छत्तीसगढ़

खरीफ 2026 की तैयारी तेज, सहकारी समितियों में 20 हजार टन से अधिक खाद का भंडारण

Shantanu Roy
9 Jun 2026 3:58 PM IST
खरीफ 2026 की तैयारी तेज, सहकारी समितियों में 20 हजार टन से अधिक खाद का भंडारण
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Mahasamund. महासमुंद। महासमुंद जिले में खरीफ सीजन 2026 को देखते हुए किसानों को समय पर खाद और बीज उपलब्ध कराने के लिए प्रशासन ने तैयारियां तेज कर दी हैं। जिले में उर्वरक की उपलब्धता, भंडारण और वितरण पर लगातार निगरानी रखी जा रही है। कलेक्टर विनय कुमार लंगेह प्रतिदिन इसकी समीक्षा कर रहे हैं ताकि किसानों को किसी प्रकार की परेशानी न हो। यह पूरा प्रबंधन Mahasamund क्षेत्र में किया जा रहा है।

जिला विपणन अधिकारी के अनुसार जिले की 159 सहकारी समितियों में खाद का पर्याप्त भंडारण किया गया है और किसानों की मांग के अनुसार निरंतर वितरण भी जारी है। इसके अलावा निजी उर्वरक विक्रेताओं के माध्यम से भी किसानों को खाद उपलब्ध कराया जा रहा है। खरीफ 2026 के लिए जिले को कुल 60,850 टन रासायनिक उर्वरकों का लक्ष्य मिला है। इसके मुकाबले अब तक सहकारी समितियों में 20,431 टन से अधिक उर्वरक का भंडारण किया जा चुका है, जो कुल लक्ष्य का लगभग 33.58 प्रतिशत है।

भंडारित उर्वरकों में यूरिया 13,029 टन, डीएपी 2,059 टन, एनपीके 449 टन, सुपर फॉस्फेट 3,691 टन और पोटाश 1,203 टन शामिल है। वहीं अब तक किसानों को लगभग 10,691 टन उर्वरक का वितरण किया जा चुका है, और लगातार उठाव जारी है। कलेक्टर के निर्देश पर कृषि विभाग लगातार उर्वरक कंपनियों से अतिरिक्त रैक मंगाकर भंडारण क्षमता बढ़ाने में जुटा है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि खरीफ सीजन के दौरान किसी भी समय खाद की कमी न हो। प्रशासन ने साफ निर्देश दिए हैं कि सभी सहकारी समितियों और निजी विक्रेताओं पर नियमित निरीक्षण किया जाए।

खाद की कालाबाजारी, जमाखोरी और अनियमित वितरण पर कड़ी निगरानी रखी जा रही है। अधिकारियों को यह भी सुनिश्चित करने को कहा गया है कि किसानों को निर्धारित दर पर गुणवत्तायुक्त उर्वरक ही उपलब्ध हो। जिला प्रशासन ने किसानों से अपील की है कि वे केवल अधिकृत सहकारी समितियों और लाइसेंसधारी विक्रेताओं से ही पॉस मशीन के माध्यम से खाद खरीदें और हर खरीद की रसीद अवश्य लें। किसी भी प्रकार की अनियमितता या गड़बड़ी की सूचना तुरंत कृषि विभाग को देने को कहा गया है। प्रशासन का कहना है कि इस पूरी व्यवस्था का उद्देश्य किसानों को समय पर संसाधन उपलब्ध कराना और खेती-किसानी को सुचारू रूप से संचालित करना है, ताकि उत्पादन पर किसी प्रकार का नकारात्मक असर न पड़े।
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