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DCP-ADM के नेतृत्व में 50 जवानों ने खंगाली बैरकें
Raipur. रायपुर। केंद्रीय जेल रायपुर में सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने और प्रतिबंधित अथवा आपत्तिजनक सामग्री की मौजूदगी की जांच के लिए जिला प्रशासन और रायपुर पुलिस कमिश्नरेट की संयुक्त टीम ने औचक निरीक्षण किया। डीसीपी क्राइम आईपीएस स्मृतिक राजनाला, डीसीपी सेंट्रल जोन तारकेश्वर पटेल और एडीएम उमाशंकर बांधे के नेतृत्व में करीब 50 पुलिस जवानों की टीम ने जेल परिसर और अलग-अलग बैरकों की सघन तलाशी ली। करीब चार घंटे तक चले इस अभियान में किसी विशेष प्रतिबंधित या आपत्तिजनक सामग्री की बरामदगी नहीं हुई।
जानकारी के अनुसार, केंद्रीय जेल में औचक निरीक्षण की कार्रवाई सुबह करीब 11 बजे शुरू हुई और दोपहर 3 बजे तक जारी रही। इस दौरान एंटी क्राइम एंड साइबर यूनिट (ACCU), क्राइम ब्रांच और सेंट्रल जोन के विभिन्न थानों के अधिकारी-कर्मचारी शामिल रहे। जेल में अचानक बड़ी संख्या में पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों के पहुंचने के बाद अलग-अलग टीमों का गठन कर बैरकों की एक साथ जांच शुरू की गई। अधिकारियों के मुताबिक अभियान का मुख्य उद्देश्य केंद्रीय जेल की आंतरिक सुरक्षा व्यवस्था की जांच करना और यह सुनिश्चित करना था कि कैदियों के पास किसी तरह की प्रतिबंधित या आपत्तिजनक सामग्री मौजूद न हो। इसके लिए जेल परिसर के संवेदनशील और चिन्हित स्थानों के साथ कैदियों के सामान की भी बारीकी से जांच की गई। तलाशी अभियान को व्यवस्थित और प्रभावी बनाने के लिए पुलिसकर्मियों को अलग-अलग टीमों में बांटा गया था। इन टीमों को अलग-अलग बैरकों की जिम्मेदारी दी गई।
पुलिस टीमों ने एक साथ संबंधित बैरकों में प्रवेश कर कैदियों और उनके सामान की जांच की। इसके साथ बैरक के अंदर उन स्थानों को भी देखा गया, जहां प्रतिबंधित वस्तुओं को छिपाए जाने की आशंका हो सकती है। अभियान की निगरानी अतिरिक्त डीसीपी सेंट्रल जोन विवेक शुक्ला, अतिरिक्त डीसीपी एसीसीयू गौरव मंडल, एसीपी कोतवाली दीपक मिश्रा और प्रशिक्षु डीएसपी अमित कोसमा ने की। अधिकारियों के नेतृत्व में गठित टीमों ने अपने-अपने निर्धारित हिस्सों में पहुंचकर सघन चेकिंग की और सुरक्षा से जुड़े विभिन्न पहलुओं की जानकारी ली। केंद्रीय जेल के महिला बैरक की जांच के लिए अलग से टीम गठित की गई थी। महिला बैरक में निर्धारित सुरक्षा मानकों का पालन करते हुए चेकिंग की गई। इसके अलावा जेल परिसर के अन्य चिन्हित स्थानों की भी तलाशी ली गई। अधिकारियों ने जांच के दौरान जेल प्रशासन से सुरक्षा व्यवस्था और निगरानी से संबंधित जानकारी भी ली।
करीब चार घंटे तक चली कार्रवाई के दौरान कोई विशेष आपत्तिजनक या प्रतिबंधित सामग्री बरामद नहीं होने की जानकारी सामने आई है। इसके बावजूद अधिकारियों ने जेल प्रशासन को सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सतर्क रहने और लगातार निगरानी बनाए रखने के निर्देश दिए हैं। पुलिस और जिला प्रशासन के अनुसार जेलों में इस तरह के औचक निरीक्षण का उद्देश्य केवल प्रतिबंधित सामग्री की तलाश करना नहीं, बल्कि मौजूदा सुरक्षा व्यवस्था की वास्तविक स्थिति का आकलन करना भी है। बिना पूर्व सूचना के जांच होने से बैरकों और जेल परिसर की सुरक्षा व्यवस्था को वास्तविक परिस्थितियों में परखा जा सकता है। जेलों में मोबाइल फोन, नशीले पदार्थ, धारदार वस्तुएं या अन्य प्रतिबंधित सामग्री पहुंचने की आशंका को देखते हुए समय-समय पर तलाशी अभियान चलाए जाते हैं।
ऐसे अभियान जेल के भीतर अनुशासन और निगरानी व्यवस्था बनाए रखने के लिए महत्वपूर्ण माने जाते हैं। हालांकि रायपुर केंद्रीय जेल में हुई इस ताजा जांच में ऐसी कोई विशेष सामग्री नहीं मिलने की बात कही गई है। औचक निरीक्षण के दौरान जिला प्रशासन, पुलिस कमिश्नरेट और जेल प्रशासन के बीच समन्वय भी देखा गया। बड़ी संख्या में जवानों को शामिल करने का उद्देश्य कम समय में जेल के विभिन्न हिस्सों की समानांतर जांच करना था, जिससे कोई भी प्रमुख स्थान चेकिंग से छूट न जाए। अधिकारियों ने जेल प्रशासन को कैदियों की गतिविधियों, सामान की आवाजाही और प्रतिबंधित वस्तुओं के संभावित प्रवेश पर लगातार नजर रखने के निर्देश दिए। सुरक्षा से जुड़े निर्धारित नियमों का कड़ाई से पालन करने और संदिग्ध गतिविधि मिलने पर तत्काल कार्रवाई करने को कहा गया। फिलहाल केंद्रीय जेल में करीब चार घंटे तक चले औचक निरीक्षण और सघन तलाशी अभियान में कोई विशेष प्रतिबंधित सामग्री बरामद नहीं हुई है। पुलिस और प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि जेल की आंतरिक सुरक्षा मजबूत बनाए रखने के लिए इस तरह की आकस्मिक जांच आगे भी की जा सकती है।
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