छत्तीसगढ़
प्रदेश में म्यूल खाते एवं समूह ब्याज से लोग परेशान
jantaserishta.com
4 Sept 2026 11:17 AM IST

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राजधानी में फर्जी खाते खुलवाने वाले लोगों की तादाद काफी संख्या में
साइबर अपराधी म्यूल खातों का इस्तेमाल कर आम नागरिकों को फंसा रहे हैं
ठगी की रकम को इन्ही म्यूल खातों में जमा करवा रहे साइबर अपराधी
पुलिस के लाख समझाइश और सख्ती के बावजूद भी लोग इससे बच नहीं पा रहे हैं
रायपुर। म्यूल खातों औऱ समूह ब्याज के मामले में छत्तीसगढ़ में भी लोग परेशान हैं। थोड़े से पैसे के लालच में लोग तमाम कानूनी प्रक्रिया में फंस जाते हैं और जितना पैसा मिला होता है उससे भी ज्यादा पैसे उन्हें बचने के लिए खर्च करने पड़ जाते हैं। आमतौर पर देखा गया है कि घर घर में काम करने वाली बाइयाँ और कम आय वाले लोग चंद पैसों की लालच में गिरोह के चंगुल में आ जाते हैं। राजधानी में इस तरह के फर्जी खाते खुलवाने वाले लोगों की तादाद काफी संख्या में हो गई है। इस कारण देश और प्रदेश के आम नागरिक बेहद परेशान हैं, क्योंकि साइबर अपराधी इन खातों का इस्तेमाल ठगी की रकम को छिपाने और मनी लॉन्ड्रिंग के लिए कर रहे हैं। ठग अक्सर कम पढ़े-लिखे लोगों, गरीब नागरिकों, छात्रों या बेरोजगारों को 5 से 10 हजार रुपये या कमीशन का लालच देकर उनके आधार और पैन कार्ड ले लेते हैं और उनके नाम पर बैंक खाते खुलवा लेते हैं। इसके बाद, इन खातों का पूरा नियंत्रण साइबर अपराधियों के हाथ में चला जाता है।
भोले भले लोग चंगुल में
हालांकि जब पुलिस या जांच एजेंसियां किसी साइबर फ्रॉड की जांच करती हैं, तो वे इन खातों को फ्रीज कर देती हैं, जिससे सीधे-साधे और निर्दोष लोग कानूनी पचड़े में फंस जाते हैं। हाल ही में केंद्रीय जांच ब्यूरो और राज्यों की पुलिस ने इस सिंडिकेट के खिलाफ बड़ा देशव्यापी अभियान चलाया है।फिर भी साइबर फ्राड करने वाले किसी भी तरीके से भोले भले लोगों को अपने चंगुल में फंसा ही ले रहे हैं।
आधार और पैन कार्ड का इस्तेमाल
जालसाज लोगों के असली दस्तावेजों जैसे आधार और पैन कार्ड का इस्तेमाल करके फर्जी फर्में कागजों पर दिखाते हैं और बैंकों में करंट या सेविंग्स अकाउंट खोल लेते हैं। जिसकी जानकारी मूल खातेधारियो को नहीं होती और वे अपना कारगुजारी दिखा कर चम्पत हो जाते हैं। इससे आम नागरिकों की अपनी जमा-पूंजी भी अटक जाती है और बाद में इधर उधर भटकते फिरते हैं। क्योंकि मूल खाताधारक वो ही होते हैं उन्हें फ्रॉड की जानकारी हो या न हो, लेकिन खाते का मालिक तो होते ही हैं इसीलिए दस्तावेज के आधार पर पुलिस इन्हे पकड़ती है और कानूनी कार्रवाई की पूरी जिम्मेदारी उसी पर आ जाती है।
कमीशन के बदले पैसा मंगाने और भेजने का खेल
