छत्तीसगढ़

जिला अस्पताल में गर्भवती महिला और गर्भस्थ शिशु की मौत

Shantanu Roy
30 Sept 2026 3:18 PM IST
जिला अस्पताल में गर्भवती महिला और गर्भस्थ शिशु की मौत
x
छग
Korba. कोरबा। छत्तीसगढ़ के कोरबा जिला अस्पताल में आठ माह की गर्भवती महिला और उसके गर्भ में पल रहे बच्चे की मौत का मामला सामने आया है। घटना के बाद परिजनों ने अस्पताल प्रबंधन और इलाज व्यवस्था पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि तीन दिनों तक सामान्य प्रसव का इंतजार कराया गया, जबकि वे लगातार सोनोग्राफी और सिजेरियन डिलीवरी की मांग कर रहे थे। समय रहते हायर सेंटर रेफर नहीं किए जाने का भी आरोप लगाया गया है। मामले की गंभीरता को देखते हुए मेडिकल
कॉलेज प्रबंधन
ने जांच टीम गठित कर दी है। डॉ. आदित्य सिसोदिया को जांच अधिकारी बनाया गया है। हालांकि उन्होंने परिजनों के आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि मरीज को तीनों दिन उचित देखभाल दी गई और डॉक्टर नियमित रूप से राउंड लेते रहे।
जानकारी के अनुसार दीपका बस्ती निवासी ओंकारेश्वर रजक ने नवंबर 2025 में कविता से लव मैरिज की थी। कविता आठ माह की गर्भवती थी। 24 सितंबर को प्रसव पीड़ा शुरू होने पर परिजन उसे मिनीमाता शांतिनगर स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र लेकर पहुंचे। परिजनों का आरोप है कि उस समय वहां केवल महिला स्वास्थ्यकर्मी मौजूद थी और डॉक्टर उपलब्ध नहीं थे। इसके बाद 25 सितंबर को एनीमिया की स्थिति को देखते हुए कविता को मेडिकल कॉलेज से संबद्ध जिला अस्पताल रेफर किया गया। परिजनों का आरोप है कि यहां भर्ती करने के बाद तीन दिनों तक सामान्य प्रसव का इंतजार कराया गया। उनका कहना है कि उन्होंने कई बार सोनोग्राफी कराने और ऑपरेशन से प्रसव कराने की मांग की, लेकिन उनकी बात नहीं मानी गई।
परिजनों के अनुसार कविता की हालत बिगड़ने के बावजूद उसे किसी बड़े अस्पताल या हायर सेंटर रेफर नहीं किया गया। सोमवार तड़के उसकी प्रसव पीड़ा बढ़ गई, जिसके बाद उसे लेबर रूम में शिफ्ट किया गया। यहां अचानक उसकी सांसें तेज हो गईं और कुछ ही देर में उसकी मौत हो गई। परिवार का कहना है कि समय पर सिजेरियन किया जाता या महिला को हायर सेंटर भेजा जाता तो मां और बच्चे दोनों की जान बच सकती थी। घटना के बाद परिवार में मातम छा गया। अस्पताल की व्यवस्था को लेकर परिजनों ने नाराजगी जताई है।
मामले की सूचना मिलने पर अस्पताल चौकी पुलिस भी मौके पर पहुंची। कार्यपालिक दंडाधिकारी की मौजूदगी में आवश्यक कार्रवाई पूरी की गई। महिला के शव का पोस्टमॉर्टम कराया गया है। मौत के वास्तविक कारणों को स्पष्ट करने के लिए पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है। परिजनों ने यह भी आरोप लगाया कि सीएचसी और मेडिकल कॉलेज में रात के समय डॉक्टर उपलब्ध नहीं थे। उनका कहना है कि मेडिकल कॉलेज में भी रात 12 बजे से 2 बजे के बीच डॉक्टर नहीं मिले। परिवार ने जिले के स्वास्थ्य केंद्रों में रात की ड्यूटी व्यवस्था पर भी सवाल उठाए हैं।
दूसरी ओर जांच अधिकारी डॉ. आदित्य सिसोदिया ने कहा कि मरीज का ऑस खुला नहीं था, इसलिए उसे सामान्य प्रसव की संभावना को देखते हुए निगरानी में रखा गया था। उन्होंने बताया कि मरीज को तीनों दिन प्रॉपर केयर दी गई और डॉक्टरों ने नियमित राउंड लिया। डॉ. सिसोदिया के मुताबिक सोमवार सुबह महिला को अचानक घबराहट और धड़कन तेज होने की शिकायत हुई। इसके बाद उसकी हालत तेजी से बिगड़ी और मौत हो गई। उन्होंने कहा कि लेबर रूम में शिफ्ट किए जाने के समय गर्भस्थ शिशु की धड़कन नहीं थी, इसलिए उस स्थिति में सिजेरियन करने का औचित्य नहीं था।
उन्होंने यह भी कहा कि मरीज को नहीं देखे जाने का आरोप सही नहीं है और सुबह आठ बजे सीनियर रेजिडेंट डॉक्टर भी मौजूद थीं। फिलहाल पूरे मामले की जांच की जा रही है। जांच रिपोर्ट और पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। इस घटना के बाद जिला अस्पताल की प्रसूति सेवाओं, डॉक्टरों की उपलब्धता और गंभीर मरीजों के रेफरल सिस्टम को लेकर सवाल उठे हैं। अब जांच में यह स्पष्ट होगा कि इलाज में किसी स्तर पर लापरवाही हुई थी या महिला की मौत अचानक उत्पन्न हुई चिकित्सकीय जटिलता के कारण हुई।
Next Story