिया था। जांच में पाया गया था फर्जी दस्तावेज। उन्हीं कंपनियों को फिर से नए टेंडर में शामिल किया गया। दवा कंपनियों के नाम पैटलाड महल आरोग्य, हिमालया रिसर्च लेब्रोटरी, ज मू उपकरण फार्मास्टियूटिकल्स, भोपाल मंगलम बायोटेक, भूषण फार्मास्टियूटिकल्स, रोनपाल बायोटेक, इंदू केयर फार्मा के सभी कंपनियों के खिलाफ राज्य अपराध ब्यूरो में लिखित शिकायत हुई थी। उसके पश्चात सभी कंपनी अपात्र कैटेगरी में आ गई। वर्तमान में भी नए टेंडरों में यही कंपनियां दस्तावेजों की कमी के साथ टेंडर प्रतिक्रिया में भागीदार बनी है। संविदा नियुक्ति वाला हितेश साहू टेंडर फर्जीवाला का मुख्य कर्ता-धर्ता।
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