छत्तीसगढ़
टिकरापारा में बच्चे पर पालतू कुत्ते ने किया हमला, FIR दर्ज
Shantanu Roy
21 March 2026 6:44 PM IST

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छग
Raipur. रायपुर। टिकरापारा इलाके में 12 वर्षीय बच्चे के ऊपर पड़ोसी के पालतू कुत्ते ने हमला कर दिया, जिसमें बच्चे के बांये हाथ और पैर में चोट लगी। घटना के बाद परिवार ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई है और आरोपी पर उचित कार्रवाई की मांग की है। जानकारी के अनुसार, घटना 19 मार्च 2026 की रात लगभग 10:00 बजे हुई। पीड़ित बच्चे के माता-पिता ने बताया कि वह घर पर थीं और उसी समय मोहल्ले के बच्चे आए और बताया कि उनके बेटे सिद्धार्थ गुप्ता को कुत्ते ने काट लिया है। तुरंत बाहर जाकर देखा तो सिद्धार्थ गुप्ता के बांये पैर और बांये हाथ में चोटें थीं।
पीड़ित माता-पिता ने बताया कि यह हमला पड़ोसी तुषार यादव के पालतू कुत्ते द्वारा किया गया। तुषार यादव ने अपने कुत्ते को लापरवाही से खुला छोड़ दिया था, जिसके कारण कुत्ते ने बच्चा काट लिया। चोट लगने के बाद बच्चे को तुरंत मेकाहारा अस्पताल ले जाया गया, जहां उसका उपचार किया गया। चिकित्सकों ने बताया कि चोट गंभीर नहीं है, लेकिन समय पर उपचार जरूरी था। इस घटना को आसपास के लोग भी देख और सुन चुके हैं। पीड़ित ने पुलिस को बताया कि पड़ोसी की लापरवाही से यह घटना हुई है और इस तरह की घटनाओं को रोकने के लिए आरोपी के खिलाफ कार्यवाही होना आवश्यक है।
स्थानीय पुलिस ने कहा कि शिकायत मिलने के बाद मामले की जांच शुरू कर दी गई है। पुलिस आसपास के CCTV फुटेज और लोगों के बयानों की मदद से आरोपी और उसके पालतू कुत्ते की जिम्मेदारी तय करेगी। पुलिस ने परिवार को भरोसा दिलाया कि जल्द ही उचित कार्रवाई की जाएगी। पालतू जानवरों को घर या सुरक्षित जगह पर रखना जरूरी है। लापरवाही से छोड़ने पर जान-माल का नुकसान हो सकता है। इस घटना ने एक बार फिर यह दिखाया कि पालतू जानवरों की देखभाल में जिम्मेदारी बेहद जरूरी है।
पीड़ित परिवार ने पुलिस से अपील की है कि आरोपी के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए ताकि भविष्य में किसी और को नुकसान न पहुंचे। पड़ोसियों ने भी कहा कि इलाके में बच्चों की सुरक्षा को लेकर प्रशासन और पुलिस को सतर्क रहना चाहिए। स्थानीय लोग मानते हैं कि पालतू जानवरों के चलते होने वाली घटनाओं से बचने के लिए नियम और जागरूकता जरूरी है। प्रशासन को चाहिए कि ऐसे मामलों में लापरवाही पर जुर्माना या चेतावनी दे ताकि भविष्य में कोई बच्चा सुरक्षित रह सके। इस घटना ने यह भी स्पष्ट किया कि बच्चों की सुरक्षा के लिए माता-पिता और स्थानीय प्रशासन को मिलकर काम करना होगा। पुलिस की कार्यवाही और प्रशासनिक निगरानी ही ऐसे हादसों को रोक सकती है।
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