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छत्तीसगढ़

प्रदेश के निजी अस्पतालों ने कोरोना आपदा को बनाया लाभ का अवसर

Admin2
8 April 2021 6:12 AM GMT
प्रदेश के निजी अस्पतालों ने कोरोना आपदा को बनाया लाभ का अवसर
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संवेदनहीन प्रबंधन इलाज के नाम पर वसूल रहें लाखों का बिल

निजी अस्पतालों में कम से कम 1 लाख जमा करने पर ही मरीजों की लेते हैं भर्ती

24 घंटे के अंदर ही 3 से 4 लाख का बिल बनाया जाता है, चाहे मरीज ठीक हो या मौत हो जाए

मरीज के परिजन के द्वारा विरोध करने पर बाउंसरों द्वारा बेइज्जती की जाती है

छुटभ्भैया नेताओं का अस्पताल प्रबंधन से सांठ-गांठ होने के कारण पार्षद स्तर के नेताओं की भी अस्पताल प्रबंधन बात नहीं सुनता

जसेरि रिपोर्टर

रायपुर। प्रदेश में गरीब और मरीजों की सेवा के लिए स्थापित निजी अस्पतालों में लूट मचा रखी है। चार दिन का इलाज का खर्च चार लाख सुनकर तो मरीज का मौत होना तय है। मरीज के अस्पताल पहुंचते ही इलाज का मीटर ऐसे दौड़ता है कि जब तक मरीज के परिजन हॉफ नहीं जाए। रायपुर, दुर्ग, राजनांदगांव, में ऑक्सीजन बेड के नाम पर लूट मचा दी है। जबकि मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने बुधवार की केबिनेट बैठक में निजी अस्पताल प्रबंधन को स्पष्ट कहा था कि मरीज की गंभीरता को देखते हुए अस्पताल प्रबंधन बेड, वेंटिलेटर की सुविधा मरीजों को उपलब्ध कराए न कि किसी सिफारिश के आधार पर गंभीर मरीज की जगह सिफारिशी को दी जाए। उनके बाद भी जो खबरे आ रही है वह मानवता को कलंकित कर देने वाला ही है। कोरोना की तवाही का मंजर छत्तीसगढ़ में साफ देखा जा रहा है। कोरोना मरीजों की मरने की रफ्तार कम होने का नाम नहीं ले रहा है। कोरोना संक्रमण के सामने दो विकल्प है सरकारी और निजी अस्पताल की व्यवस्था भी चरमराने लगी है। सरकारी अस्पतालों में तो मरीजों को रखने की जगह नहीं है ऐसे में मजूबरन निजी अस्पताल में इलाज कराने मरीज को भर्ती कराने के अलावा कोई तीसरा रास्ता नहीं है। निजी अस्पतालों में कोरोना मरीजों के लिए बमुश्किल बिस्तर और इलाज का इंजाम हो पा रहा है। निजी अस्पतालों में तो इलाज शुरू होने से पहले टेस्ट और अन्य जांच के नाम पर भारी भरकम रकम ली जा रही है। मरीज का इलाज हो और वो ठीक हो जाए तो भी तान से चार लाख का बिल थमाया जा रहा है। वहीं मरीज की मौत होने पर भी इलाज के नाम पर पूरा पैसा वसूला जा रहा है।

इंजेक्शन के नाम पर भारी लूट : कोरोना काल में कोविड मरीजों के साथ दवाइयों और इंजेक्शन को लेकर भारी लूटमार मचा हुआ है। जिसके जो मन में आ रहा है वसूल कर रहा है। कोरोना मरीजों को लगाए जाने वाले रेमडेसिवर इंजेक्शन की वास्तविक कीमत 899 रुपए है,उसे प्रदेश के दवा कारोबारी और निजी अस्पताल प्रबंधन के मेडिकल स्टोर्स वाले 4800 और 5400 रुपए में बेच रहे है। जिला प्रशासन और खाद्य एवं औषधि विभाग में लिखित शिकायत के बाद भी कोई एक्शन नहीं लिया जा रहा है।

राजनांदगांव में सिलेंडर के नाम पर लूट

राजनांदगांव मेडिकल कालेज का अमला अपनी गलतियों को ठीक नहीं कर पा रहा है। आक्सीजन सिलेंडर के नाम पर सप्लायर की वकाया राशि 22 लाख का बुगतान आठ महीने से अटका पड़ा है जिसकी वजह से सिलेंडर की आपूर्ति बाधित है और सजा मरीजों को भुगतना पड़ रहा है। मेडकल कालेज अस्पताल पेंड्री में आक्सीजन सप्लाई के लिए तकरीबन 3 करोड़ की लागत से बनाया गया प्लांट भी आपूर्ति नहीं कर पा रहा है।

एमआरपी रेट पर ही दवाई बेच रहे

एक समाजसेवी ने बताया किनिजी अस्पतालों एवं मेडिकल स्टोर्स में उपरोक्त दवाइयों के अलावा अन्य दवाइयों का भी एमआरपी रेट से दवाई की कीमत वसूला जा रहा है। सिपला लिमिटेड मुंबई -एमआरपी 4000, होलसेल 880+जीएसटी, हेटरो हेल्थ केयर हैदराबाद -एमआरपी 5400, होलसेल 850+जीएसटी, जुब्लिएंट लाइफसाइंसेस नोएडा -एमआरपी 4800, होलसेल 1000+जीएसटी, इलिया लेबोर्टिज अर्जेंटिना-एमआरपी 3900, होलसेल 1000+जीएसटी, डॉक्टर रेडिस हैदराबाद -एमआरपी 5400, होलसेल 850+जीएसटी।

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