छत्तीसगढ़

पाठ्य पुस्तक निगम में 5.87 करोड़ का मुद्रण घोटाला उजागर, EOW ने पेश किया चालान

Shantanu Roy
31 July 2025 10:11 PM IST
पाठ्य पुस्तक निगम में 5.87 करोड़ का मुद्रण घोटाला उजागर, EOW ने पेश किया चालान
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छग
Raipur. रायपुर। छत्तीसगढ़ पाठ्य पुस्तक निगम में एक बड़े वित्तीय घोटाले का खुलासा हुआ है। आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो (EOW) ने वर्ष 2009-10 में हुए करोड़ों रुपये के मुद्रण घोटाले में निगम के तत्कालीन वरिष्ठ अधिकारियों और दो प्रिंटिंग एजेंसियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करते हुए विशेष भ्रष्टाचार निवारण न्यायालय रायपुर में लगभग 2000 पन्नों का चालान पेश किया है। यह चालान प्रकरण में दर्ज प्राथमिक जांच और साक्ष्यों के आधार पर तैयार किया गया है।
क्या है मामला?
यह पूरा मामला वर्ष 2009-10 में कक्षा 3 और 4 के विद्यार्थियों के लिए एमजीएमएल कार्ड्स (Multi Grade Multi Level Learning Cards) की छपाई से जुड़ा है। इस दौरान निगम के अधिकारियों ने टेंडर प्रक्रिया में नियमों की अनदेखी करते हुए रायपुर और भिलाई स्थित दो प्राइवेट प्रिंटिंग कंपनियों को नियम विरुद्ध तरीके से करोड़ों का लाभ पहुंचाया।
अनियमित भुगतान की पूरी कहानी
EOW की जांच में यह सामने आया है कि छपाई कार्य का ठेका मेसर्स प्रबोध एंड कंपनी, रायपुर तथा मेसर्स छत्तीसगढ़ पैकेजर्स प्रा. लि., भिलाई को दिया गया था।
प्रबोध एंड कंपनी को कक्षा 3 और 4 के हिंदी और गणित विषय के 8000-8000 सेट एमजीएमएल कार्ड्स छापने के लिए ₹3.82 करोड़ का भुगतान किया गया।
छत्तीसगढ़ पैकेजर्स को पर्यावरण विषय के कार्ड्स के लिए ₹2.04 करोड़ दिए गए।
कुल मिलाकर ₹5.87 करोड़ की राशि का भुगतान हुआ, जबकि नियमानुसार केवल ₹1.83 करोड़ ही देना था। यानी कुल ₹4.03 करोड़ का अतिरिक्त भुगतान हुआ।
इस अतिरिक्त भुगतान का बड़ा हिस्सा डाई कटिंग, प्रोसेसिंग, लैमिनेशन जैसे कार्यों के नाम पर किया गया, जबकि ये कार्य पहले से ही ठेका शर्तों में शामिल थे और इसके लिए अलग से कोई राशि देय नहीं थी।
सेवा कर और TDS काटने के बाद भी हुआ 3.61 करोड़ का अनियमित भुगतान
भुगतान की गई राशि में से TDS और सेवा कर काटने के बावजूद वास्तविक भुगतान की गई राशि ₹3.61 करोड़ से अधिक बताई गई, जो कि गंभीर वित्तीय अनियमितता का प्रमाण है।
इनके खिलाफ पेश हुआ चालान
प्रकरण में अब तक चार आरोपियों के खिलाफ चालान विशेष न्यायालय (भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम), रायपुर में पेश किया गया है:
सुभाष मिश्रा – तत्कालीन महाप्रबंधक, छत्तीसगढ़ पाठ्य पुस्तक निगम
संजय पिल्ले – तत्कालीन उप प्रबंधक (मुद्रण तकनीशियन)
नंद गुप्ता – मुद्रक, मेसर्स छत्तीसगढ़ पैकेजर्स प्रा. लि., भिलाई
युगबोध अग्रवाल – मुद्रक, मेसर्स प्रबोध एंड कंपनी प्रा. लि., रायपुर
इन सभी पर भ्रष्टाचार, पद के दुरुपयोग, सरकारी धन के गबन और आपराधिक साजिश के तहत आरोप तय किए गए हैं। चालान में इन आरोपों को IPC की विभिन्न धाराओं और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की सुसंगत धाराओं के अंतर्गत दर्शाया गया है।
एक अन्य आरोपी के खिलाफ अलग से कार्रवाई
इस घोटाले में एक अन्य आरोपी जोसफ मिंज, जो कि उस समय निगम के प्रबंध संचालक थे और अब सेवानिवृत्त हो चुके हैं, के खिलाफ भी जांच पूरी हो चुकी है। उनके खिलाफ अभियोजन स्वीकृति (Prosecution Sanction) की प्रक्रिया लंबित है। स्वीकृति मिलते ही उनके विरुद्ध धारा 173(8) CrPC के तहत अतिरिक्त चालान विशेष न्यायालय में दाखिल किया जाएगा।
ईओडब्ल्यू की जांच ने खोली परतें
इस पूरे मामले में ईओडब्ल्यू ने न केवल वित्तीय दस्तावेज, भुगतान रसीदें, टेंडर की शर्तें और छपाई से संबंधित ऑर्डर शीट की जांच की, बल्कि गवाहों के बयान, एजेंसियों के रिकॉर्ड और विभागीय निर्णयों की बारीकी से पड़ताल की। जांच में यह सिद्ध हुआ कि निविदा प्रक्रिया में नियमों की अनदेखी की गई और एक पूर्व-निर्धारित योजना के तहत दोनों निजी कंपनियों को ठेका सौंपा गया।
जनता के धन से हुआ बड़ा खेल
इस घोटाले ने यह भी दिखाया कि कैसे सरकारी तंत्र में नियमों की अनदेखी करके करोड़ों की राशि का दुरुपयोग किया जा सकता है। यह पैसा दरअसल बच्चों की शैक्षणिक सामग्री में प्रयोग होना था, जिसे गलत नियत और लालच के चलते निजी लाभ के लिए उपयोग कर लिया गया।
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