छत्तीसगढ़

मंतुराम वाली पेन ड्राइव में राहुल गांधी के निवास की स्ट्रिंग, जाँच का विषय

Nil dhankar
11 March 2025 5:29 PM IST
मंतुराम वाली पेन ड्राइव में राहुल गांधी के निवास की स्ट्रिंग, जाँच का विषय
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छत्तीसगढ़ की राजनीति: ब्लैकमेल की बिसात पर दो मुख्यमंत्री!

कल ED जांच के बाद ट्वीट कर फंसे बघेल

छत्तीसगढ़ राज्य के गठन के बाद से ही इसकी राजनीति में रहस्य, साजिश और अप्रत्याशित मोड़ देखने को मिले हैं। खासकर, जब राज्य के पहले मुख्यमंत्री अजीत जोगी और बाद में भूपेश बघेल की ताजपोशी हुई, तो इसके पीछे की राजनीतिक चालें और गहरे राज आज तक पूरी तरह उजागर नहीं हुए।

अजीत जोगी: एक ब्लैकमेल के बाद बनी सरकार? ऐसा कांग्रेस हलकों में साल 2003 से पुख्ता चर्चा होती रही है...

साल 2000 में जब छत्तीसगढ़ बना, तब किसी को अंदाजा नहीं था कि प्रदेश का पहला मुख्यमंत्री कौन होगा। कांग्रेस के पास कई सशक्त विकल्प थे, लेकिन अचानक अजीत जोगी का नाम सामने आया और सोनिया गांधी ने उन्हें मुख्यमंत्री बना दिया। यह फैसला कांग्रेस पार्टी के भीतर ही भारी विवाद और विरोध का कारण बना। राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा गर्म रही कि अजीत जोगी ने सोनिया गांधी को किसी गहरे राज से ब्लैकमेल किया था। उस वक्त एक बड़ी त्रासदी हुई थी— लाड़ली पुत्री (जिसका सार्वजनिक तौर पर जिक्र नहीं किया जाता) ने आत्महत्या कर ली थी। इस घटना के पीछे राहुल गांधी को जिम्मेदार बताया गया था, और इस संवेदनशील मुद्दे को लेकर अजीत जोगी ने सोनिया गांधी पर दबाव बनाया। इस दबाव और राजनीतिक समीकरणों के चलते, सोनिया गांधी को अजीत जोगी को मुख्यमंत्री बनाने का फैसला लेना पड़ा, भले ही वे विधायक भी नहीं थे। पार्टी के भीतर विरोध के बावजूद, जोगी छत्तीसगढ़ के पहले मुख्यमंत्री बन गए और लगभग तीन साल तक सत्ता संभाली।

भूपेश बघेल: एक और रहस्यमयी तख्तापलट!

