छत्तीसगढ़

10 हजार रुपये रिश्वत लेने की आरोपी प्राचार्य अंजुला सोनी निलंबित

Shantanu Roy
25 Oct 2026 9:48 PM IST
10 हजार रुपये रिश्वत लेने की आरोपी प्राचार्य अंजुला सोनी निलंबित
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Janjgir-Champa. जांजगीर-चांपा। छत्तीसगढ़ के जांजगीर-चांपा जिले में रिश्वत लेने के आरोप में गिरफ्तार सरकारी स्कूल की प्राचार्य अंजुला सोनी को राज्य सरकार ने निलंबित कर दिया है। बकाया भुगतान की फाइल आगे बढ़ाने के बदले 10 हजार रुपये रिश्वत मांगने के आरोप में एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) ने उनके खिलाफ कार्रवाई की थी। इसके बाद राज्य शासन ने मामले को गंभीर कदाचरण मानते हुए निलंबन का आदेश जारी किया है। शासन के आदेश के अनुसार, निलंबन 3 सितंबर 2026 से प्रभावी माना जाएगा।

बकाया भुगतान की फाइल आगे बढ़ाने के लिए रिश्वत मांगने का आरोप
अंजुला सोनी जांजगीर-चांपा जिले के अकलतरा विकासखंड अंतर्गत किरारी स्थित शासकीय हायर सेकेंडरी स्कूल में प्राचार्य के पद पर पदस्थ थीं। उन पर शिकायतकर्ता मनीष राठौर से बकाया राशि के भुगतान की प्रक्रिया आगे बढ़ाने के बदले 10 हजार रुपये रिश्वत मांगने का आरोप लगा था। शिकायत के मुताबिक, भुगतान से संबंधित फाइल को आगे बढ़ाने के लिए कथित तौर पर रिश्वत की मांग की गई थी। सरकारी विभागों में भुगतान से जुड़ी फाइलों की प्रक्रिया निर्धारित नियमों के अनुसार पूरी की जानी चाहिए। ऐसे में किसी काम को आगे बढ़ाने के बदले रिश्वत मांगने का आरोप गंभीर माना जाता है। इसी मामले में एसीबी ने कार्रवाई करते हुए प्राचार्य को गिरफ्तार किया था। गिरफ्तारी के बाद मामले ने विभागीय स्तर पर भी गंभीरता हासिल कर ली।

3 सितंबर को ACB ने किया था गिरफ्तार
एंटी करप्शन ब्यूरो बिलासपुर की टीम ने 3 सितंबर 2026 को अंजुला सोनी के खिलाफ कार्रवाई की थी। यह कार्रवाई भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 की धारा 7 और 12 के तहत की गई थी। गिरफ्तारी के बाद उन्हें अदालत में पेश किया गया, जहां से उन्हें न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया। एसीबी की कार्रवाई के बाद मामले से संबंधित जानकारी शासन तक पहुंची। बिलासपुर स्थित एसीबी कार्यालय से प्राप्त जानकारी के आधार पर राज्य सरकार ने प्राचार्य के विरुद्ध विभागीय कार्रवाई की प्रक्रिया आगे बढ़ाई। शासन ने मामले को सरकारी सेवा में अपेक्षित आचरण के विपरीत मानते हुए निलंबन का निर्णय लिया। हालांकि, रिश्वत मांगने के आरोप में गिरफ्तारी और विभागीय निलंबन अपने आप में अंतिम न्यायिक दोषसिद्धि नहीं हैं। मामले में आरोपों का अंतिम निर्धारण संबंधित कानूनी प्रक्रिया के तहत होगा।

सिविल सेवा आचरण नियमों के उल्लंघन का मामला
राज्य शासन ने अंजुला सोनी के कथित कृत्य को छत्तीसगढ़ सिविल सेवा आचरण नियम, 1965 के नियम 3 का उल्लंघन माना है। सरकारी कर्मचारियों और अधिकारियों से सेवा के दौरान निर्धारित आचरण नियमों का पालन करने की अपेक्षा की जाती है। रिश्वत मांगने जैसे आरोप सामने आने पर संबंधित कर्मचारी के विरुद्ध विभागीय स्तर पर कार्रवाई की जा सकती है। इसी आधार पर छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण तथा अपील) नियम, 1966 के नियम 9(2) के तहत निलंबन की कार्रवाई की गई है। शासन का यह निर्णय एसीबी की कार्रवाई के बाद लिया गया है।

निलंबन अवधि में जांजगीर-चांपा रहेगा मुख्यालय
शासन द्वारा जारी आदेश में अंजुला सोनी के निलंबन की प्रभावी तारीख 3 सितंबर 2026 निर्धारित की गई है। निलंबन अवधि के दौरान उनका मुख्यालय जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय, जांजगीर-चांपा तय किया गया है। इस अवधि में उन्हें नियमानुसार जीवन निर्वाह भत्ता दिया जाएगा। निलंबन के बाद संबंधित अधिकारी या कर्मचारी को निर्धारित नियमों और शर्तों का पालन करना होता है। इस मामले में भी शासन ने मुख्यालय निर्धारित करते हुए जीवन निर्वाह भत्ते का प्रावधान लागू किया है। कुल मिलाकर, बकाया भुगतान की फाइल आगे बढ़ाने के बदले 10 हजार रुपये रिश्वत मांगने के आरोप में हुई एसीबी कार्रवाई के बाद प्राचार्य अंजुला सोनी पर विभागीय गाज गिरी है। राज्य सरकार ने नियमों के तहत उन्हें निलंबित कर दिया है। अब मामले में आगे की कानूनी प्रक्रिया के साथ संबंधित विभागीय कार्रवाई महत्वपूर्ण रहेगी।
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