छत्तीसगढ़
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू कल आएंगी छत्तीसगढ़, रायपुर से बस्तर तक होंगे बड़े कार्यक्रम
Shantanu Roy
21 Oct 2026 8:19 PM IST

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छग
Raipur. रायपुर। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू 22 और 23 अक्टूबर 2026 को दो दिवसीय छत्तीसगढ़ दौरे पर रहेंगी। इस दौरान राष्ट्रपति राजधानी रायपुर और जगदलपुर में आयोजित विभिन्न धार्मिक, सांस्कृतिक एवं सार्वजनिक कार्यक्रमों में शामिल होंगी। राष्ट्रपति के प्रस्तावित दौरे को लेकर प्रशासन ने तैयारियां तेज कर दी हैं। 22 अक्टूबर को राष्ट्रपति रायपुर में पूज्य माता हासी देवी जी के सम्मान में 200 रुपए का स्मारक सिक्का जारी करेंगी। इसके बाद नुआखाई पर्व के अवसर पर आयोजित सेवा सम्मान पर्व एवं युवा प्रबोधन कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होंगी। वहीं, 23 अक्टूबर को जगदलपुर में विश्व प्रसिद्ध बस्तर दशहरा के ऐतिहासिक मुरिया दरबार में शिरकत करेंगी। राष्ट्रपति सचिवालय ने भी दो दिवसीय दौरे की आधिकारिक पुष्टि की है।
22 अक्टूबर को रायपुर में आयोजित होंगे कार्यक्रम
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के दौरे का पहला दिन राजधानी रायपुर में निर्धारित है। जारी कार्यक्रम के अनुसार, राष्ट्रपति दोपहर 12:45 बजे रायपुर स्थित लोक भवन में पूज्य माता हासी देवी जी के सम्मान में 200 रुपए मूल्यवर्ग का स्मारक सिक्का जारी करेंगी। इसके बाद शाम 4 बजे बूढ़ापारा स्थित बलबीर सिंह जुनेजा इंडोर स्टेडियम पहुंचेंगी। यहां नुआखाई पर्व के अवसर पर आयोजित सेवा सम्मान पर्व एवं युवा प्रबोधन कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होंगी। कार्यक्रम में सामाजिक सेवा, सांस्कृतिक परंपराओं और युवाओं से जुड़े विषयों को प्रमुखता दी जाएगी। निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार, राष्ट्रपति रात्रि विश्राम रायपुर स्थित लोक भवन में करेंगी।
23 अक्टूबर को जगदलपुर पहुंचेंगी राष्ट्रपति
दौरे के दूसरे दिन शुक्रवार, 23 अक्टूबर को राष्ट्रपति रायपुर से जगदलपुर के लिए रवाना होंगी। निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार, सुबह 11 बजे राष्ट्रपति जगदलपुर स्थित प्रसिद्ध मां दंतेश्वरी मंदिर पहुंचेंगी। यहां वह माता के दर्शन कर पूजा-अर्चना करेंगी। इसके बाद दोपहर 12:45 बजे बस्तर दशहरा के अवसर पर आयोजित मुरिया दरबार और सार्वजनिक कार्यक्रम में हिस्सा लेंगी। राष्ट्रपति की प्रस्तावित उपस्थिति को लेकर बस्तर में विशेष तैयारियां की जा रही हैं।
ऐतिहासिक मुरिया दरबार में होंगी शामिल
बस्तर का विश्व प्रसिद्ध दशहरा अपनी अनूठी जनजातीय परंपराओं और धार्मिक मान्यताओं के लिए जाना जाता है। करीब 75 दिनों तक चलने वाले इस उत्सव की विशेष पहचान इसकी पारंपरिक रस्में हैं। मुरिया दरबार इस आयोजन की महत्वपूर्ण परंपराओं में से एक है। इसे जनजातीय समाज की अनोखी जन-संसद भी कहा जाता है। इस बार मुरिया दरबार जगदलपुर के लालबाग मैदान में आयोजित किया जाना प्रस्तावित है। राष्ट्रपति की उपस्थिति के कारण इस आयोजन का महत्व और बढ़ गया है।
जानिए क्या है मुरिया दरबार की परंपरा
मुरिया दरबार की शुरुआत बस्तर के राजशाही दौर से जुड़ी मानी जाती है। परंपरा के अनुसार, इस अवसर पर राजा अपनी शाही वेशभूषा त्यागकर सामान्य कपड़ों में लोगों के बीच बैठते थे। दरबार में जनजातीय समाज के लोग अपनी समस्याएं और आवश्यकताएं राजा के सामने रखते थे। इसके बाद समस्याओं के समाधान के लिए निर्देश दिए जाते थे। समय के साथ मुरिया दरबार का स्वरूप बदला है, लेकिन इसकी सांस्कृतिक पहचान आज भी बनी हुई है। इस आयोजन में बस्तर के विभिन्न परगनों के मांझी, चालकी, मेम्बर और मेम्बरीन सहित पारंपरिक प्रतिनिधि शामिल होते हैं। दरबार जनजातीय परंपराओं और सामुदायिक संवाद का महत्वपूर्ण मंच माना जाता है।
राष्ट्रपति के दौरे को लेकर सुरक्षा व्यवस्था कड़ी
राष्ट्रपति के प्रस्तावित छत्तीसगढ़ दौरे को देखते हुए रायपुर और बस्तर में सुरक्षा एवं प्रशासनिक तैयारियां की जा रही हैं। संबंधित जिला प्रशासन, पुलिस अधिकारियों और अन्य विभागों को आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं। रायपुर के स्वामी विवेकानंद विमानतल और जगदलपुर के मां दंतेश्वरी विमानतल सहित कार्यक्रम स्थलों पर सुरक्षा व्यवस्था को लेकर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। राष्ट्रपति के आगमन और आवागमन मार्गों पर भी सुरक्षा इंतजाम किए जा रहे हैं। वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों द्वारा तैयारियों की समीक्षा की गई है।
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने बताया गौरव का अवसर
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के प्रस्तावित बस्तर दौरे को छत्तीसगढ़ के लिए गौरव का अवसर बताया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि राष्ट्रपति को बस्तर आने का आमंत्रण दिया गया था। इससे पहले बस्तर के मांझी-चालकी प्रतिनिधियों ने भी उनसे क्षेत्र के दौरे का आग्रह किया था। उन्होंने बताया कि राष्ट्रपति ने आमंत्रण स्वीकार किया और 23 अक्टूबर को मुरिया दरबार में शामिल होने का कार्यक्रम तय हुआ है। राष्ट्रपति का यह दौरा छत्तीसगढ़ की जनजातीय संस्कृति, परंपराओं और ऐतिहासिक बस्तर दशहरा को राष्ट्रीय स्तर पर विशेष पहचान दिलाने का अवसर माना जा रहा है।
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