प्रदेश की पुलिस जरूर ये सूचना लोगों तक पंहुचा रही है कि किसी अजनबी के कहने पर कमीशन के बदले अपने खाते में पैसा मंगाने और आगे भेजने के झांसे में बिल्कुल न आएं लेकिन लालच में वे पुलिस की बात को नजऱअंदाज़ कर देते हैं और बाद में परेशान होते हैं जबकि आम जनता को चाहिए कि पुलिस की अपील को ध्यान में रख कर अपना आधार कार्ड, पैन कार्ड, चेक बुक, एटीएम कार्ड या नेट बैंकिंग का पासवर्ड किसी भी अनजान व्यक्ति के को हरगिज नहीं देना या दिखाना चाहिए और न ही कभी भी पैसों के लालच में आकर अपना बैंक खाता किसी दूसरे व्यक्ति को संचालित करने के लिए न देना चाहिए।
फर्जी खातों की भरमार देखी जा रही
म्यूल अकाउंट का मतलब ऐसे बैंक खातों से है जिनका इस्तेमाल साइबर अपराधी ऑनलाइन ठगी, डिजिटल अरेस्ट, और मनी लॉन्ड्रिंग के अवैध पैसों को छुपाने या ट्रांसफर करने के लिए करते हैं। अभी पिछले कुछ सालों में ऐसे फर्जी खातों की भरमार देखी जा रही है।
क्योंकि फ्राड लोग गरीब लोगों, मजदूरों और छात्रों को आसानी से पैसे कमाने या कमिसन का लालच देकर उनके नाम पर खाते खुलवाते हैं या उनके खाते किराए पर ले लेते हैं और उनके दस्तावेजों का दुरुपयोग भी वे करने लगते हैं।
इस मामले में पुरे देश की पुलिस सहित छत्तीसगढ़ पुलिस की राज्य साइबर सेल भी इस तरह के फर्जी खातों के खिलाफ लगातार छापेमारी कर करोड़ों रुपये के अवैध ट्रांजैक्शन वाले म्यूल अकाउंट्स को सीज करने बैंको को भी आगाह कर रहे हैं।
बिना कागजी कार्रवाई के फॉर्म या दस्तावेज नहीं भरने पड़ते
घरों की महिलाओं द्वारा आपस में ब्याज पर पैसे देने की यह परंपरा पुरानी है। इसे अनौपचारिक वित्तीय लेन-देन भी कहा जाता है। जिसके तहत महिलाएं अपने आस-पास की पड़ोसियों या रिश्तेदारों को जानती हैं। बिना कागजी कार्रवाई के बैंक की तरह लंबे फॉर्म या दस्तावेज नहीं भरने पड़ते। और पैसे तुरंत और एक दूसरे के भरोसे पर ही मिल जाते हैं। देखा जाए तो यह महिलाओं के घरेलू जरूरत , बच्चों की फी,स या किसी छोटे काम के लिए बहुत अच्छा होता है इसमें न किसी बैंक के दरवाजे जाना पड़ता न ही किसी कागजी कार्यों को पूरी करना पड़ता यह लोन आपसी तालमेल पर ही मिल जाता है। इसलिए यह महिलाओं में लोकप्रिय हो गया है। मजे की बात इश लोन में ब्याज की कोई दर तय नहीं होती है। महिलाएं समूह आपस में बैठकर ही ब्याज दर तयकर लेते है। इस समूह के जरिए आपात स्थिति में तुरंत नकद मदद मिल जाती है।जो महिलाओं के लिए बचत औऱ कमाई का जिरया भी बन जाती है। इशके लावा इस लोन में जोखिम भी होता है। यदि महिलाओं में आपसी खटास हो गया तो वक्त में पैसे लौटाने में दिकक्त होती है जिससे आपसी संबंध खराब हो सकते है औऱ पुलिस कचहरी का भी सामना करना पड़ सकता है।
महिलाओं की समूह ब्याज की परंपरा पुरानी
घरों की महिलाएं आपस में ग्रुप बनाकर एक दूसरे को जो पैसों की लेनदेन करते है उसमें भी ब्याज दर अजीब तरह का होता है। इनकी बैठक वाली दुनिया भी अलग हटकर है। आपस में बीसी की तरह यह भी एक समूह होता है, िजसके तहत 25 हजार के फंड में मात्र 20 हजार देकर 5ी हजार काट लिया जाता है। जिसका भुगतान दोगुना से तीन गुना करना पड़ता है।
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