छत्तीसगढ़

लावारिस लाशों का अंबार, उनके अपने आज तक नहीं आए ढूंढने

Nil dhankar
20 Feb 2026 10:53 AM IST
लावारिस लाशों का अंबार, उनके अपने आज तक नहीं आए ढूंढने
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रायपुर। मौत के बाद हर इंसान सम्मानजनक विदाई और अपनों के कंधे की उम्मीद करता है, लेकिन रायपुर में पिछले 13 सालों में चार हजार से अधिक ऐसे शव पहुंचे, जिन्हें उनके परिवार का साथ नसीब नहीं हुआ।संस्थान के संचालक सैय्यद जमीर अली बताते हैं कि रायपुर संभाग में एम्स, पंडरी और आंबेडकर अस्पताल में आने वाले हर अज्ञात लाश का कफन दफन वही करते हैं। उनके पास मौजूद आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2013 से लेकर अब तक लगभग 4,000 से अधिक अज्ञात शव बरामद किए गए हैं। पुलिस और समाज सेवी संस्थाओं ने इन शवों का कफन-दफन तो कर दिया, लेकिन इनमें से अपनों की पहचान कर पाने का आंकड़ा बेहद निराशाजनक है। इन हजारों शवों में से 13 सालों में केवल आठ लोगों के परिजन ही उन्हें तलाशते हुए यहां तक पहुंच पाए।

हजारों शवों का अज्ञात रह जाना पुलिस की शिनाख्त प्रणाली और मिसिंग पर्सन ट्रैकिंग सिस्टम पर भी गंभीर सवाल खड़ा करता है। ये 4,000 लोग केवल आंकड़े नहीं हैं, ये किसी के बेटे, पिता या भाई थे, जिनका परिवार शायद आज भी उनकी घर वापसी की राह देख रहा होगा। लावारिस लाशों का यह अंबार बताता है कि शहर की भागदौड़ में मानवीय संवेदनाएं कहीं पीछे छूट गई हैं।

आठ मामले भी बेहद भावुक और जटिल रहे। जब महीनों या सालों बाद स्वजन को पता चला कि उनके लापता सदस्य की मौत हो चुकी है और उसे लावारिस मानकर दफना दिया गया है, तो प्रशासन की मदद से कानूनी प्रक्रिया अपनाई गई। इसके बाद कब्रिस्तान से शवों को खोदकर बाहर निकाला गया और अंतिम संस्कार के लिए स्वजन को सौंपा गया।


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