2018 के विधानसभा चुनाव में जब कांग्रेस को भारी बहुमत मिला, तो मुख्यमंत्री पद के लिए दो नाम सबसे आगे थे— टी.एस. सिंहदेव और ताम्रध्वज साहू। पार्टी नेतृत्व ने पहले टी.एस. सिंहदेव और फिर ताम्रध्वज साहू का नाम लगभग तय कर दिया था। लेकिन आखिरी समय में बाजी पलट गई और अचानक भूपेश बघेल मुख्यमंत्री बन गए। इस अप्रत्याशित घटनाक्रम के पीछे भी एक बड़ी साजिश बताई जाती है। कांग्रेस के बड़े नेता यह कहने से भी नहीं चूकते 12 तुगलक लेन राहुल गांधी के आवास SPG की कड़ी सुरक्षा होने के बाद किस हालत और कैसे साल 2017 में स्ट्रिंग करने के लिए मोबाइल अंदर ले जाया गया और इसके पीछे कैसी साजिश थी और कौन कर रहा था, जबकि राहुल गांधी के निवास के अंदर जाने वाले सभी नेताओं के मोबाइल एसपीजी ने गेट में ही जमा करा दिए थे बड़े नेता ये कहने से भी नहीं चूकते और आरोप भी लगा रहे है. कि ये हो न हो भूपेश की सहमति और भूपेश के द्वारा ही राहुल गांधी का एक स्टिंग ऑपरेशन करवाया गया था, यह स्टिंग आपरेशन उनके आवास में करवाया गया था झीरम नक्सली कांड से जुड़ी कुछ संवेदनशील जानकारियां तथा मंतूराम कांड का विस्तार भी रिकॉर्ड की गईं। इस स्टिंग की जानकारी जब राहुल गांधी तक पहुंची, तो राजनीतिक समीकरण बदल गए। कहीं ऐसा तो नहीं भूपेश बघेल ने यह स्टिंग ऑपरेशन सीधे राहुल गांधी को दिखाकर अपने लिए मुख्यमंत्री पद की गारंटी ले ली। उनके इस मास्टरस्ट्रोक के आगे कांग्रेस हाईकमान को झुकना पड़ा और अंतिम समय में ताम्रध्वज साहू और टी.एस. सिंहदेव को पीछे हटना पड़ा। उसी स्ट्रिंग में कवासी लखमा को झीरम कांड का दागी बताने वाले नेता गण मंत्री पद से नवाजा गया क्या मज़बूरी थी? जबकि भूपेश बघेल ने जब्त की गई पेन ड्राइव के बारे में अपने ट्विटर के जरिए खुलासा करने की कोशिश नहीं की, ये नहीं बताया कि पेन ड्राइव कहां से कितनी में खरीदी और पेन ड्राइव की सच्चाई क्या है, कहीं भूपेश के दिमाग की चालबाजी तो नहीं। भाजपा को मुसीबत में डालने की नई चाल भी हो सकती है। पक्ष जानने के लिए जनता से रिश्ता ने लगातार भूपेश और चैतन्य बघेल से संपर्क करने की कोशिश की, लेकिन दोनों से बातचीत नहीं हो सकी।

दोनों मुख्यमंत्री और कांग्रेस का ब्लैकमेल कनेक्शन! शक के दायरे में...

छत्तीसगढ़ की राजनीति में यह पहला मौका नहीं था जब कांग्रेस हाईकमान को ब्लैकमेल के चलते अपने फैसले बदलने पड़े।

• पहले अजीत जोगी ने सोनिया गांधी के सबसे गहरे पारिवारिक राज से दबाव बनाया और बिना विधायक रहते मुख्यमंत्री की कुर्सी हथिया ली।

• फिर भूपेश बघेल ने मंतुराम और झीरम कांड का इस्तेमाल कर फायदा था ताजपोशी की संभावना!

अब सवाल उठता है— क्या कांग्रेस की राजनीति में सत्ता का रास्ता साजिश और ब्लैकमेल से ही तय होता है?

क्या पर्दे के पीछे का सच सामने आएगा? क्या जब्त की गई मंतुराम की पेन ड्राइव में राहुल गांधी के निवास की स्ट्रिंग होगी? जाँच का विषय

राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा तेज हो गई है कि भूपेश बघेल द्वारा करवाए गए स्टिंग ऑपरेशन का मास्टरमाइंड जल्द ही सामने आ सकता है। यदि यह स्टिंग सार्वजनिक हो जाता है, तो यह न सिर्फ कांग्रेस पार्टी के लिए एक बड़ा झटका होगा, बल्कि भूपेश बघेल की राजनीतिक जमीन भी हिल सकती है।

छत्तीसगढ़ के दो मुख्यमंत्री— अजीत जोगी और भूपेश बघेल— दोनों ही ब्लैकमेल की राजनीति के जरिए सत्ता तक पहुंचे। यही बात कांग्रेस के सभी बड़े नेता विगत कई सालों से कर रहे है, सच्चाई का ठिकाना नहीं, सवाल अनेक है, यह है कि क्या यही कांग्रेस की सत्ता नीति है? और क्या छत्तीसगढ़ में कांग्रेस की राजनीति साजिशों और दबाव की बुनियाद पर ही आगे बढ़ेगी?

आने वाले समय में इस पूरे घटनाक्रम का सच सामने आएगा, और तब शायद कांग्रेस के भीतर भी भूचाल आ सकता है!

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